विचार: नकली-घटिया सामग्री का बढ़ता बाजार, कई किलो मिलावटी खोया बरामद
यह लेख भारत में मिलावटी खाद्य पदार्थों और नकली उत्पादों के बढ़ते खतरे पर प्रकाश डालता है। होली जैसे त्योहारों के दौरान आगरा, कानपुर, लखनऊ सहित कई शहरों से मिलावटी खोया, पनीर, खजूर और मसालों की बड़ी खेप पकड़ी गई
HighLights
होली से पहले मिलावटी खोया, पनीर, खजूर की बड़ी बरामदगी।
नकली दवाएं, टूथपेस्ट, साबुन जैसे उत्पाद भी बाजार में।
जन स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा, नियामक सक्रियता पर सवाल।
राजीव सचान। होली निकट आते ही देश भर से ऐसे समाचार आने का सिलसिला कायम हो गया है कि नकली खोया, पनीर या फिर मिलावटी मिठाइयां बरामद। बीते सप्ताह आगरा की एक खबर के अनुसार राजस्थान से लाया गया 1,320 किलो मिलावटी खोया बरामद किया गया। कानपुर से आई एक खबर यह कहती है कि होली और रमजान के पहले 50 लाख रुपये मूल्य के दस हजार किलो पुराने और खराब हो चुके खजूर के पैकेटों पर नए लेबल चिपकाकर उन्हें बाजार में खपाने की तैयारी थी।
इसी दिन की एक अन्य खबर के मुताबिक कानपुर में ही छह सौ किलो मिलावटी खोया पकड़ा गया। इसके अलावा लगभग दो लाख रुपये से अधिक मूल्य की कटी हुई सुपारी भी जब्त की गई, जिसे मिलावटी पाए जाने पर नष्ट किया गया। बीते दिनों लखनऊ से आई खबर ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ जो अभियान चलाया, उसमें करीब 13 क्विंटल सड़े-गले और मानव उपयोग के लिए असुरक्षित खजूर नष्ट कराए गए। इसी अभियान के तहत दो हजार किलो हल्दी, 20 हजार किलो सुपारी जब्त की गई, क्योंकि उसके खराब होने का संदेह था। सहारनपुर की एक खबर के अनुसार खाद्य विभाग ने रामपुर मनिहारान कस्बे में करीब साढ़े छह क्विंटल मिलावटी पनीर बरामद किया।
गत दिनों ही भीलवाड़ा में एक कोल्ड स्टोरेज से बड़ी मात्रा में संदिग्ध मिलावटी मसाले जब्त किए गए। इनमें 23 सौ किलो लाल मिर्च पाउडर और 17 सौ किलो साबुत धनिया को मिलावटी होने के संदेह में जब्त किया गया। इसी माह गुजरात के साबरकांठा में डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, यूरिया आदि का इस्तेमाल करके नकली दूध और छाछ बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया। यह फैक्ट्री पिछले पांच सालों से चल रही थी। बीते दिनों आंध्र के एक कस्बे में मिलावटी-जहरीला दूध पीने से पांच लोगों की मौत हो गई।
यदि बीते 15-20 दिनों की ही देश भर से आई ऐसी खबरों का संज्ञान लिया जाए तो उनका उल्लेख करने के लिए यह पूरा पेज या फिर समाचार पत्र भी कम पड़ सकता है। इन खबरों के आधार पर ऐसे किसी नतीजे पर पहुंचने की भूल नहीं की जानी चाहिए कि केवल त्योहारों पर ही नकली अथवा मिलावटी खाद्य पदार्थ बनने और बिकने लगते हैं। वास्तव में यह काम वर्ष भर बेरोक-टोक चलता है।
किसी को इस नतीजे पर भी नहीं पहुंचना चाहिए कि जिन विभागों पर मिलावटी, नकली, घटिया खाद्य सामग्री पर निगाह रखने और उन्हें बनाने एवं बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी है, वे मिलावटखोरों के खिलाफ सदा सतर्क रहते हैं। सच यह है कि ऐसे विभाग केवल त्योहारों के समय ही सतर्क और सक्रिय दिखते हैं। यह अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है कि उनकी सतर्कता-सक्रियता उस मिलावटी और नकली खाद्य सामग्री का एक हिस्सा ही पकड़ पाती है, जो बाजार में बिकने के लिए आ जाती है।
कल्पना करें कि अपने देश में कितने लोग टनों मिलावटी, नकली और सेहत के लिए हानिकारक खाद्य सामग्री उपभोग करने और ऐसा करके बीमार होने के लिए अभिशप्त हैं? मिलावटी एवं नकली खाद्य सामग्री के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियानों के दौरान ऐसी सूचना तो आती है कि संदिग्ध खाद्य सामग्री के सैंपल परीक्षण के लिए भेजे गए, पर ऐसी खबर मुश्किल से ही आती है कि इन सैंपल के परिणाम क्या रहे?
यदि कभी ऐसी खबर आ भी जाती है तो यह पता चलना कठिन होता है कि मिलावटी या फिर नकली खाद्य सामग्री बनाने-बेचने वालों को सजा क्या मिली? ऐसी खबर मुश्किल से इसलिए आती है, क्योंकि ऐसे लोगों को सजा मिलने के मामले बहुत ही दुर्लभ हैं। केवल इससे चिंतित होने की आवश्यकता नहीं कि अपने देश में नकली, मिलावटी या फिर घटिया किस्म की खाद्य सामग्री बनती और बिकती रहती है। चिंता की बात यह भी है कि दवाओं के मामले में भी यही स्थिति है। रह-रहकर ऐसी खबरें आती हैं कि अमुक-अमुक दवाओं के सैंपल फेल।
गत दिवस की एक खबर यह कहती है कि देश भर में निर्मित 215 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की ओर से जारी ड्रग अलर्ट के अनुसार इनमें से 71 दवाएं हिमाचल में बनी हैं। ये दवाएं मुख्य रूप से एलर्जी, अस्थमा, दर्द-बुखार की हैं। इसके अलावा कुछ एंटीबायोटिक्स और 16 कफ कोल्ड सीरप भी हैं। ऐसे ड्रग अलर्ट नए नहीं हैं और न ही वे यदाकदा जारी होते हैं। वे जारी ही होते रहते हैं, लेकिन नीति-नियंताओं का दोयम दर्जे की खाद्य वस्तुओं और दवाओं की ओर ध्यान तब जाता है, जब लोग गंभीर रूप से बीमार हो जाते हैं या फिर उनकी मौत हो जाती है।
आप उन खबरों से भी अनभिज्ञ नहीं हो सकते, जो यह बताती हैं कि नकली टूथपेस्ट, साबुन जैसे उत्पाद बनाने की फैक्ट्रियां पकड़ी गईं। बीते अगस्त में जयपुर में ऐसी ही एक फैक्ट्री में नामी टूथपेस्ट, क्रीम, साबुन आदि के साथ ब्रांडेड कंपनियों का नकली घी बन रहा था। इसी तरह दिल्ली में एक फैक्ट्री में नकली इनो बना रही फैक्ट्री पकड़ी गई थी। जिस देश में जानलेवा घटिया खाद्य सामग्री इतने बड़े पैमाने बन रही हो, वह आखिर विकसित कैसे बन सकता है? जहां ऐसे निकृष्ट कार्य धड़ल्ले से हो रहे हैं, वहां एआइ समिट में किसी यूनिवर्सिटी की ओर से चीनी रोबोटिक डाग को अपना बताकर पेश करने में किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए।
(लेखक दैनिक जागरण में एसोसिएट एडिटर हैं)



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