संजय गुप्त, प्रधान संपादक, दैनिक जागरण। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 101वें स्थापना दिवस पर आयोजित इस समारोह में अपने विचार रखने का अवसर मिलना मेरे लिए गौरव की बात है। 101 वर्ष पहले जब संघ की स्थापना हुई थी, तब देश पराधीन था। उस समय हिंदू समाज को संगठित करना और उसे सामर्थ्यवान बनाना प्रमुख उद्देश्य था। स्वतंत्रता के बाद संघ ने व्यक्ति निर्माण, भारतीयता और राष्ट्रनिष्ठा को अपने कार्य का आधार बनाया।

मेरा मानना है कि किसी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी आर्थिक समृद्धि से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के संस्कार, चरित्र और कर्तव्यबोध से भी होती है। भारत आज आर्थिक प्रगति के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन सामाजिक समरसता, अनुशासन और उत्तरदायित्व के मोर्चे पर काफी कुछ किया जाना बाकी है। जाति, पंथ और वर्ग के भेद से ऊपर उठकर ही हम एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम केवल यह न पूछें कि देश हमें क्या दे रहा है, बल्कि यह भी सोचें कि हम देश को क्या दे सकते हैं। राष्ट्र के प्रति निष्ठा तभी सार्थक होगी, जब हम अपने नागरिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेंगे।

दैनिक जागरण की संपादकीय दृष्टि भी सनातन भारतीय मूल्यों, राष्ट्रभक्ति, समरसता और सद्भावना को मजबूत करने की रही है। एक समाचार पत्र के रूप में हम नागरिकों को उनके दायित्वों के प्रति जागरूक करना अपना नैतिक कर्तव्य मानते हैं। जब प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्य को समझेगा, तभी भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप विश्व को दिशा देने वाला समृद्ध-सामर्थ्यवान राष्ट्र बन सकेगा।