मिलावट पर हल्ला बोल
दूध-दही के प्रदेश में खाद्य उत्पादों के नाम पर जहर परोसा जा रहा है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने त्योहार से पूर्व मिलावट पर हल्ला बोलकर उचित ही किया है।
दूध-दही के प्रदेश में खाद्य उत्पादों के नाम पर जहर परोसा जा रहा है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने त्योहार से पूर्व मिलावट पर हल्ला बोलकर उचित ही किया है। सीएम फ्लाइंग के उड़नदस्तों ने सभी जिलों में व्यापक छापेमारी करते हुए सैकड़ों की संख्या में खाद्य सामग्री के नमूने लिए। त्योहार पर पहले भी स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा हर साल छापेमारी की जाती है और नमूने लिए जाते हैं। अब सीधे सीएम कार्यालय इन छापों पर निगाह रख रहा है और जांच रिपोर्ट भी तलब की जाती है। पहली बार भारी संख्या में दुकानदारों को जुर्माना देना पड़ा पर जांच का वास्तविक फायदा नहीं हुआ। जांच पूरी होने में महीनों लग गए।
सरकार को ध्यान रखना चाहिए कि यह मुहिम रस्म अदायगी बनकर न रह जाए और इसके परिणाम आएं। नियमित जांच की व्यवस्था कर व्यापारियों पर गुणवत्ता बनाए रखने के लिए दबाव बनाया जा सकता है। यह भी सुनिश्चित करना होगा कि खाद्य सामग्री के लिए मानक और अधिक कड़े बनाए जाएं। यह सीधे आम जन की सेहत का मसला है। खोया, मिठाइयों में हानिकारक तत्वों की मिलावट कई मायनों में सेहत के लिए घातक है। उससे पूर्व आवश्यक है कि जांच के लिए एक ढांचा खड़ा किया जाए।
अभी स्वास्थ्य विभाग और अन्य एजेंसियों के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह सैकड़ों सैंपलों की समय पर जांच पूरी कर सकें। इस पूरी प्रक्रिया में महीनों लग जाते हैं। आवश्यक है कि जिला स्तर पर जांच के लिए लैब बनाई जाए। एक बार नियमित कार्रवाई होगी और समयबद्ध जांच होगी तो समस्या का समाधान मिल जाएगा। जांच इस तरह से हो कि ईमानदारी से कार्य कर रहे छोटे दुकानदार को प्रताड़ना भी न ङोलनी पड़े और आम जन की सेहत से कोई खिलवाड़ भी न हो।
(स्थानीय संपादकीय हरियाणा)










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