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शिवसेना

शिवसेना का मुख्य प्रभाव क्षेत्र महाराष्ट्र है, जहां भाजपा के सहयोग से इसने कई दफा सरकार बनाई है। इस समय यह भाजपा के नेतृत्व में बनी महाराष्ट्र सरकार के साथ केंद्र सरकार का भी हिस्सा है। इसकी स्थापना 19 जून 1966 को बाला साहेब ठाकरे ने की थी, जो मुख्य रूप से एक राजनीतिक कार्टूनिस्ट थे। यह दल बाला साहेब के नेतृत्व में मुंबई में चले एक आंदोलन की उपज है, जो उन्होंने मराठी लोगों को गैर-मराठियों पर वरीयता देने के लिए चलाया था। इस समय लोकसभा में इसके 18, राज्यसभा में 4 और महाराष्ट्र विधानसभा में 63 निर्वाचित सदस्य हैं। हालांकि इसकी छवि एक कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादी दल की है। पिछले कई दशकों से मुंबई की महानगरपालिका पर शिवसेना का दबदबा है, जिसका बजट देश के कई राज्यों से भी अधिक है। इस समय बाला साहेब के पुत्र उद्धव ठाकरे इसके राष्ट्रीय अध्‍यक्ष और सर्वेसर्वा हैं। 1989 से ही शिवसेना और भाजपा में राजनीतिक और चुनावी सहयोग होता आया है। हालांकि दोनों पार्टियों ने 2014 का महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा, लेकिन चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए दोनों साथ हो गए। सामना नामक अखबार इसका मुखपत्र है।

  • अरुण जेटली(भाजपा)

    प्रधानमंत्री की जाति कैसे प्रासंगिक है? उन्होंने कभी जाति की राजनीति नहीं की। उन्होंने केवल विकासात्मक राजनीति की है। वह राष्ट्रवाद से प्रेरित हैं। जो लोग जाति के नाम पर गरीबों को धोखा दे रहे हैं वे सफल नहीं होंगे। ऐसे लोग जाति की राजनीति के नाम पर केवल दौलत बटोरना चाहते हैं। बीएसपी या आरजेडी के प्रमुख परिवारों की तुलना में प्रधानमंत्री की संपत्ति 0.01 फीसद भी नहीं है।

  • दिग्विजय सिंह(कांग्रेस)

    मैं सदैव देशहित, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की बात करने वालों के साथ रहा हूं। मैं धार्मिक उन्माद फैलाने वालों के हमेशा खिलाफ रहा हूं। मुझे गर्व है कि मुख्यमंत्री रहते हुए मुझ में सिमी और बजरंग दल दोनों को बैन करने की सिफारिश करने का साहस था। मेरे लिए देश सर्वोपरि है, ओछी राजनीति नहीं।

  • राहुल गांधी(कांग्रेस)

    हमारे किसान हमारी शक्ति और हमारा गौरव हैं। पिछले पांच साल में मोदी जी और भाजपा ने उन्हें बोझ की तरह समझा और व्यवहार किया। भारत का किसान अब जाग रहा है और वह न्याय चाहता है

  • नरेंद्र मोदी(भाजपा)

    आज भारत दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है, लेकिन कांग्रेस, डीएमके और उनके महामिलावटी दोस्त इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए वे मुझसे नाराज हैं

  • राबड़ी देवी(राजद)

    जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर लालू जी से मिलने उनके और तेजस्वी यादव के आवास पर पांच बार आए थे। नीतीश कुमार ने वापस आने की इच्छा जताई थी और साथ ही कहा था कि तेजस्वी को वो 2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और इसके लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में लालू उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दें।

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