[ केशव प्रसाद मौर्य ]: आज जब दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है और सामाजिक मेल-मेलाप से बचने यानी सोशल डिस्टेंसिंग की आवश्यकता रेखांकित की जा रही है तब संयम और अनुशासित जीवन की महत्ता बढ़ गई है। देश में लॉकडाउन की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों को एक तरह की लक्ष्मण रेखा खींच कर अपने घर पर रहने की अपील की। लक्ष्मण रेखा को एक तरह का लॉकडाउन कहा जा सकता है, जो मां सीता की सुरक्षा के लिए था। डिस््ट्टे

भगवान राम ने मर्यादा का पालन किया इसीलिए मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए

आज जब लक्ष्मण रेखा की चर्चा बारंबार हो रही है तब भगवान राम का स्मरण हो आना स्वाभाविक है, क्योंकि उनका पूरा जीवन संयम और अनुशासन का पालन करते हुए बीता। चूंकि उन्होंने अनेक कष्ट सहकर हर तरह की मर्यादा का पालन किया इसीलिए वे मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाए। उन्होंने पुत्र, पिता, भाई, पति और साथ ही शासक के रूप में जिस तरह मर्यादाओं का पालन किया वह हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इसमें कोई संशय नहीं कि आज संयम और अनुशासन के साथ हर तरह की मर्यादाओं का पालन करने की जरूरत कहीं अधिक बढ़ गई है। भगवान राम ने अपने जीवनकाल में हर व्यक्ति की गरिमा और प्रतिष्ठा की जैसी चिंता की, आज वैसी ही चिंता हम सब भी करें, इसकी भी आवश्यकता बढ़ गई है।

लॉकडाउन के दौरान निर्धन, वंचितों का ध्यान रखना हम सबका नैतिक दायित्व है

इसका कारण यही है कि पूरा देश लॉकडाउन है और इस समय समाज के निर्धन, वंचित तबके का विशेष ध्यान रखना हम सबका नैतिक दायित्व है। इस नैतिक दायित्व का निर्वाह जिस तरह भगवान राम ने किया वह हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत बन सके तो मौजूदा संकट से आसानी से पार पाया जा सकता है। हम इसकी अनदेखी नहीं कर सकते कि राम का सारा का सारा जीवन सामाजिक मूल्यों का चिंतन है।

धैर्य के साथ सहनशक्ति की जरूरत

वनवासी जीवन जीने और राजा बनने के समय उन्होंने समाज में समरसता और मर्यादा के जो मानदंड स्थापित किए उनका अनुकरण करना आज और अधिक आवश्यक जान पड़ रहा है। भगवान राम ने अपने संपूर्ण जीवन में धैर्य के साथ सहनशक्ति का जैसा परिचय दिया वैसा ही परिचय देने की जरूरत आज देश ही नहीं पूरी दुनिया को भी है। ऐसी ही जरूरत वंचित लोगों के कुशलक्षेम की चिंता करने की भी है। ऐसा करके ही हम कोरोना रूपी महासंकट को मात दे सकते हैं।

बाबर के सेनापति मीर बकी ने रामजन्मभूमि मंदिर का विध्वंस करके मस्जिद का निर्माण किया

इससे शुभ और कुछ नहीं कि संयम और अनुशासन का परिचय देने के मामले में अद्भुत मिसाल कायम करने वाले भगवान राम अपनी प्रभुता, लौकिकता और पौराणिकता के साथ अपने वैकल्पिक सिंहासन पर शोभायमान हो गए हैं और कुछ वर्ष बाद अपने जन्म स्थान पर अधिष्ठित होंगे। इसके लिए उन्हें कई सदियों तक प्रतीक्षा करनी पड़ी, क्योंकि मुगल शासक बाबर के आदेश पर उसके सेनापति मीर बकी ने रामजन्मभूमि मंदिर का विध्वंस करके उस स्थान पर मस्जिद का निर्माण किया, जिसे 1940 तक मस्जिद-ए-जन्म स्थान कहा जाता रहा।

