पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जब वोट चोरी का रोना रो रहे थे और कथित वोट चोरों को जेल भेजने की बात कर रहे थे, तब भीड़ से यह आवाज आने पर कि 'मोदी कहीं नहीं जाएगा', वे इतना तैश में आ गए कि यहां तक कह गए कि 'मोदी तो क्या, मोदी का बाप भी जाएगा।' उन्होंने इसे दोहराया भी। इससे न केवल उनकी बौखलाहट का पता चलता है, बल्कि यह भी कि उनके जैसा बुजुर्ग नेता प्रधानमंत्री के लिए ऐसी अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने में संकोच नहीं करता। वे पहले भी ऐसा कर चुके हैं और राहुल गांधी ने तो भाषा के मामले में सारी हदें ही पार कर रखी हैं। वे प्रधानमंत्री के लिए हद दर्जे की अशिष्ट भाषा का इस्तेमाल करते हैं और यहां तक कि उनके लिए 'डरता है', 'भाग जाएगा' जैसी बातें भी बोल चुके हैं।

राहुल गांधी संवैधानिक पद पर बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी जमकर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने में लगे हुए हैं। इसका दुष्परिणाम यह है कि कांग्रेस के छोटे-बड़े नेता, कार्यकर्ता और समर्थक भी प्रधानमंत्री के संदर्भ में बात करते हुए भाषा का कोई लिहाज नहीं रखते। बहुत पुरानी बात नहीं कि बिहार में ही कांग्रेस की एक रैली में प्रधानमंत्री को खुलेआम गालियां दी गई थीं और कांग्रेस जनों ने उसकी निंदा करने के स्थान पर लीपापोती ही अधिक की थी। यह भी एक विडंबना रही कि खरगे की रैली में कांग्रेसियों ने जिसे मोदी हितैषी समझ कर पीट दिया, वह कांग्रेस समर्थक है और वस्तुतः यह कह रहा था कि बिना बगावत मोदी कहीं नहीं जाएगा। स्पष्ट है कि यह खतरनाक सोच भी कांग्रेस और साथ ही उसके उन करीबियों की देन है, जो रिजीम चेंज यानी तख्तापलट की बातें कर रहे हैं और लोगों को गुमराह करके भड़काने में लगे हुए हैं।

वैसे तो नेताओं की भाषा का स्तर एक लंबे समय से गिरता चला आ रहा है और इसमें कुछ कम या ज्यादा, सभी दलों के नेताओं का योगदान है, लेकिन राजनीतिक भाषा के स्तर को गिराने में यदि कोई सबसे अधिक आगे है तो वे हैं राहुल गांधी और उनके करीबी। जब बड़े नेता अमर्यादित बयान देते हैं और अपने राजनीतिक विरोधियों के प्रति घृणाभाव दिखाते हैं तो उसका असर पूरी पार्टी पर पड़ता है। पिछले कुछ समय से ऐसा ही हो रहा है। राहुल गांधी और कुछ अन्य विपक्षी नेताओं में तो प्रधानमंत्री के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने की होड़ सी लगी हुई है। इसकी भी अनदेखी नहीं की जा सकती कि कुछ माह पहले दिल्ली में जंतर-मंतर पर काकरोच जनता पार्टी के समर्थकों ने जब प्रधानमंत्री और उनकी मां को कैमरों के सामने भद्दी गालियां दी थीं, तब विपक्ष के अनेक नेताओं ने इन गालीबाज तत्वों का बचाव ही किया था।