Akhilesh Dubey Case: अखिलेश के सहयोगियों ने दी धमकी, पुलिस आयुक्त का तो तबादला हुआ, अब तुम्हें कौन बचाएगा
Akhilesh Dubey Case कानपुर में पुलिस आयुक्त के तबादले की सूचना के बाद अखिलेश दुबे के सहयोगियों ने धमकी दी है। इस पर दो मुकदमे दर्ज हुए हैं। ठेकेदार को फर्जी केस में फंसाने और गोली मरवाने की धमकी दी गई। आरोपितों ने पुलिस आयुक्त के तबादले का हवाला देकर डराने की कोशिश की।

जागरण संवाददाता, कानपुर। विशेष जांच टीम (एसआइटी) की जांच के बाद अधिवक्ता अखिलेश दुबे के सहयोगियों पर किदवई नगर और कोतवाली थाने में रविवार को दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए। दोनों ही मामलों में इंटीरियर डेकोरेशन ठेकेदार ने धमकाने का आरोप लगाया है। किदवई नगर में दर्ज मुकदमे में बकाया रकम मांगने पर छेड़छाड़ के फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई तो कोतवाली में पुलिस आयुक्त का तबादला और अखिलेश दुबे की जमानत होने का डर दिखाकर धमकाने का आरोप लगाया है।
बाबूपुरवा थानाक्षेत्र के सुजातगंज निवासी सैफ इंटीरियर डेकोरेशन की ठेकेदारी करते हैं। सैफ के मुताबिक साकेत नगर के दीप सिनेमा स्थित कास्मोजिन लांज एंड डिस्क के डेकोरेशन का ठेका 10 लाख रुपये में लिया था, जिसके एवज में उसे एक लाख रुपये एडवांस दिए गए। काम पूरा होने पर बकाया नौ लाख रुपये मांगे तो 22 जनवरी को आयुष मिश्रा उर्फ लवी ने उसे क्लब में बुलाया, जहां उसका भाई आशीष मिश्रा उर्फ लकी, प्रशांत और सौरभ द्विवेदी समेत नौ लोग मौजूद थे। उसके क्लब में पहुंचते ही उसे बंधक बना लिया गया।
धमकाया गया कि प्रार्थनापत्र लेकर पुलिस के चक्कर लगाना बंद कर दो। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि चाहेंगे तो तुम्हें ही छेड़छाड़ के आरोप में जेल भिजवा देंगे। इसके बाद आरोपितों ने उसे मारापीटा और जेब में रखे 50 हजार रुपये भी लूट लिए। इसी तरह कोतवाली में उन्होंने मुकदमा दर्ज कराया है, जिसमें बताया कि 26 अगस्त को वह काम से कचहरी गए थे। वहां पर अखिलेश दुबे के सहयोगी लवी मिश्रा का भाई लकी मिश्रा उर्फ आशीष मिश्रा अपने साथियों सौरभ द्विवेदी, मयंक गुप्ता और प्रशांत के साथ मिला।
उसने धमकाते हुए कहा कि पुलिस आयुक्त अखिल कुमार का ट्रांसफर हो गया है अब तुम्हें कौन बचाएगा। तुम्हें पाक्सो एक्ट के झूठे मुकदमे में फंसा देंगे या अपने शूटरों से गोली मरवा देंगे। जल्द ही अखिलेश चाचा जमानत पर बाहर आ रहे हैं। उसके बाद पुलिस उनकी जेब में होगी। पीड़ित सैफ का कहना है कि आठ अगस्त को अखिलेश दुबे के सहयोगियों के खिलाफ ग्वालटोली थाने में मुकदमा दर्ज कराने के बाद से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं।
संयुक्त पुलिस आयुक्त आशुतोष कुमार ने बताया कि ठेकेदार को धमकाने में अखिलेश दुबे के सहयोगियों के खिलाफ किदवई नगर और कोतवाली थाने में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। एक आरोपित लवी मिश्रा जेल में है। बाकी आरोपितों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस आयुक्त के तबादले को लेकर चर्चाओं का दौर, खौफ में माफिया
पुलिस आयुक्त अखिल कुमार के तबादले को लेकर इन दिनों इंटरनेट मीडिया पर चर्चाओं का दौर चल रहा है। वह कब केंद्र में जाएंगे? उनके बाद कौन आएगा? और पुलिस आयुक्त के जाने के बाद माफिया के खिलाफ चलाए जा रहे मिशन महाकाल का क्या होगा? जैसे सवाल लोग पूछ रहे हैं। फिलहाल जिस तरह से पुलिस आयुक्त का जाना और रुकना टल रहा है, उससे माफिया जरूर खौफ में हैं।
