जैसी आशंका थी, वैसा ही हो रहा है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से छेड़े गए टैरिफ वार से दुनिया भर के शेयर बाजार लड़खड़ा रहे हैं। अन्य देशों की तरह भारतीय शेयर बाजार में भी भारी गिरावट देखने को मिली। यह सिलसिला आगे भी कायम रह सकता है, लेकिन ट्रंप यह देखने से भी इनकार कर रहे हैं कि उनकी टैरिफ नीति का अमेरिका में भी बड़े पैमाने पर विरोध हो रहा है और वहां लोग अपनी जरूरत की सामग्री की अग्रिम खरीद में जुट गए हैं।

ट्रंप ने मनमाने तरीके से दुनिया भर के देशों पर आयात शुल्क लगाकर उस मुक्त अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी, जिसका कभी अमेरिका चैंपियन हुआ करता था। ट्रंप ने जिस तरह एक झटके में विश्व व्यापार व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर दिया, उसके बुरे परिणाम अन्य देशों के साथ अमेरिका को भी भोगने पड़ेंगे।

भले ही ट्रंप दुनिया भर के शेयर बाजारों में जारी उथल-पुथल को लेकर यह कह रहे हों कि उनकी दवा का असर हो रहा है, लेकिन सच तो यह है कि उनकी कुविचारित टैरिफ नीति से न तो अमेरिका का व्यापार घाटा कम होने जा रहा है और न ही वे अमेरिकी उद्योग फिर से स्थापित होने वाले हैं, जो समय के साथ दूसरे देशों में स्थानांतरित हो गए। ये इसलिए स्थानांतरित हुए, क्योंकि अमेरिकी उद्योगपतियों ने यह पाया कि अमेरिका के मुकाबले दूसरे देशों में उत्पादन करना सस्ता है।

यदि ट्रंप यह समझ रहे हैं कि अब अमेरिका में उन सब वस्तुओं का उत्पादन होने लगेगा, जिन्हें अमेरिकी कारोबारी बाहर से मंगाते हैं तो यह उनका दिवास्वप्न ही है, क्योंकि एक तो उद्योग रातों-रात स्थापित नहीं होते और दूसरे अमेरिका में श्रम कहीं अधिक महंगा है। अमेरिकी कारोबारी मुनाफा कमाने के लिए ही दुनिया भर में बड़े पैमाने पर निवेश करते हैं। वे ट्रंप के कहने भर से अमेरिका में उद्योग लगाने लगेंगे, इसके आसार नहीं दिखते।

ट्रंप अपने मनमाने फैसले को सही ठहराने में लगे हुए हैं, लेकिन उन्हें न सही, उनके सलाहकारों को तो इतनी समझ होनी ही चाहिए कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में तत्काल सुधार नहीं हो सकता। हैरानी नहीं कि उनके सहयोगी शेयर बाजारों में गिरावट का फायदा उठाने में लगे हों? जो भी हो, ट्रंप के फैसले से अमेरिका में मंदी आने की आशंका गहरा गई है। यदि यह आशंका सच साबित होती है तो इसका बुरा असर पूरी दुनिया में दिखाई देगा।

यह देखना दुखद है कि सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते जिस अमेरिका को कहीं अधिक जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए, वह घोर गैर जिम्मेदारी का परिचय दे रहा है। भारत को ट्रंप की टैरिफ नीति के दुष्परिणामों का सामना करने के लिए कमर कस लेनी चाहिए, क्योंकि अभी यह कहना कठिन है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौता हो ही जाएगा।