जागरण संपादकीय: बेलगाम ट्रंप, टैरिफ बढ़ाने चेतावनी
भारत को यह भी आभास हो जाना चाहिए कि अमेरिका से व्यापार समझौता होने में और देरी हो सकती है। भारत को ट्रंप को उनकी भाषा में जवाब देने की जरूरत नहीं, लेकिन यह स्पष्ट करने में संकोच नहीं करना चाहिए कि वह उनके बेजा व्यवहार के समक्ष झुकने वाला नहीं।
HighLights
ट्रंप ने रूस से तेल खरीद पर भारत को टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी।
अमेरिकी राष्ट्रपति का व्यवहार अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ है।
भारत को ट्रंप के अनुचित दबाव का मजबूती से प्रतिकार करना चाहिए।
वेनेजुएला पर हमला कर वहां के राष्ट्रपति का अपहरण कराने और ईरान समेत अन्य दक्षिण अमेरिकी देशों को धमकाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह रूस से तेल खरीद के मामले में भारत पर टैरिफ बढ़ाने चेतावनी दी, वह उनके बढ़ते अहंकार का नया प्रमाण है। उन्होंने जिस तरह यह कहा कि प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे हैं, लेकिन वे जानते हैं कि रूस से तेल खरीदने के कारण मैं उनसे खुश नहीं और मुझे खुश करना जरूरी है, उससे उनकी तानाशाही मानसिकता ही प्रकट होती है। वे न केवल पूरी तरह बेलगाम दिख रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक शिष्टाचार की भी धज्जियां उड़ा रहे हैं।
वे ऐसे व्यवहार कर रहे हैं जैसे दुनिया के थानेदार हों या फिर उन्हें विश्व को अपने हिसाब से चलाने का जनादेश मिला हुआ है। वे अपने साथ अमेरिका की भी फजीहत करा रहे हैं। यदि वे यह समझ रहे हैं कि उनके रवैये से उनकी या अमेरिका की साख बढ़ रही है तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अमेरिका केवल अपनी साख ही नहीं गंवा रहा है, बल्कि एक ऐसे गैर जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में उभर रहा है, जो विश्व व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर दुनिया को अराजकता की ओर धकेल रहा है। इसके दुष्परिणाम अमेरिका को भी भोगने होंगे, क्योंकि विश्व के तमाम राष्ट्र उनसे तंग आ चुके हैं और यह एक तथ्य है कि आज अमेरिका उतना सशक्त नहीं, जितना पहले हुआ करता था।
ट्रंप अपने अहं को पूरा करने के लिए जिस तरह अपने मित्र राष्ट्रों से भी बैर मोल ले रहे हैं, वह उन्हें महंगा पड़ सकता है, क्योंकि उनका मनमानापन विश्व के देशों को अमेरिका के खिलाफ एकजुट होने को मजबूर कर रहा है। यह बहुत दिनों तक संभव नहीं कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका तो मनमानी करे और विश्व से नियम-कानूनों के हिसाब से चलने की अपेक्षा करे। वे जिस तरह अस्थिरता फैला रहे हैं, उससे विश्व शांति ही नहीं, अर्थव्यवस्था भी खतरे में पड़ रही है। ट्रंप ने भारत पर पहले ही 50 प्रतिशत टैरिफ थोप रखा है। इसमें 25 प्रतिशत व्यापार समझौता न हो पाने और 25 प्रतिशत रूस से तेल खरीदने के कारण है।
यदि वे और टैरिफ बढ़ाते हैं तो यह एक तरह से भारत पर पाबंदी लगाने जैसा होगा। यह ठीक है कि भारत को अमेरिकी सहयोग की आवश्यकता है, लेकिन उसे उसके अनुचित दबाव का प्रतिकार करना होगा। भारत को ट्रंप की शर्तों पर व्यापार समझौता करने से बचना होगा। भारत को यह भी आभास हो जाना चाहिए कि अमेरिका से व्यापार समझौता होने में और देरी हो सकती है। भारत को ट्रंप को उनकी भाषा में जवाब देने की जरूरत नहीं, लेकिन यह स्पष्ट करने में संकोच नहीं करना चाहिए कि वह उनके बेजा व्यवहार के समक्ष झुकने वाला नहीं।













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