श्रीपद येस्सो नाइक। जब पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग, बढ़ते तापमान, बदलते मौसम और ऊर्जा असुरक्षा के दोहरे संकट से जूझ रही है, तब भारत ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का एक ऐसा रास्ता चुना है, जो आने वाले दशकों में उसकी आर्थिक और रणनीतिक ताकत की बुनियाद बन सकता है। पिछले 12 वर्षों में देश का ऊर्जा परिदृश्य जिस तेजी से बदला है, वह सिर्फ बिजली उत्पादन के आंकड़ों में बढ़ोतरी की कहानी नहीं है। यह आत्मनिर्भरता का एक नया सोपान है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने एक साथ कई मोर्चों पर ऊर्जा परिवर्तन की शुरुआत की है। सौर और पवन ऊर्जा का तेज विस्तार, रूफटाप सोलर, पीएम-कुसुम, पीएम सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना, बड़े सोलर पार्क, आफशोर विंड प्रोजेक्ट, बैटरी स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन- ये सभी एक ऐसी व्यापक ऊर्जा रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका लक्ष्य केवल कार्बन उत्सर्जन घटाना नहीं, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 300 गीगावाट का आंकड़ा पार कर चुकी है। सौर और पवन ऊर्जा इसके सबसे बड़े आधार हैं और कुल स्थापित बिजली क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। भारत को अंदाजा है कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल देश में बिजली की मांग में और तेज वृद्धि होना तय है।

हालांकि भारत की ऊर्जा नीति केवल नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भर रहने की नीति नहीं है। देश को 24 घंटे भरोसेमंद बिजली की जरूरत है। यहां आकर थर्मल पावर और परमाणु ऊर्जा का पलड़ा थोड़ा भारी हो जाता है, लेकिन भारत की रणनीति पारंपरिक और नवीकरणीय ऊर्जा को एक-दूसरे के विकल्प के रूप में देखने के बजाय एक संतुलित ऊर्जा मिश्रण तैयार करने की है। कोयला और परमाणु ऊर्जा से स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, दूसरी तरफ सौर और पवन ऊर्जा का विस्तार तेजी से किया जा रहा है।

यह दृष्टिकोण भारत के ऊर्जा परिवर्तन को व्यावहारिक बनाता है। क्योंकि केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। चुनौती यह भी है कि जब सूरज नहीं निकले या हवा की गति कम हो, तब भी घरों, अस्पतालों, उद्योगों, रेलवे, परिवहन और तेजी से बढ़ते डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बिजली मिलती रहे। इसी वजह से बैटरी एनर्जी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज, स्मार्ट ग्रिड और डिजिटल ऊर्जा प्रबंधन जैसी तकनीकों पर जोर बढ़ रहा है।

सोलर पंप किसानों को सिंचाई के लिए दिन के समय भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के साथ डीजल पर निर्भरता घटाते हैं। वहीं अनुपयोगी या कम उपयोग वाली जमीन पर सोलर प्लांट लगाने वाले किसान अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर आय का नया स्रोत तैयार कर सकते हैं। ऊर्जा परिवर्तन किसाना को ‘ऊर्जादाता’ बनने का भी अवसर दे रहा है। यह बदलाव सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं है। शहरों में रूफटाप सोलर ने मध्यवर्गीय परिवारों के लिए बिजली की लागत कम करने का रास्ता खोला है। पीएम सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के जरिए घरों की छतों को छोटे ऊर्जा केंद्रों में बदलने की दिशा में काम हो रहा है।

स्टोरेज और ग्रिड की चुनौती : भारत के सामने बड़ा सवाल केवल यह नहीं है कि कितनी सौर या पवन ऊर्जा पैदा की जा सकती है। असली चुनौती यह है कि इस ऊर्जा को जरूरत के समय कैसे उपलब्ध कराया जाए। सौर ऊर्जा दिन में अधिक पैदा होती है, जबकि बिजली की मांग निरंतर बनी रहती है। पवन ऊर्जा भी मौसम और हवा की गति पर निर्भर करती है। ऐसे में बैटरी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज, स्मार्ट ग्रिड, एआइ आधारित ग्रिड प्रबंधन और डिजिटल ऊर्जा प्रणालियां भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था के लिए निर्णायक साबित होंगी।

इसी क्षेत्र में भारत के शोध संस्थान, स्टार्टअप, निजी उद्योग और सरकारी एजेंसियां मिलकर स्वदेशी समाधान विकसित करने की कोशिश कर रही हैं। लक्ष्य साफ है- रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़े, लेकिन बिजली ग्रिड की स्थिरता और विश्वसनीयता से कोई समझौता न हो।

इस पूरी यात्रा को केवल ‘ग्रीन एनर्जी’ के चश्मे से देखना शायद इसकी सबसे बड़ी तस्वीर को छोटा कर देगा। इसका सामाजिक असर भी उतना ही महत्वपूर्ण है। गांवों में भरोसेमंद बिजली से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल कनेक्टिविटी और ग्रामीण उद्यमों को गति मिलती है। विकेंद्रीकृत ऊर्जा प्रणालियां स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए अवसर पैदा कर सकती हैं।

वैसे भी आने वाला दशक उन देशों के लिए निर्णायक होगा, जो आर्थिक विकास को बनाए रखते हुए बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा पैदा कर सकेंगे। भारत ने इस दौड़ में अपनी दिशा तय कर ली है। चुनौती इस गति को बनाए रखने, भंडारण को मजबूत करने, घरेलू विनिर्माण को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों को व्यावसायिक रूप से सफल बनाने की है।

(लेखक केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री हैं)