प्रत्येक व्यक्ति सफल होना चाहता है। जब वह असफल होता है तो खीझकर अपनी असफलता के बिंदु तलाशने लगता है कि आखिर कहां कमी रह गई? असफल होने के पीछे सबसे बड़ी वजह व्यवहार कुशलता की कमी है। वे लोग जो अधिक परिश्रमी नहीं हैं, लेकिन व्यवहार कुशल हैं तो वे प्रतिभाशाली और मेहनती लोगों से अधिक सफलता हासिल कर लेते हैं। मोटिवेशनल स्पीकर विली जॉली इस बारे में कहते हैं, ‘ऐसा क्यों है कि कुछ लोग जिस चीज में भी हाथ डालते हैं, वह सोना बन जाती है, जबकि दूसरे कई लोग लक्ष्य पर कभी निशाना ही नहीं लगा पाते? इसका जवाब यह है कि वे लोग सफलता की विधि जानते हैं। जिस तरह केक या कचौड़ी बनाने की एक विधि होती है, उसी तरह सफलता की भी एक विधि होती है।’ इस विधि में अनेक मिश्रणों का घोल शामिल है जिनमें व्यवहार कुशलता, संकल्प, श्रम और सकारात्मक सोच शामिल है।

वे लोग जो सामाजिक परिवेश में संकुचित और शर्मीले होते हैं अक्सर आत्मविश्वास की कमी से असफलता के शिकार हो जाते हैं। उन्हें यह अहसास ही नहीं होता कि असफल होने में उनकी किस्मत का नहीं, बल्कि उनके व्यवहार कुशल न होने का दोष है। व्यवहार कुशल व्यक्ति न केवल खुद कामयाब होता है, बल्कि अपनी संगति में आने वाले लोगों का भी सफलता से साक्षात्कार कराने में सहायक होता है। व्यवहार कुशल होना बिल्कुल भी मुश्किल नहीं है, बस इसके लिए आपको एक सरल सा कार्य करना है कि आप लोगों के साथ वैसा ही व्यवहार करें जैसा आप अपने साथ चाहते हैं। यदि महज इस छोटी सी बात को अच्छी तरह समझकर प्रयोग में लाया जाए तो न केवल असंख्य लोग असफल होने से बच सकते हैं, बल्कि वे अपनी सफलता के मापदंडों को तोड़कर उत्कृष्टता के प्रतिमान तक सफलता प्राप्त कर सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि अच्छा व्यवहार प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करता है और इस तरह वह सभी का प्रिय बन जाता है। अध्यात्म एवं आशा से व्यक्ति व्यवहार कुशल बनता है। इसलिए व्यवहार कुशल बनें तो सफलता निश्चित ही आपके कदम चूमेगी। इतिहास में सफल व्यक्तियों की सूची निकालकर देखें तो पाएंगे कि उनमें से अधिकांश ऐसे थे जिनके कुशल व्यवहार ने दूसरों पर अमिट छाप छोड़ी।

           [ रेनू सैनी ]

Posted By: Bhupendra Singh