संपादकीय: ट्रंप की मजबूरी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने के अपने मनमाने फैसले से पीछे हटकर भारत को राहत दी है
HighLights
ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ वापस लिए।
अमेरिका द्वारा रूस से डीजल खरीदने के बाद लिया यह फैसला।
ट्रंप पर व्यक्तिगत वित्तीय हितों को प्राथमिकता देने का आरोप।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मनमाने फैसले लेने और उन पर टिके न रहने की आदत किस तरह कायम है, इसका नया उदाहरण है उनकी यह घोषणा कि अब वे रूस से तेल खरीदने वाले भारत समेत पांच देशों पर सौ प्रतिशत टैरिफ वाले कानून पर अमल नहीं करेंगे। निःसंदेह यह घोषणा भारत को राहत देने वाली है, लेकिन इसी के साथ वह ट्रंप के अस्थिर स्वभाव के साथ उनकी मजबूरी को भी रेखांकित करने वाली है।
उनका सौ प्रतिशत टैरिफ वाला कानून मनमाना ही नहीं, वैश्विक ऊर्जा हितों को नुकसान पहुंचाने वाला भी था। वे इस कानून को लागू करने से इसलिए पीछे हटने को बाध्य हुए कि अमेरिका ने खुद रूस से डीजल खरीदने का निर्णय ले लिया। इसके बाद यदि वे इस कानून पर अमल करते तो जगहंसाई के पात्र बनते और उनके दोहरे मानदंडों की पोल खुलती।
यही नहीं, यदि वे इस कानून को लागू कर देते तो भारत से व्यापार समझौते की संभावना न्यून कर लेते, क्योंकि भारत ने साफ कर दिया था कि वह अमेरिकी मनमानी सहन करने को तैयार नहीं। ट्रंप के ऐसे फैसलों की एक लंबी सूची है, जिनसे वे पीछे हटने के लिए मजबूर हुए। अपने ऐसे फैसलों से वे अमेरिका के साथ अपनी भी विश्वसनीयता खोते जा रहे हैं।
उनकी बातों का कोई भरोसा नहीं रह गया है। वे ऐसे फैसलों के लिए भी कुख्यात हो रहे हैं, जिनके तात्कालिक असर से या तो उनके स्वजन या फिर उनके करीबियों के आर्थिक हित पूरे होते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि उनके कई फैसले दुनिया भर के शेयर बाजारों पर असर डालते हैं। इसका लाभ ट्रंप स्वयं अथवा उनके करीबी उठाते हैं।
ट्रंप मूलतः एक कारोबारी हैं और यह केवल विश्व समुदाय की धारणा नहीं कि वे निजी वित्तीय हितों के लिए अपने पद का अनुचित इस्तेमाल कर रहे हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक अमेरिकी नागरिक भी यह मान रहे हैं कि ट्रंप अमेरिका से ज्यादा खुद के वित्तीय हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इनमें उनकी पार्टी रिपब्लिकन के भी समर्थक हैं।
तथ्य यह भी है कि उन्होंने दोबारा राष्ट्रपति बनने पर अपने परिवार के कारोबारी सौदों पर लगी पाबंदियां हटाईं और बेटे के स्वामित्व वाली कंपनी के जरिये क्रिप्टो कारोबार शुरू किया। इस क्रिप्टो कारोबार के साथ उनके रियल एस्टेट व्यवसाय में दूसरे देशों के बड़े उद्यमी भागीदार बने हैं। ट्रंप परिवार या उनके करीबियों की कंपनियों के कुछ सौदों में तो दूसरे देशों की सरकारें भी इस लोभ में भागीदार बनीं कि ट्रंप उनके प्रति उदार रहेंगे।
इसका एक उदाहरण पाकिस्तान है, जिसने आनन-फानन क्रिप्टो कारोबार वाली संस्था खड़ी कर ट्रंप परिवार की कंपनी से हाथ मिलाया। बदले में ट्रंप पाकिस्तान की तारीफ करने में जुट गए।






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