जागरण संपादकीय: मोदी शासन के 25 वर्ष
इसी के साथ उन्होंने अपनी विदेश नीति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत का मान भी बढ़ाया। इसी कारण वे पिछले एक दशक से अधिक समय से विश्व के लोकप्रिय शासकों में शीर्ष पर अपना स्थान बनाए हुए हैं।
HighLights
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रशासनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे किए।
उनके कार्यकाल में देश ने अर्थव्यवस्था और सुरक्षा में प्रगति की।
विकसित भारत के लक्ष्य हेतु नौकरशाही में सुधार आवश्यक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रशासनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देश के लिए और अधिक ऊर्जा के साथ काम करने का संकल्प व्यक्त करते हुए यह जो कहा कि वे विकसित भारत के सपने को साकार करेंगे, वह एक कठिन लक्ष्य अवश्य है, लेकिन असंभव नहीं।
इसका कारण यह है कि उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर इस राज्य की तस्वीर बदलने में ऐसी सफलता प्राप्त की कि उनके गुजरात माडल ने देश का ध्यान अपनी ओर खींचा और इसी कारण वे प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए। प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने मनमोहन सरकार की नीतिगत पंगुता से उपजे निराशाजक माहौल को दूर किया और शासन के तौर-तरीके में बुनियादी बदलाव लाए। अपने 12 साल के कार्यकाल में उन्होंने ऐसी छाप छोड़ी है कि उसकी कोई भी अनदेखी नहीं कर सकता।
उन्होंने अर्थव्यवस्था से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक एक साथ कई मोर्चों पर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की और देश को प्रगति पथ पर तेजी के साथ अग्रसर किया। उनकी जनकल्याणकारी और विकास योजनाओं के चलते आज देश की भी तस्वीर बदल चुकी है। यह संभव हुआ उनकी प्रबल राजनीतिक इच्छाशक्ति और साहसिक फैसले लेने की क्षमता के कारण।
उनकी कार्यशैली ने देश के साथ दुनिया का भी ध्यान अपनी ओर खींचा तो इसीलिए कि उन्होंने अपनी योजनाओं को प्रभावी तरीके से अमल में लाकर किसी न किसी रूप में हर भारतीय के जीवन को प्रभावित किया। इसी के साथ उन्होंने अपनी विदेश नीति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पटल पर भारत का मान भी बढ़ाया। इसी कारण वे पिछले एक दशक से अधिक समय से विश्व के लोकप्रिय शासकों में शीर्ष पर अपना स्थान बनाए हुए हैं।
इतने लंबे समय तक किसी शासक का देश-विदेश में लोकप्रिय बने रहना अपने आप में एक उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से लिए गए ऐसे फैसलों की एक लंबी सूची है, जिन्होंने उन्हें एक सक्षम शासक के रूप में स्थापित करने के साथ ही यह भी सिद्ध किया कि वे कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करना और उनसे पार पाना जानते हैं।
उनके शासन की एक विशेषता यह भी रही कि उन्होंने देश के स्वाभिमान और संस्कृति को भी शिखर पर ले जाने का काम किया, लेकिन अब जब वे विकसित भारत के सपने को साकार करने की प्रतिबद्धता जता रहे हैं, तब यह भी ध्यान रखना होगा कि इस लक्ष्य के सामने कुछ बाधाएं हैं।
इनसे पार पाने के लिए सबसे अधिक आवश्यक यह है कि देश की नौकरशाही अपना रवैया बदले। यह इसलिए आवश्यक है, क्योंकि तमाम प्रगति और परिवर्तन के बावजूद कुछ मामलों में भारत अभी कुछ प्रमुख विकासशील देशों जैसा भी नहीं बन पाया है। इसके कारणों की पहचान कर उनका सही तरह निवारण करना मोदी शासन की पहली प्राथमिकता बननी चाहिए।










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