जागरण संपादकीय: एक बड़ी सफलता
निर्धनता में लगातार कमी आने के पीछे भारत की अर्थव्यवस्था का पिछले अनेक वर्षों से सबसे तेज गति से बढ़ना भी रहा।
HighLights
2011-2023 में 50 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले।
मोदी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का रहा अहम योगदान।
अत्यधिक निर्धनता 25% घटकर 2.6% पर पहुंची।
विश्व बैंक की निर्धनता एवं समानता संबंधी रिपोर्ट का यह तथ्य भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि का सूचक है कि 2011 से 2023 के बीच देश में लगभग 50 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले। जहां अत्यधिक निर्धन वर्ग के लोगों की संख्या में करीब 25 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई और अब ऐसे लोगों की संख्या मात्र 2.6 प्रतिशत रह गई है, वहीं निम्न मध्यम आय वर्ग के लोगों की संख्या में भी खासी गिरावट आई है।
चूंकि 2011 से 2023 के कालखंड में मोदी सरकार के कार्यकाल की हिस्सेदारी अधिक है, इसलिए स्वाभाविक रूप से निर्धनता को दूर करने में जो सफलता मिली, उसका श्रेय उसके खाते में कहीं अधिक जाएगा। निर्धनता में कमी का प्रमुख कारण खपत में वृद्धि, रोजगार और विशेष रूप से महिलाओं के रोजगार में बढ़ोतरी के साथ खाद्य सब्सिडी जैसे कार्यक्रम और सामाजिक कल्याण की कई योजनाएं हैं।
वैसे तो गरीबी हटाओ के नाम पर सभी सरकारें निर्धनता दूर करने की योजनाएं चलाती रही हैं, लेकिन इन योजनाओं को जितने प्रभावी ढंग से मोदी सरकार ने चलाया और उन्हें जमीन पर उतारा, वह एक मिसाल है। मोदी सरकार ने विकास के साथ जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में जैसी सफलता हासिल की है, वैसी पिछली सरकारें नहीं कर सकीं। जिन जनकल्याणकारी योजनाओं ने निर्धनता निवारण में विशेष रूप से योगदान दिया, उनमें जन-धन, आवास, शौचालय, बिजली, हर घर को नल से जल जैसी योजनाएं तो शामिल हैं ही, इसके अतिरिक्त मुद्रा एवं आयुष्मान योजना ने भी निर्धनता निवारण में एक बड़ी भूमिका निभाई। इसी तरह मुफ्त खाद्यान्न वितरण कार्यक्रम ने भी निर्धन लोगों को बड़ा सहारा दिया।
जहां कुछ जनकल्याणकारी योजनाओं ने निर्धन लोगों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाया, वहीं कुछ ने उन्हें अपनी आय बढ़ाने के अवसर भी प्रदान किए। ऐसे अवसर विकास की योजनाओं और विशेष रूप से बुनियादी ढांचे के निर्माण संबंधी योजनाओं ने भी उपलब्ध कराए। निर्धनता में लगातार कमी आने के पीछे भारत की अर्थव्यवस्था का पिछले अनेक वर्षों से सबसे तेज गति से बढ़ना भी रहा। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि भारत गरीबी से लड़ने में इसके बावजूद सक्षम रहा कि उसे कोविड महामारी का भी सामना करना पड़ा।
वैसे तो इस महामारी का सामना पूरे विश्व ने किया, लेकिन इस तथ्य को ओझल नहीं किया जाना चाहिए कि भारत सबसे अधिक आबादी वाला देश है। निश्चित रूप से विश्व बैंक की रिपोर्ट निर्धनता निवारण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को प्रकट करने वाली है, लेकिन सरकार को गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसरों की कमी, आय में असमानता, युवा बेरोजगारी में वृद्धि और श्रम उत्पादकता में कमी जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए भी तैयार रहना होगा।
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