महंगाई और बेरोजगारी को लेकर कांग्रेस नेता जिस तरह काले कपड़ों (Congress Protest) में सड़कों पर उतरे और इस दौरान राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने यह कहा कि देश में लोकतंत्र (Indian Democracy) मर रहा है, उससे वह चर्चा में तो आ गए, लेकिन इससे उन्हें और उनकी पार्टी को राजनीतिक लाभ मिलने के कोई आसार नहीं। इसलिए नहीं, क्योंकि देश की जनता यह समझ रही है कि कांग्रेस की इस सक्रियता के पीछे नेशनल हेराल्ड मामले (National Herald Case) में ईडी (ED) की कार्रवाई है।

यह मामला भ्रष्टाचार की ही कहानी कह रहा है। गांधी परिवार ने जिस तरह नेशनल हेराल्ड की हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति हथिया ली, वह सामान्य मामला नहीं। यह भी ध्यान रहे कि इस मामले में न्यायपालिका से गांधी परिवार को कोई राहत नहीं मिली है। इससे कांग्रेस का क्षुब्ध होना स्वाभाविक है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि उनके नेताओं के खिलाफ जारी जांच रोक दी जाए।

चूंकि कांग्रेस गांधी परिवार का पर्याय बन गई है, इसलिए वह यह साबित करने की चाहे जितनी कोशिश करे कि उसके नेताओं को डराया जा रहा है, लेकिन आम लोगों को यह तर्क समझ में आने वाला नहीं है। इसलिए और भी नहीं, क्योंकि कुछ दिनों पहले तक कांग्रेस संसद के भीतर-बाहर इसलिए हंगामा कर रही थी कि सरकार महंगाई पर बात करने को तैयार नहीं, लेकिन जब इस पर चर्चा हुई तो उसके सांसद सदन से बाहर निकल गए।

इससे इन्कार नहीं कि पहले कोविड महामारी और फिर रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अन्य देशों की तरह भारत में भी महंगाई बढ़ी है, लेकिन तथ्य यह भी है कि उस पर नियंत्रण पाने के हर संभव उपाय किए जा रहे हैं। जिस तरह महंगाई से निपटने की आवश्यकता है, उसी तरह भ्रष्टाचार और विशेष रूप से राजनीतिक भ्रष्टाचार से भी।

पिछले कुछ समय से नेताओं के भ्रष्टाचार के विरुद्ध सीबीआइ और ईडी ने जैसी तेजी दिखाई है, उससे उन दलों की बेचैनी बढ़ गई है, जिनके नेता अवैध तरीके से धन अर्जित करने के आरोपों से घिरे हैं। इनमें सोनिया और राहुल गांधी भी हैं। इन दोनों नेताओं को इससे हैरानी हो सकती है कि आखिर ईडी उनसे पूछताछ कैसे कर सकती है, लेकिन लोकतंत्र तो यही कहता है कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं हो सकता।

राहुल यह समझे तो बेहतर कि लोकतंत्र तब मरता है, जब राजनीतिक भ्रष्टाचार की अनदेखी की जाती है। संप्रग शासन के दौरान यही हो रहा था। राहुल को यह भी पता होना चाहिए कि लोकतंत्र मर रहा होता, तो वह यह बात नहीं कह पाते, जैसा कि आपातकाल के दौरान सरकार के खिलाफ कुछ भी कहना अपराध था। अच्छा होगा कि राहुल गांधी लोकतंत्र का पाठ नए सिरे से पढ़ें।