लोगों की पहचान और उनके दस्तावेजों की पुष्टि करने वाली प्रक्रिया कितनी लाभकारी सिद्ध हो रही है, इसका पता पंजाब में लाखों की संख्या में फर्जी लाभार्थियों के सामने आने से चल रहा है। इस राज्य में 45 लाख परिवार सस्ता अनाज ले रहे थे। जब उनसे केवाईसी कराने को कहा गया तो पात्र लाभार्थी काफी कम निकले।

करीब 31 लाख लोग भ्रष्ट तौर-तरीकों का सहारा लेकर अपात्र होते हुए भी केंद्र सरकार की सस्ता अनाज योजना का लाभ उठा रहे थे। इससे बड़ी विडंबना और चिंता की बात कोई नहीं कि जो लोग गरीबी रेखा से नीचे नहीं थे वे भी मुफ्त अनाज ले रहे थे। जिन लाखों लोगों ने केवाईसी नहीं कराई उनके बारे में इस नतीजे पर पहुंचना स्वाभाविक है कि वे अपात्र थे।

यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी सरकारी सुविधा अथवा रियायत या राहत का अनुचित लाभ उठाया जा रहा हो। इस तरह के मामले अन्य अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं में भी सामने आते रहे हैं। इन मामलों के सामने आने से इसी आवश्यकता को बल मिलता है कि प्रत्येक योजना के लाभार्थियों की केवाईसी कराई जानी चाहिए। किसान सम्मान निधि, राशन कार्ड समेत अन्य अनेक मामलों में केवाईसी होती है।

उचित यह होगा कि केंद्र एवं राज्य सरकार की प्रत्येक योजना को केवाईसी से जोड़ा जाए ताकि सरकारी सहायता और सुविधा का लाभ उन्हीं लोगों को मिल सके जो उसके अधिकारी हैं। इसका कोई औचित्य नहीं कि जो पात्र नहीं यानी सक्षम हैं, वे किसी भी सरकारी सुविधा-सहायता का अनुचित लाभ उठाएं।

ऐसा इसलिए नहीं होना चाहिए, क्योंकि केंद्र एवं राज्य सरकारें सैकड़ों करोड़ रुपये की सब्सिडी देती हैं। इस सब्सिडी का दुरुपयोग भ्रष्टाचार के अलावा और कुछ नहीं। कई बार इस भ्रष्टाचार में सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल होते हैं। निश्चित तौर पर नेता लोग भी शामिल होते हैं और इसीलिए वे यदाकदा केवाईसी को अनावश्यक एवं जटिल भी करार देते हैं।

यह निरा झूठ है और एक तरह से भ्रष्टाचार की अनदेखी भी। इसका अनुमान लगाना कठिन है कि फर्जी लाभार्थियों ने कितनी बड़ी धनराशि अनुचित रूप से हासिल की होगी। इस राशि का एक बड़ा हिस्सा भ्रष्ट नेताओं और नौकरशाहों की जेब में गया होगा। इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि अपने देश में भ्रष्टाचार के नियंत्रित न हो पाने का एक बड़ा कारण भ्रष्ट नेता, अधिकारी एवं कर्मचारी भी हैं।

कई बार आम लोग भी भ्रष्ट तौर-तरीके अपनाने में संकोच नहीं करते। यह ठीक है कि अनावश्यक केवाईसी नहीं होनी चाहिए और बार-बार नहीं होनी चाहिए, लेकिन कुछ योजनाओं और सुविधाओं में तो अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। यह आवश्यक हो गया है कि सिम कार्डधारकों की केवाईसी के साथ ही उसे आधार से जोड़ने का काम इस तरह से हो ताकि कोई भी फर्जी नाम से सिम न लेने पाए।