भगवान राम को पांच सौ साल का इंतजार करना पड़ा

एक तरह से भगवान राम को पांच सौ साल का इंतजार करना पड़ा। राम, कृष्ण और शिव के बिना भारत की कल्पना करना भी मुश्किल है। समाजवादी चिंतक राममनोहर लोहिया ने कहा था कि ‘राम इस देश के कर्म, कृष्ण इसके हृदय और शिव इसके मष्तिष्क हैं।’ राम, कृष्ण और शिव की त्रयी ही भारत को अदभुत बनाती है। ऊर्जावान बनाती है और विश्व में आध्यात्मिक गुरु का दर्जा प्रदान करती है।

अयोध्या जब रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण की गवाह बन रही है

यह अदभुत योग है कि हमारी आस्था का धाम अयोध्या जब रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण की गवाह बन रही है, तब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बतौर सांसद विश्व की उस सबसे प्राचीनतम नगरी काशी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जहां बाबा विश्वनाथ खुद विराजमान हैं। राम से बड़ा राम का नाम है। राम नाम ने देश की हवा बदल दी। यह उनका ही आशीर्वाद था कि मध्यकाल में महान संत गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस जैसी अलौकिक रचना कर उसे घर-घर पहुंचा दिया।

तुलसीदास जी ने अपनी रचना से घर-घर को राम मंदिर बना दिया

तुलसीदास जी ने अपनी इस रचना से घर-घर को राम मंदिर बना दिया। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस की रचना काशी में रहकर पूरी की। काशी और अयोध्या का संबंध बहुत गहरा है। रामचरितमानस की रचना के करीब तीन सौ साल बाद अशोक सिंहल के नेतृत्व में विश्व हिंदू परिषद ने रामजन्मभूमि की मुक्ति का बिगुल बजाया जो एक शंखनाद में बदल गया। रामजन्मभूमि आंदोलन देखते-देखते राष्ट्रीय भावनाओं के प्रकटीकरण का आंदोलन बन गया। अशोक जी ने इसके माध्यम से देश की मुख्यधारा की राजनीति बदल दी। ध्यान रहे कि इस आंदोलन ने भी लोगों के धैर्य को रेखांकित किया। एक बार फिर देश को धैर्य धारण करने की जरूरत है।

राम मंदिर को राष्ट्रमंदिर कहना अधिक उपयुक्त

राम मंदिर को आज सही मायने में राष्ट्रमंदिर कहना अधिक उपयुक्त होगा। उत्तर प्रदेश सरकार राम मंदिर के साथ-साथ पूरी अयोध्या का ही उसका पुराना गौरव स्थापित करने के लिए संकल्पित है। फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या कर दिया गया है। ताकि इसके समूचे क्षेत्र का समुचित और समन्वित विकास किया जा सके।

अयोध्या धाम विश्वस्तरीय सुविधाओं से होगा लैस

हमें पूरा विश्वास है कि राम मंदिर के निर्माण पूरा होने तक अयोध्या धाम कई विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगा और दुनिया के पर्यटन नक्शे पर इसका विशेष स्थान होगा। कुछ समय बाद भगवान राम का मंदिर जब बनकर तैयार होगा तब यह उम्मीद की जाती है कि अपना देश मुक्त होकर आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक-कूटनीतिक तौर पर मजबूत पायदान पर होगा। ऐसा ही हो, इसके लिए हमें भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेनी होगी। ऐसा करना इसलिए और आवश्यक है, क्योंकि उनके मानवीय गुणों और विशेषकर संयम, अनुशासन और मर्यादाओं के पालन के प्रति समर्पण को अपनाने से हमें कोरोना संकट को दूर करने में मदद मिलेगी।

( लेखक उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं )

Posted By: Bhupendra Singh

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस