संपादकीय: संयुक्त राष्ट्र का रवैया
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में आतंकी सरगना दाऊद इब्राहिम के गिरोह को भारत आधारित बताए जाने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है
HighLights
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम को भारत आधारित बताया।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए।
दाऊद इब्राहिम दशकों से पाकिस्तान में छिपा हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र अपनी महत्ता और विश्वसनीयता किस तरह खो रहा है, इसका ताजा प्रमाण है उसके मानवाधिकार और आतंकवाद-रोधी मामलों के विशेष प्रतिवेदक बेन साल की रिपोर्ट में यह कहा जाना कि आतंकी सरगना दाऊद इब्राहिम का गिरोह भारत आधारित है। इस पर हैरानी नहीं कि इस कारण उसे भारत की फटकार सुननी पड़ी।
अपनी इस फजीहत के लिए संयुक्त राष्ट्र स्वयं के अतिरिक्त अन्य किसी को दोष नहीं दे सकता। दाऊद इब्राहिम के बारे में ऐसी भ्रामक और नितांत झूठी जानकारी संयुक्त राष्ट्र के कामकाज के तरीकों पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। समझना कठिन है कि आतंकी सरगना के रूप में दुनिया भर में कुख्यात दाऊद को लेकर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिवेदक इस नतीजे पर कैसे पहुंच गए कि वह भारत में सक्रिय है, जबकि पिछले कई दशकों से वह पाकिस्तान में रह रहा है।
भारत समय-समय पर इसके प्रमाण भी उपलब्ध कराता रहा है। इसके अतिरिक्त अमेरिका ने 2023 में दाऊद को वैश्विक आतंकी नामित किया था और उस पर इनाम भी रखा था। अमेरिका का यह भी निष्कर्ष था कि वह कराची में छिपा है। यही भारत कहता रहा है।
दाऊद इब्राहिम को भारत आधारित गिरोह बताने वाली रिपोर्ट आस्ट्रेलिया के प्रोफेसर बेन साल के नेतृत्व में तैयार हुई है। संभव है कि इसे तैयार करने में उन लोगों का भी हाथ हो, जो भारत के प्रति दुराग्रह से ग्रस्त हैं। वैसे खुद बेन साल की विश्वसनीयता भी संदिग्ध है। एक रिपोर्ट के अनुसार उनके कार्यालय को चीन से भारी-भरकम राशि मिली थी। इसके बाद बेन साल ने चीन में उइगर मुसलमानों के अत्याचारों पर बयान जारी करने से इन्कार कर दिया था।
संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद-रोधी मामलों को देखने वालों की ओर से दाऊद के बारे में शरारतपूर्ण रिपोर्ट तैयार किए जाने से यही लगता है कि आतंक के मामले में उन्होंने कामचलाऊ रवैया अपना रखा है। शायद इसका कारण संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों में पाकिस्तान जैसे कई ऐसे देशों का सक्रिय होना भी है, जो खुले-छिपे रूप से आतंक की पैरवी करते हैं और यह किसी से छिपा नहीं कि चीन किस तरह उसे भारत के खिलाफ अपना मोहरा बनाए हुए है। यह अच्छा हुआ कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र को याद दिलाया कि दाऊद उसी पाकिस्तान में रहता है, जहां ओसामा बिन लादेन पाया गया था।
यह चिंताजनक है कि अभी हाल में संयुक्त राष्ट्र की ओर से भारत में हो रहे प्रदर्शनों से निपटने के तरीकों पर भी चिंता जताई गई थी। यह अनावश्यक चिंता थी और इस पर भी उसे भारत के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था। इस प्रतिरोध से अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी सहमति जताई थी। यदि संयुक्त राष्ट्र अपनी प्रतिष्ठा बचाना चाहता है तो उसे अपना रवैया सुधारना ही होगा।




-1792606042745_v.webp)






