आत्म-शक्ति मनुष्य की एक महत्वपूर्ण मानसिक ताकत है। इस ताकत के माध्यम से व्यक्ति बड़े से बड़े कार्यो को कर सकता है। आत्म-शक्ति प्रत्येक व्यक्ति में होती है, लेकिन अनेक लोग इस ताकत का प्रयोग करना नहीं जानते। आत्म-शक्ति से परिपूर्ण व्यक्ति शारीरिक व मानसिक, दोनों ही तरह से शक्तिशाली व धैर्यवान होते हैं। अध्यात्म आत्म-शक्ति को प्रकट करता है और आत्म-शक्ति से परिपूरित व्यक्तियों के जीवन में सुख व खुशियां लाता है। अध्यात्म का अभिप्राय मात्र पूजा-अर्चना नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत सभी शक्तियों व सद्गुणों का समावेश किया जाता है। अध्यात्म के माध्यम से व्यक्ति अपनी आत्म-शक्ति को मजबूत बना सकता है। आत्म-शक्ति ही व्यक्ति को सफलता की ओर ले जाती है। कमजोर प्रवृत्तिवाले व्यक्ति आत्महीनता के बोध से ग्रस्त रहते हैं। जब वे अध्यात्म के मार्ग पर चलना शुरू कर देते हैं तब उन्हें स्वयं में सकारात्मक परिवर्तन महसूस होते हैं। यदि आत्म-शक्ति प्रबल होती है तो व्यक्ति हर परेशानी का साहस के साथ मुकाबला कर सकता है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए आत्म-शक्ति और अध्यात्म, दोनों का समान रूप से विद्यमान होना अनिवार्य है।

अध्यात्म केवल आत्म-शक्ति ही प्रबल नहीं करता, बल्कि यह व्यक्ति के अंदर आत्मविश्वास भी सुदृढ़ करता है। स्वामी विवेकानंद अध्यात्म के माध्यम से ही आत्मविश्वास और आत्म-शक्ति को जाग्रत कर सके थे। उन्होंने समूचे विश्व को जाग्रत किया था। आज भी उनके जीवन मूल्य आध्यात्मिक रूप से युवाओं को प्रेरित करते हैं। आत्म-शक्ति को आध्यात्मिक रूप से जाग्रत किया जा सकता है। इसके लिए व्यक्ति को कुछ समय शांत रहकर आंखें बंद करके स्वयं से यह कहना होगा कि वह हर समस्या का मुकाबला कर सकता है। स्वयं को आध्यात्मिक मनोदशा में रखकर एकाग्रता से इस पर चिंतन किया जाए कि आत्म-शक्ति से विशालकाय पर्वत को भी ध्वस्त करना सरल है, तो व्यक्ति की आत्म-शक्ति प्रबल होकर हर पल उसके साथ खड़ी रहेगी।

[रेनू सैनी]

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