जागरण संपादकीय: विमानों के लिए नया खतरा
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाई दुबई की उड़ान में ओमानी सह पायलट ने भारतीय मुख्य पायलट स्मित मछार पर हमला कर विमान गिराने की कोशिश की। स्मित मछार ने साहस दिखाते हुए 170 से अधिक यात्रियों की जान बचाई।
HighLights
ओमानी सह पायलट ने दुबई-तेल अवीव उड़ान में भारतीय पायलट पर हमला किया।
भारतीय पायलट स्मित मछार ने अदम्य साहस से 170 से अधिक यात्रियों को बचाया।
इस घटना ने वैश्विक विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल उठाए।
दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाई दुबई एयरलाइंस की उड़ान के ओमानी सह पायलट ने भारतीय मुख्य पायलट स्मित मछार पर हमला कर जिस तरह विमान को गिराने की कोशिश की, उसने विमानन उद्योग के सामने कुछ वैसी ही गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं, जैसी 9/11 की आतंकी घटना ने खड़ी की थीं। 9/11 की घटना में आतंकियों ने काकपिट में घुसने के बाद पायलटों को काबू कर विमानों को न्यूयार्क के वर्ल्ड ट्रेड टावर और वाशिंगटन स्थित पेंटागन से टकरा दिया था।
फ्लाई दुबई विमान का तो सह पायलट ही आतंकी इरादों से लैस निकला। उसने केवल मुख्य पायलट को घायल ही नहीं किया, बल्कि विमान के इंजन से छेड़छाड़ में भी जुट गया। उसकी ये हरकतें उसके आतंकी होने की ही गवाही दे रही हैं। या तो वह विमान गिराना चाहता था या फिर उसे कब्जे में लेकर किसी इमारत से टकराना चाहता था।
यदि भारतीय पायलट ने बेहद विकट परिस्थितियों में अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए काकपिट का दरवाजा नहीं खोला होता तो ओमानी पायलट 9/11 जैसी घटना दोहराने में सफल हो सकता था। काकपिट का दरवाजा न खुल पाने की स्थिति में विमान में सवार इजरायली यात्री और पायलट भी कुछ नहीं कर पाते और एक भीषण घटना घट जाती।
यह स्वाभाविक है कि 170 से अधिक यात्रियों का जीवन बचाने वाले भारतीय पायलट स्मित पूरी दुनिया में नायक के रूप में सराहे जा रहे हैं। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर अपने पेशे के साथ भारत का भी मान बढ़ाया है, लेकिन इस घटना के बाद विमानन उद्योग को विमानों की सुरक्षा के लिए कुछ नए उपाय करने के लिए भी विवश होना पड़ सकता है।
इस अंदेशे को निराधार नहीं कहा जा सकता कि भविष्य में किसी अन्य विमान का पायलट, सह पायलट या फिर चालक दल का कोई सदस्य अतिवादी या जिहादी सोच वाला हो सकता है। कम से कम अब पायलटों एवं उनके साथियों के सामाजिक व्यवहार और सोच-विचार की कहीं अधिक सघन पड़ताल करनी होगी। निजता के नाम पर इसमें किसी तरह की ढिलाई बरतना खतरे को निमंत्रण देना और हवाई यात्रा का जोखिम बढ़ाने वाला सिद्ध हो सकता है।
इसलिए और भी, क्योंकि विमानों का संचालन कहीं अधिक सतर्कता की मांग करता है। इसमें किसी भी तरह की गलती या ढिलाई के लिए कोई गुंजाइश नहीं। अब सुरक्षा एवं सतर्कता का स्तर और अधिक बढ़ाने के अलावा अन्य कोई उपाय नहीं। इसकी अनदेखी न की जाए कि ओमानी सह पायलट ने आपात स्थिति में विमान के बचाव में काम आने वाले क्रैश एक्स यानी एक किस्म की कुल्हाड़ी को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर लिया और उससे ही भारतीय पायलट को लहूलुहान कर दिया। बहुत संभव है कि इस उपकरण का विकल्प खोजना पड़े। जो भी हो, इस घटना का पूरा सच जितनी जल्द सामने आए, उतना ही अच्छा।










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