25 अगस्त को तबादला सूची हुई थी जारी
पुलिस आयुक्त को केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाना है। 25 अगस्त को केंद्र सरकार द्वारा जारी तबादला सूची में पुलिस आयुक्त को सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन काम करने वाले डिजिटल इंडिया कार्पोरेशन का प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाया गया है। तबसे उनके जाने को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। विशेषकर माफिया का वह वर्ग बेहद खुश है, जिसके खिलाफ अखिल कुमार पिछले डेढ़ सालों ने एक बुरा सपना बने हैं। आरके स्वर्णकार के छोटे से कार्यकाल में पैदा हुए विवादों के बाद अखिल कुमार ने 4 जनवरी 2024 को पुलिस कमिश्नरेट कानपुर की कमान संभाली थी।
फिर शुरू हुई कार्रवाई
बिठूर में एक अपहरण और मारपीट के मामले में बार एसोसिएशन के पूर्व कनिष्ठ उपाध्यक्ष बृज नारायण निषाद की गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस और वकीलों का विवाद शुरू हुआ। वकीलों ने हड़ताल की तो लगा कि पुलिस ने कदम पीछे खींच लिए हैं। मगर, इस घटना के कुछ दिनों बाद ही मेरी एंड मेरी की एक हजार करोड़ कीमत वाली जमीन पर कब्जे की कोशिश में प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया गया। साथ ही पुलिस आयुक्त की ओर से दावा किया गया कि शहर में पुलिस, पत्रकार और वकीलों का गठजोड़ काम कर रहा है, जो लोगों को डरा-धमकाकर उनकी संपत्तियां कब्जा लेता है। बाद में कमलेश फाइटर गिरोह पर कार्रवाई हुई, जो लोगों को अवैध निर्माण का डर दिखाकर वसूली कर रहा था। इसके बाद नंबर दीनू उपाध्याय गिरोह का आया, जो पुलिस की मदद से लोगों की जमीन व संपत्तियां हथिया रहे थे।
सात अगस्त को अखिलेश पहुंचा सलाखों के पीछे
इसी बीच पुलिस आयुक्त ने सात अगस्त को सबको चौका दिया, जब शहर के चर्चित अधिवक्ता अखिलेश दुबे को जेल भेजा गया। पुलिस ने दावा किया कि अखिलेश एक ऐसा गिरोह संचालित कर रहे थे, जो पुलिस की मदद से लोगों के खिलाफ पाक्सो, दुष्कर्म व अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराकर समझौते के नाम पर उनसे जमीनें हथियाकर लाखों करोड़ों में वसूली करता है। पुलिस अवनीश, कमलेश, दीनू उपाध्याय और अखिलेश गिरोह के करीब 60-65 लोगों को अब तक जेल भेज चुकी है, जिसमें तमाम पत्रकार और वकीलों के अलावा कुछ बड़े अपराधी और राजनीति से संबंध रखने वाले लोग शामिल हैं।
जब तक रहेंगे, तेवर ऐसे ही रहेंगे: पुलिस आयुक्त
ऐसे में पुलिस आयुक्त के तबादले की खबर ने शहर में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। वैसे तो पुलिस आयुक्त की प्रोन्नति पुलिस महानिदेशक के पद पर होनी है, इसलिए सितंबर-अक्टूबर तक उनका जाना तय माना जा रहा था, लेकिन जिस तरह से उनके केंद्र में जाने को लेकर इंटरनेट मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म हुआ, उससे तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों की पहली चिंता आपरेशन महाकाल को लेकर है कि उनके जाने के बाद इस अभियान का क्या होगा। वहीं एक वर्ग ऐसा भी है, जो तबादले को शक की नजर से देख रहा है। उनका मानना है कि अखिलेश दुबे के खिलाफ कार्रवाई को कमजोर करने के लिए इस वक्त तबादला किया गया। वहीं पुलिस आयुक्त अखिल कुमार का कहना है कि तबादला सरकारी प्रक्रिया है। वह जब तक रहेंगे, माफिया के खिलाफ उनके तेवर ऐसे ही रहेंगे। उन्हें विश्वास है कि आगे के अधिकारी भी इस अभियान को जारी रखेंगे।
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