शेरिंग तोबगे। मैं 27 जुलाई 2019 को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिला था। दस महीने पहले भूटान के चुनावों में मेरी पार्टी पराजित हो गई थी और संसद में पार्टी का कोई प्रतिनिधित्व नहीं था। मैं न तो प्रधानमंत्री था और न ही सांसद। मैं पीएम मोदी से एक आम नागरिक के तौर पर मिला। मैंने अपने कार्यकाल के दौरान उनके सहयोग के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। मैंने उनसे कहा कि वे हमेशा मेरे बड़े भाई रहेंगे, सिर्फ इसलिए नहीं कि वे उम्र में बड़े हैं, बल्कि इसलिए भी कि उन्होंने मेरे साथ वैसा ही स्नेह दिखाया, जैसा एक बड़ा भाई अपने छोटे भाई के प्रति दिखाता है।

फिर मैंने उनसे एक और बात कही। मैंने उन्हें एक दैवीय अवतार के रूप में देखा। मैंने बताया कि हमारे इलाके में, ज्ञानी और नेक शासकों को लंबे समय से ऐसा ही माना जाता रहा है। मेरी ही बातों ने मुझे हैरान कर दिया। बाद में, मैंने सोचा कि आखिर मैंने ऐसा क्यों कहा? क्या मैं भावनाओं में बह गया था? क्या मैं गलत था? जब मैंने अपनी कही बातों पर विचार किया, तो जवाब स्पष्ट हो गया। पीएम मोदी को अवतार मानना सही था।

मैंने उन्हें लगभग 13 वर्षों तक गुजरात का शासन चलाते देखा था, जब यह राज्य विकास, अवसंरचना, निवेश और योजनाओं के कार्यान्वयन के मामले में देश के लिए एक मिसाल बन गया था। फिर मैंने उन्हें उस महत्वाकांक्षा को पूरे भारत के स्तर पर ले जाते देखा, जिसमें विनिर्माण, विदेशी निवेश, वित्तीय समावेशन, स्वच्छता, तकनीक और अवसंरचना पर जोर दिया गया। इन सबके मूल में था सेवा और काम को पूरा करने पर लगातार जोर। मैंने उनमें एक अनुशासित, ऊर्जावान और असाधारण रूप से मेहनती जनसेवक को भी देखा।

जिस बात ने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया, वह थी देशवासियों की सेवा के प्रति उनका अटूट समर्पण। इससे भी जरूरी बात यह है कि उन्होंने भारतीयों में खुद पर और अपने देश पर एक सशक्त विश्वास जगाया। मेरे लिए ये एक ज्ञानी एवं नेक शासक के गुण हैं। भूटान की बौद्ध परंपरा में, हम 'रिगसुम गोनपो' का सम्मान करते हैं, जो सभी जीवों की मुक्ति के लिए समर्पित बोधिसत्वों की एक त्रिमूर्ति है। मंजुश्री ज्ञान की प्रतीक हैं, अवलोकितेश्वर करुणा का और वज्रपाणि साहस का। मेरे लिए ज्ञानी नेतृत्व का मतलब है, नि:स्वार्थ सेवा के जरिये इन तीन गुणों-बुद्धिमत्ता, करुणा और साहस का उपयोग करना।

आज मैं इन गुणों का पीएम मोदी के 'विकसित भारत' के विजन में स्पष्ट तौर पर समावेश देखता हूं। बुद्धिमत्ता की शुरुआत बेहतर भविष्य के स्पष्ट विजन से होती है। उन्होंने भारत को एक विजन दिया है, आजादी के ठीक एक सदी बाद 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनना। 'विकसित भारत' के साथ उन्होंने उस विजन को एक नाम, एक समयसीमा और राष्ट्रीय मिशन का स्वरूप दिया है। करुणा की शुरुआत दूसरों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को समझने से होती है। 'विकसित भारत' ठीक यही प्रतिबिंबित करता है। एक मजबूत, समृद्ध और विकसित देश के लिए 1.4 अरब भारतीयों की सामूहिक महत्वाकांक्षा। 'सबका साथ, सबका विकास' उस आकांक्षा को दर्शाता है।

