लंबे समय से नशे की समस्या से जूझ रहा पंजाब ड्रग्स तस्करी रोकने में किस तरह नाकाम है, इसका उदाहरण है पंजाब पुलिस के एक कांस्टेबल के घर से 40 करोड़ रुपये की हेरोइन बरामद होना। इस कांस्टेबल की ड्यूटी ही ड्रग्स तस्करी रोकने की थी, लेकिन वही इस अपराध में लिप्त पाया गया। यह एक तरह से बाड़ खेत को खाए वाला मामला है। पंजाब में ड्रग्स के धंधे में लिप्त लोगों से लड़ना कितना कठिन है, इसका एक अन्य उदाहरण वह घटना भी है, जिसमें नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई। इसके पहले भी ऐसे लोगों को धमकियां मिली हैं या फिर उन पर हमले हुए हैं।

पंजाब से हर दिन ऐसी खबर आती है कि कहीं ड्रग्स की खेप बरामद की गई, कहीं ड्रग्स तस्करी का नेटवर्क ध्वस्त किया गया, कहीं ड्रग्स तस्कर गिरफ्तार किया गया या फिर नशे के लती किसी युवा ने दम तोड़ दिया। एक समय था जब मादक पदार्थों की पहुंच और उसका सेवन शहरी इलाकों तक ही सीमित था, लेकिन अब तो गांवों में भी तरह-तरह की सिंथेटिक ड्रग्स पहुंच रही हैं। इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि जगह-जगह नशा मुक्ति केंद्रों के साथ नशा मुक्ति अभियान भी चल रहा है, क्योंकि नशे के लती युवकों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। अनेक युवा असमय ही काल के गाल में समा जा रहे हैं या शारीरिक-मानसिक रूप से इतने अशक्त हो जा रहे हैं कि परिवार वालों के लिए बोझ बन जा रहे हैं। राज्य में नशे के आदी लोगों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। युवक ही नहीं, युवतियां भी नशे की लत का शिकार बन रही हैं।

जो पंजाब एक समय हष्ट-पुष्ट और मेहनतकश युवाओं के लिए जाना जाता था, वहां के तमाम युवा आज नशे की लत का शिकार होकर अपनी सेहत और अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। इसी कारण सेना और अर्धसैनिक बलों को शारीरिक एवं मानसिक रूप से सक्षम युवा मिलने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति यही बताती है कि पंजाब में नशे की उपलब्धता ने एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। यह निराशाजनक है कि पंजाब में जो भी पार्टी इस बड़े वादे के साथ सत्ता में आई कि वह राज्य को ड्रग्स की समस्या से मुक्ति दिलाएगी, वह नाकाम ही रही।

इस नाकामी के मूल में राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी नजर आती है। पंजाब में ऐसे नेताओं की कमी नहीं, जिन पर ड्रग्स तस्करों को संरक्षण देने के आरोप लगते रहते हैं। इससे इनकार नहीं कि पाकिस्तान पंजाब की युवा पीढ़ी को बर्बाद करने के लिए ड्रग्स भेज रहा है, लेकिन वह ऐसा इसीलिए कर पा रहा है, क्योंकि राज्य में ड्रग्स का धंधा करने वाले काबू में नहीं आ पा रहे हैं। पंजाब नशे की जकड़न से तभी मुक्त होगा, जब इस समस्या से युद्धस्तर पर निपटा जाएगा।