राम नाथ कोविन्द। राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 2017 से 2022 तक पांच वर्षों तक मैंने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में निकटता से देखा। इसी अनुभव और सार्वजनिक जीवन में उनके साथ अपने जुड़ाव के आधार पर, मैं उनके जन्मदिन के अवसर पर कुछ विचार साझा करना चाहता हूं। अक्टूबर 2001 में गुजरात में निर्वाचित सरकार की बागडोर संभालने से लेकर 2014 से प्रधानमंत्री कार्यालय की जिम्मेदारी संभालने तक, निर्वाचित सरकार के प्रमुख के रूप में 25 से अधिक वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार एक सरल, किंतु परिवर्तनकारी विचार को आगे बढ़ाया है-'सबका साथ, सबका विकास।'

मोदी युग का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है-सिर्फ विकास को वंचित वर्गों तक पहुंचाना ही नहीं, बल्कि उनको मुख्यधारा में लाना। मोदी सरकार धीरे-धीरे चयनात्मकता के बजाय सर्वव्यापी पहुंच, बहिष्करण के बजाय समावेशन और केवल अधिकार देने के बजाय सशक्तीकरण पर केंद्रित होती गई है। प्रश्न यह नहीं है कि सरकार ने कोई योजना शुरू की है या नहीं, बल्कि यह है कि जिस व्यक्ति तक उस योजना का लाभ पहुंचने की सबसे कम संभावना थी, क्या वास्तव में वह व्यक्ति भी उससे लाभान्वित हुआ है। इस बदलाव को पूर्वोत्तर से बेहतर शायद ही कोई उदाहरण स्पष्ट कर सकता है।

नवंबर 2014 से प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र का 83 से अधिक बार दौरा किया है। इन दौरों के साथ संपर्क-सुविधाओं, बुनियादी ढांचे, निवेश और शांति को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं। इस क्षेत्र में 12 प्रमुख शांति समझौते हुए हैं। वहीं, वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच पूर्वोत्तर के विकास के लिए सात लाख करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए गए हैं, जबकि इससे पिछले दशक में लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। पूर्वोत्तर के बुनियादी ढांचे का मानचित्र भी बदल रहा है।

वर्षों तक दूरदराज की बस्तियों को आमतौर पर देश के 'अंतिम गांवों' के रूप में वर्णित किया जाता रहा। मोदी सरकार ने समझ-बूझकर इस शब्दावली को बदलने का प्रयास किया और इससे भी महत्वपूर्ण रूप से इसके पीछे की नीतिगत प्राथमिकता को भी बदला। अब इन्हें भारत के 'प्रथम गांवों' के रूप में देखा जाता है। वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम सड़कों, संपर्क-सुविधाओं, पर्यटन, आजीविका और आवश्यक सेवाओं के माध्यम से दूरदराज के सीमावर्ती क्षेत्रों में इस विचार को संस्थागत रूप देता है। ऐतिहासिक रूप से अल्पविकसित 112 जिलों को स्थायी रूप से पिछड़े क्षेत्रों के रूप में स्वीकार करने के बजाय, इस कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, अवसंरचना और आजीविका के क्षेत्र में तेजी लाने के लिए मापनीय परिणाम, संयोजन और प्रतिस्पर्धात्मक विकास को बढ़ावा दिया गया।

2023 में आकांक्षी ब्लाक कार्यक्रम के तहत 329 जिलों के 500 ब्लाकों को शामिल किया गया। संदेश स्पष्ट है: भौगोलिक स्थिति किसी क्षेत्र के लिए स्थायी नुकसान का कारण नहीं बन सकती। जनजातीय समुदायों के प्रति दृष्टिकोण में भी यही दर्शन दिखाई देता है। पिछले एक दशक में जनजातीय कार्य मंत्रालय के बजट में 243 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पीएम-जनमन के अंतर्गत सभी 75 विशेष रूप से निर्बल जनजातीय समूहों को शामिल किया गया है। आवास, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य बुनियादी आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान ने इस दृष्टिकोण को और आगे बढ़ाया है। इसके तहत जनजातीय बहुल गांवों और विशेष रूप से निर्बल जनजातीय समूहों की बस्तियों में लंबे समय से विद्यमान विकास संबंधी कमियों को दूर करने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से कार्य किया जा रहा है।

59 करोड़ से अधिक जनधन खातों ने पहले औपचारिक वित्तीय प्रणाली से बाहर रहे परिवारों को इससे जोड़ा है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण ने सरकारी सहायता को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाना संभव बनाया है और राजस्व रिसाव पर अंकुश लगाकर अब तक 5.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संचयी बचत में योगदान दिया है। वित्तीय समावेशन के इस व्यापक विस्तार के साथ बुनियादी सेवाओं की पहुंच भी बढ़ी है। सौभाग्य योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हासिल किया गया। उज्ज्वला योजना के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराया गया है। जल जीवन मिशन के तहत 13 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल से जल कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं।

मोदी सरकार का एक महत्वपूर्ण पहलू केवल लाभार्थी से भागीदार, सहायता प्राप्त करने वाली से उद्यमी और विकास में सहभागी से विकास की नेतृत्वकर्ता बनने तक-को बदलना रहा है। स्वच्छ भारत मिशन ने महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और स्वास्थ्य से सीधे जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे का समाधान किया। मुद्रा योजना ने महिलाओं को अभूतपूर्व स्तर पर उद्यमिता से जुड़ने में सक्षम बनाया, जहां कुल मुद्रा ऋणों में महिलाओं की हिस्सेदारी 68 प्रतिशत है। पीएम स्वनिधि के लाभार्थियों में भी महिलाओं की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत है। लखपति दीदी पहल ग्रामीण परिवर्तन के केंद्र में महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ का मूल उद्देश्य सहभागिता के दायरे को लगातार व्यापक बनाना है। यह शासन के समक्ष एक बुनियादी प्रश्न रखता है: कौन अभी तक पहुंच से बाहर है? किसकी आवाज अब तक नहीं सुनी गई है? मोदी युग की सबसे गहरी विरासत भारतीय मुख्यधारा की इस नई परिभाषा में निहित है।

जब भारत विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, तब महत्वाकांक्षा केवल बड़ी अर्थव्यवस्था, मजबूत बुनियादी ढांचे के नेटवर्क या अधिक सक्षम शासन-व्यवस्था के निर्माण तक सीमित नहीं है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना भी है कि जिस भारत का निर्माण हो रहा है, उसमें उन लोगों की भी समान भागीदारी हो, जो कभी इसकी विकास यात्रा में सबसे कम दिखाई देते थे। मोदी युग का मूल संदेश यही है: जो लोग कभी हाशिए पर थे, वे अब भारत की मुख्यधारा में प्रवेश करने की प्रतीक्षा नहीं कर रहे हैं, वे स्वयं इस मुख्यधारा को आकार देने में योगदान दे रहे हैं।

(लेखक पूर्व राष्ट्रपति हैं)