अभिमन्यु शर्मा। केंद्र सरकार एवं राज्य प्रशासन के प्रयासों के कारण कश्मीर की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। यह इसी का परिणाम है कि बीते सोमवार को प्रशासन ने कश्मीर में सभी पोस्ट पेड मोबाइल सेवा बहाल कर दी। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35-ए को हटाने और इसके पुनर्गठन के बाद पांच अगस्त से ही टेलीफोन सेवाएं और मोबाइल इंटरनेट पूरी तरह से बंद रखा गया था। सरकार को यह आशंका थी कि इंटरनेट और फोन से कश्मीर को लेकर अफवाहें फैलेंगी और इससे हालात सुधरने के स्थान पर बिगड़ जाएंगे। दक्षिण कश्मीर के शोपियां में ड्राइवर की हत्या सहित कुछ इक्का-दुक्का घटनाओं को छोड़ दिया जाए तो अब ढाई महीने से पूरे जम्मू-कश्मीर में स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है।

पहली बार हुआ ऐसा

कश्मीर में पहली बार किसी की गोली लगने से मौत नहीं हुई। यह सब कश्मीर में सुधर रहे हालात को तस्वीर दिखा रहे हैं। उत्साहित प्रशासन ने भी इसके बाद पूरी कश्मीर घाटी में चालीस लाख पोस्ट पेड मोबाइल सेवाओं को बहाल कर दिया। सरकार ने यह सब फैसले यकायक नहीं किए। जैसे-जैसे सरकार को लगा कि कश्मीर में अब हालात सुधर रहे हैं, वैसे ही उसने पाबंदियों में ढील देनी शुरू की।

लोगों को दिलाया विश्वास 

पहले प्राथमिक शिक्षा तक के स्कूलों को खोल कर लोगों को विश्वास दिलाया कि सब कुछ सामान्य है। फिर मिडिल और हायर सेकेंडरी स्तर के स्कूलों को खोला। जब स्थिति शांतिपूर्ण रही और विद्यार्थियों की संख्या भी स्कूलों में बढ़ी तो कॉलेज और विश्वविद्यालय भी खोल दिए गए। इससे सरकार ने देश-विदेश में यह संदेश दिया कि कश्मीर में अब हालात तेजी के साथ सुधर रहे हैं। इसके बाद सरकार ने पर्यटकों के कश्मीर में न जाने के लिए जो एडवाइजारी जारी की थी, उसे भी वापस ले लिया। इससे कश्मीर को लेकर पाकिस्तान जो दुष्प्रचार कर रहा है, वह भी बेनकाब हुआ। एडवाइजारी वापस लेने के दो दिन बाद ही पर्यटकों ने कश्मीर में फिर से जाना शुरू कर दिया।

मोबाइल सेवा शुरू

अब सरकार ने कश्मीर में चालीस लाख पोस्ट पेड मोबाइल को शुरू कर दिया है। इससे कश्मीर में भी खुशी की लहर है और स्थानीय लोगों को भी यह विश्वास होने लगा है कि वहां पर सब कुछ सामान्य है। यह सही है कि कश्मीर में अभी भी दुकानदार और व्यापारिक प्रतिष्ठान पूरी तरह से नहीं खुल पाए हैं। मगर सरकार ने जिस प्रकार से स्थानीय लोगों से सेव खरीद कर उन्हें उसके उचित मूल्य दिलाए, उसने कश्मीर के लोगों को भी एक नई उम्मीद दी है। सरकार कश्मीर के लोगों को यह समझाने में लगी है कि बदली परिस्थितियों में कश्मीर में अधिक विकसित और खुशहाल होगा। कश्मीर दौरे पर आए आल इंडिया सूफी सजदानशीन काउंसिल के प्रतिनिधिमंडल ने भी कश्मीर में हालात सामान्य होने की बात की। इस प्रतिनिधमंडल में देश के कई राज्यों से सूफी संत और मुस्लिम धार्मिक गुरु शामिल थे। इससे सरकार के प्रयासों को भी बल मिल रहा है और जम्मू-कश्मीर के विकास को लेकर कई अहम फैसले भी ले रही है।

जारी रहेगी दरबार मूव प्रक्रिया

जम्मू-कश्मीर में बेहतर प्रशासन के लिए वर्षो पहले शुरू की गई दरबार मूव की प्रक्रिया अभी जारी रहेगी। इस साल भी श्रीनगर में 25 अक्टूबर को श्रीनगर में नागरिक सचिवालय बंद हो जाएगा और चार नवंबर को जम्मू में सचिवालय काम करना शुरू कर देगा। अठारह अक्टूबर को श्रीनगर से एडवांस पार्टियां जम्मू में पहुंचनी शुरू हो जाएंगी और जम्मू सचिवालय में काम शुरू करने के लिए तैयारियां शुरू कर देंगी। दो राजधानियों वाले राज्य जम्मू-कश्मीर में दरबार मूव की प्रक्रिया डोगरा शासक महाराजा रणबीर सिंह ने वर्ष 1872 में शुरू की थी। बेहतर शासन के लिए शुरू की गई इस व्यवस्था के तहत दरबार गर्मियों में कश्मीर एवं सर्दियों में जम्मू में रहता था।

ये है इसका इतिहास

महाराजा का काफिला अप्रैल माह में श्रीनगर के लिए रवाना हो जाता था एवं वापसी अक्टूबर महीने में होती थी। कश्मीर की दूरी को देखते हुए बेहतर शासन की इस व्यवस्था को डोगरा शासकों ने वर्ष 1947 तक बदस्तूर जारी रखा। दरबार मूव की प्रक्रिया अभी भी पहले की तरह ही जारी है। अभी सरकार ने रिकॉर्ड को डिजिटल करने के लिए प्रक्रिया शुरू की है और इसमें काम तेजी के साथ चल भी रहा है। लेकिन जब तक यह काम पूरा नहीं हो जाता तब तक अभी सरकारी रिकॉर्ड ट्रकों में लाद कर ऐसे ही गर्मियों में जम्मू से श्रीनगर और सर्दियों में श्रीनगर से जम्मू आता रहेगा। इस पूरी प्रक्रिया में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं।

(लेखक जम्‍मू-कश्‍मीर के संपादक हैं)

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Posted By: Kamal Verma

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