Menu
  • Epaper
  • Hindi News
  • Subscribe
अपने पसंदीदा टॉपिक्स चुनें close

बहुजन समाज पार्टी

बहुजन समाज पार्टी देश की तीसरी सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी है। इसकी वर्तमान अध्यक्ष मायावती हैं, जो चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। पार्टी का लक्ष्य बहुजन, जिनमें अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक शामिल हैं, उनको समाज में उचित स्थान दिलाना है। पार्टी की विचारधारा भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी दर्शन के साथ ही बौद्ध दर्शन से भी प्रेरित है। पार्टी का गठन कभी दलितों के करिश्माई नेता रहे कांशीराम ने 14 अप्रैल 1984 को किया था। इसका चुनाव चिन्ह हाथी है। 13वीं लोकसभा में पार्टी के 14 सदस्य, 14वीं में 17 और 15वीं लोकसभा में 21 थी। हालांकि वर्तमान 16वीं लोकसभा के लिए इसका कोई उम्मीदवार नहीं जीत पाया। हालांकि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभाओं में इसके कुछ सदस्य हैं। वैसे पार्टी का मुख्य आधार उत्तर प्रदेश है, जहां की विधानसभा में इस समय उसके 19 सदस्य हैं।

  • अरुण जेटली(भाजपा)

    प्रधानमंत्री की जाति कैसे प्रासंगिक है? उन्होंने कभी जाति की राजनीति नहीं की। उन्होंने केवल विकासात्मक राजनीति की है। वह राष्ट्रवाद से प्रेरित हैं। जो लोग जाति के नाम पर गरीबों को धोखा दे रहे हैं वे सफल नहीं होंगे। ऐसे लोग जाति की राजनीति के नाम पर केवल दौलत बटोरना चाहते हैं। बीएसपी या आरजेडी के प्रमुख परिवारों की तुलना में प्रधानमंत्री की संपत्ति 0.01 फीसद भी नहीं है।

  • दिग्विजय सिंह(कांग्रेस)

    मैं सदैव देशहित, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की बात करने वालों के साथ रहा हूं। मैं धार्मिक उन्माद फैलाने वालों के हमेशा खिलाफ रहा हूं। मुझे गर्व है कि मुख्यमंत्री रहते हुए मुझ में सिमी और बजरंग दल दोनों को बैन करने की सिफारिश करने का साहस था। मेरे लिए देश सर्वोपरि है, ओछी राजनीति नहीं।

  • राहुल गांधी(कांग्रेस)

    हमारे किसान हमारी शक्ति और हमारा गौरव हैं। पिछले पांच साल में मोदी जी और भाजपा ने उन्हें बोझ की तरह समझा और व्यवहार किया। भारत का किसान अब जाग रहा है और वह न्याय चाहता है

  • नरेंद्र मोदी(भाजपा)

    आज भारत दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है, लेकिन कांग्रेस, डीएमके और उनके महामिलावटी दोस्त इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए वे मुझसे नाराज हैं

  • राबड़ी देवी(राजद)

    जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर लालू जी से मिलने उनके और तेजस्वी यादव के आवास पर पांच बार आए थे। नीतीश कुमार ने वापस आने की इच्छा जताई थी और साथ ही कहा था कि तेजस्वी को वो 2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और इसके लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में लालू उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.OK