साहस की शुरुआत विजन को वास्तविकता में बदलने के संकल्प से होती है। मानव संसाधन बनाना, निवेश आकर्षित करना, अवसंरचना को आधुनिक बनाना और सबसे बढ़कर शासन को बेहतर बनाना। इन सबके लिए साहसिक फैसले लेने और लगातार काम करने की जरूरत होती है। विजन बनाना आसान है, किंतु बदलाव लाना नहीं। नि:स्वार्थ सेवा इन गुणों को एक साथ जोड़ती है। 'विकसित भारत' किसी एक नेता या चुनावी चक्र के बारे में नहीं है। यह इस पीढ़ी और आने वाली पीढ़ियों के बारे में है। 'सबका प्रयास' के जरिये पीएम मोदी ने हर भारतीय से न सिर्फ इस मिशन का समर्थन करने, बल्कि इसे संभव बनाने में भाग लेने का आह्वान भी किया है।

देखा जाए तो 'विकसित भारत' का महत्व भारत से भी परे है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में अपने पड़ोसी देशों को हमेशा प्राथमिकता दी है। उन्होंने वायस आफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन आयोजित करके और अफ्रीकी यूनियन को जी-20 का स्थायी सदस्य बनाने की सफल कोशिश का नेतृत्व करके 'वैश्विक दक्षिण' के हितों को सामने रखा है। विकसित भारत का मतलब विकसित भूटान भी है। जून 2014 में प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही हफ्तों के भीतर पीएम मोदी ने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भूटान को चुना। उस समय मैं प्रधानमंत्री था और मुझे उनका स्वागत करने का सौभाग्य मिला। उस यात्रा के दौरान, उन्होंने हमारे रिश्तों को कुछ शब्दों में समेटा।

बीफारबी: भारत भूटान के लिए, भूटान भारत के लिए। यह बात सुनने में सरल है, लेकिन इसका अर्थ बहुत गहरा है। इन वर्षों में उन्होंने इसे सच करके दिखाया है। यही कारण है कि हमारी 11वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान भारत की मदद से मेरी पहली सरकार एक बड़े विकास कार्यक्रम को पूरा कर पाई। पीएम मोदी ने हमारी 12वीं योजना के दौरान भी इस उदार साझेदारी को बनाए रखा। जब मैं 2024 में दोबारा सत्ता में आया, तो उन्होंने हमारी 13वीं योजना के लिए भारत की मदद को दोगुना करके 10,000 करोड़ रुपये कर दिया।

भारतीय कारोबारियों ने पीएम मोदी के स्पष्ट समर्थन से प्रेरणा ली है। टाटा पावर, अदाणी समूह, जेएसडब्ल्यू एनर्जी और अन्य कंपनियां भूटान के आर्थिक बदलाव में निवेश कर रही हैं, जबकि भारत के बड़े कारोबारी हमारी एक महत्वाकांक्षी परियोजना गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी यानी जीएमसी में संस्थापक सदस्य के तौर पर शामिल हुए हैं। इसलिए, जब महामहिम राजा ने भूटान के लिए पीएम मोदी के असाधारण योगदान को देखते हुए उन्हें हमारे सर्वोच्च सम्मान 'आर्डर आफ ड्रुक ग्यालपो' से सम्मानित किया, तो सभी भूटानी बहुत खुश हुए। यह सम्मान पाने वाले वे पहले और एकमात्र विदेशी राजनेता हैं। मेरे लिए उनका प्रभाव बहुत व्यक्तिगत भी रहा है। मैं लंबे समय से पीएम मोदी को बड़े भाई की तरह मानता रहा हूं और इन वर्षों में उन्हें एक मार्गदर्शक के रूप में देखा है। मैंने पांच साल पहले उन्हें जिस अवतार की संकल्पना में देखा था तो मैं उसे लेकर एकदम सही था।

(लेखक भूटान के प्रधानमंत्री हैं)