जागरण संपादकीय : पाकिस्तान पर शिकंजा, भारत से तनावपूर्ण संबंध पाकिस्तान को बहुत महंगे पड़ेंगे
जागरण संपादकीय भारत से तनावपूर्ण रिश्तों का पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। मूडीज का आकलन है कि तनाव बढ़ने से पाकिस्तान की जीडीपी नकारात्मक हो सकती है। भारत को पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना चाहिए ताकि उसकी हालत और खराब हो। कर्ज रोकने और FATF की निगरानी सूची में लाने की कोशिश करनी चाहिए।
विश्व की प्रमुख रेटिंग एजेंसी मूडीज के इस आकलन से आश्चर्य नहीं कि भारत से तनावपूर्ण संबंध पाकिस्तान को बहुत महंगे पड़ेंगे। इस एजेंसी का यह भी मानना है कि यदि तनाव लंबा खिंचा तो पाकिस्तान की जीडीपी दर नकारात्मक भी हो सकती है। इसी तरह यदि युद्ध की नौबत आई तो पाकिस्तान के लिए उसे झेल पाना संभव नहीं होगा।
पाकिस्तान पहले से ही खस्ताहाल है। वह लंबे समय से विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी संस्थाओं के साथ-साथ विभिन्न देशों से उधार मांगकर अपना काम चला रहा है। चूंकि पाकिस्तान अपना रवैया सुधारने के लिए तैयार नहीं, इसलिए भारत के लिए केवल यही पर्याप्त नहीं कि वह हर स्तर पर उससे संबंध तोड़ ले।
इसके साथ ही यह भी समय की मांग है कि ऐसे जतन किए जाएं, जिससे पाकिस्तान की आर्थिक हालत और अधिक बदहाल हो। भारत को पाकिस्तान के उन सभी स्त्रोतों को बंद करने के लिए सक्रिय होना चाहिए, जहां से वह तनिक भी विदेशी मुद्रा अर्जित करता है। पाकिस्तान के साथ तनाव का उल्लेख करते हुए भारत को यूरोप के साथ उन सब देशों को सतर्क करना चाहिए, जिनके विमान पाकिस्तानी वायु क्षेत्र का उपयोग करते हैं, ताकि वे अपना रास्ता बदलें और पाकिस्तान ओवर फ्लाइट चार्ज से हाथ धो बैठे।
पाकिस्तान के प्रति आक्रामक मुद्रा बनाए रखकर उसे इतना त्रस्त कर देना चाहिए कि वह बचाव की तैयारी में अपने संसाधन जाया करता रहे। भारत को अधिकाधिक विदेशी कंपनियों को यह संदेश भी देना चाहिए कि यदि वे पाकिस्तान में कारोबार करती हैं तो उनके लिए उसके यहां व्यापार करना कठिन हो सकता है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से पाकिस्तान को दिए जाने वाले कर्ज की समीक्षा की मांग उठाकर सही किया, लेकिन कोशिश यह होनी चाहिए कि यह कर्ज उसे मिलने न पाए। भारत को यह भी देखना होगा कि पाकिस्तान एक बार फिर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की निगरानी सूची में आए। यह कठिन कार्य नहीं, क्योंकि पाकिस्तान कुछ समय पहले तक आतंक के वित्तीय स्त्रोतों की पहचान करने वाली इस संस्था की ग्रे लिस्ट में था।
इस संस्था के सदस्य देश इससे अच्छी तरह परिचित हैं कि पाकिस्तान किस तरह किस्म-किस्म के आतंकी संगठनों को पालता-पोसता है। अब जब भारत ने सिंधु जल समझौते को ठंडे बस्ते में डालकर यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तानी सेना और सरकार की हरकतों की कीमत वहां के लोगों को भी चुकानी पड़ेगी, तब फिर जो भी पाकिस्तानी अपने आनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से भारतीय दर्शकों के सहारे कमाई करता है, उन सबके लिए ऐसा करना कठिन बना दिया जाए। इसी के साथ भारत को अपने नागरिकों को तुर्किये सरीखे उन देशों में पर्यटन के लिए भी हतोत्साहित करना चाहिए, जो पाकिस्तान का छिपे-खुले रूप में साथ देते दिख रहे हैं।
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