प्रधानमंत्री ने बीसवें रोजगार मेले में इक्यावन हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए यह प्रतिबद्धता जताई कि उनकी सरकार रोजगार बढ़ाने के लिए हर मोर्चे पर काम कर रही है। यह सही है कि मोदी सरकार ने 2022 में पहले रोजगार मेले की शुरुआत करते हुए 2023 के अंत तक दस लाख सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य तय किया था और अभी तक 12.75 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं।

यह स्वाभाविक है कि यह सिलसिला कायम रहेगा, लेकिन सच्चाई यह भी है कि सभी युवाओं को सरकारी नौकरियां देना संभव नहीं। वास्तव में कोई भी सरकार हो, वह नौकरी के आकांक्षी सभी युवाओं को सरकारी नौकरियां चाहकर भी नहीं दे सकती। इन स्थितियों में यह आवश्यक ही नहीं अनिवार्य है कि ऐसी परिस्थितियां पैदा की जाएं, जिनसे निजी क्षेत्र में रोजगार के अधिकाधिक अवसर सृजित हो सकें। चूंकि नई तकनीक के आगमन और विशेष रूप से एआइ के कारण नौकरियों की प्रकृति बदल रही है, इसलिए निजी क्षेत्र में भी रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा करना एक चुनौती बन गया है।

आने वाले समय में यह चुनौती और बढ़ सकती है। यह सही है कि एआई के चलते नौकरियों के जो परंपरागत अवसर खत्म होंगे, उनके स्थान पर नए अवसर उत्पन्न होंगे, लेकिन इन नए अवसरों को भुनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन करने की जो आवश्यकता है, उसकी पूर्ति तो प्राथमिकता के आधार पर की ही जानी चाहिए।

यह ठीक नहीं कि वर्तमान में बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा संस्थानों से ऐसी डिग्रियां लेकर निकल रहे हैं, जिनकी उपयोगिता कम होती चली जा रही है। आने वाले समय में सामान्य डिग्रीधारी छात्रों के लिए रोजगार के अवसर और कम हो सकते हैं। इसे देखते हुए सरकार को शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन के लिए तेजी के साथ कदम उठाने होंगे। यह इसलिए भी आवश्यक है, क्योंकि हाल ही में नीति आयोग की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है कि आठ करोड़ से अधिक युवा ऐसे हैं, जो न तो पढ़ाई कर रहे हैं और न ही कोई कार्य और न ही किसी तरह का प्रशिक्षण ले रहे हैं।

नीति आयोग की रिपोर्ट यह भी कहती है कि केवल 8.25 प्रतिशत स्नातक ही ऐसे काम में लगे हैं, जो उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप है। यह अच्छा हुआ कि प्रधानमंत्री ने बढ़ते स्टार्टअप और कौशल विकास कार्यक्रमों की चर्चा की, लेकिन नीति आयोग के इस आकलन की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए कि व्यायसायिक शिक्षा और उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण की कमी के कारण युवाओं की रोजगार क्षमता प्रभावित हो रही है। इसे देखते हुए नीति आयोग के सुझाव के अनुसार रोजगार की क्षमता बढ़ाने के लिए छठी कक्षा से ही छात्रों की अभिरुचि एवं कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए।