100 मीटर दूर था किनारा, फिर भी डूब गए 13 लोग; राघोपुर नाव हादसे की Inside Story
Raghopur Boat Accident: वैशाली के राघोपुर में श्राद्ध भोज से लौट रहे लोगों की नाव पलटने से 9 बच्चियों समेत ...और पढ़ें

खालसा घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
HighLights
वैशाली के राघोपुर में नाव पलटने से 13 की मौत।
श्राद्ध भोज से लौट रहे थे, जर्जर नाव में क्षमता से अधिक लोग।
तेजस्वी यादव ने न्यायिक जांच और मुआवजे की मांग की।
डिजिटल डेस्क, पटना/राघोपुर। Raghopur Boat Accident: वैशाली के राघोपुर स्थित रामपुर श्यामचंद गांव में मंगलवार रात हुए नाव हादसे ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। श्राद्ध भोज से लौट रहे लोगों की नाव बीच ढाब में पलट गई। हादसे में नौ बच्चियों समेत 13 लोगों की मौत हो गई। गांव में मातम पसरा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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जर्जर नाव पर सवार थे 20 से 25 लोग
ग्रामीणों के अनुसार, नाव पर करीब 20 से 25 बच्चे, बच्चियां और बुजुर्ग सवार थे। नाव की क्षमता छह से आठ लोगों की बताई गई है। लौटने के दौरान नाव में पानी भरने लगा। लोगों ने पानी निकालने की कोशिश की, लेकिन नाव किनारे तक पहुंचने से पहले ही पलट गई।
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100 मीटर की दूरी भी नहीं कर सके पार
ग्रामीणों का कहना है कि ढाब के दोनों किनारों के बीच की दूरी करीब 100 मीटर थी। पुल के रास्ते भी आयोजन स्थल तक पहुंचा जा सकता था, लेकिन दूरी कम होने के कारण लोगों ने नाव से जाने का फैसला किया। हादसे के बाद नाव की हालत और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठ रहे हैं।
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तीन बहनों समेत कई परिवारों के बच्चे नहीं लौटे
हादसे में किसी ने बेटी खोई, तो किसी ने बेटा। कई मृतक स्कूली छात्र-छात्राएं थे। किसी परिवार की तीन बेटियों की मौत हुई, तो किसी घर से दो भाई-बहन हमेशा के लिए बिछड़ गए। बुधवार सुबह जब 13 अर्थियां निकलीं, तो पूरा गांव रो पड़ा। तीन ट्रैक्टरों पर अर्थियां रखकर अंतिम विदाई दी गई।
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एक परिवार के सात सदस्यों की मौत
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, एक ही विस्तारित परिवार के सात सदस्यों की इस हादसे में जान चली गई। इनमें तीन भाइयों के छह बच्चे और उनकी बहन सोनी कुमारी शामिल थीं।
एक साथ सात अपनों को खोने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों का विलाप देखकर ग्रामीण भी अपने आंसू नहीं रोक सके।
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दूसरे परिवार के पांच बच्चों की गई जान
दूसरे परिवार में सत्येंद्र राय की बेटी निशु, राजकिशोर राय की तीन बेटियां अंकिता, अंकि और अमृता तथा मुकेश राय के बेटे नमन की मौत हो गई। बच्चों की मौत से परिवारों के भविष्य से जुड़ी उम्मीदें बिखर गईं। गांव में शोक के कारण कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
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खालसा घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
बुधवार को मृतकों का अंतिम संस्कार किया गया। बच्चों के शवों से लिपटकर रोते परिजनों का दर्द पूरे गांव को झकझोर गया। इस हादसे ने एक बार फिर नाव की सुरक्षा और ग्रामीण इलाकों में सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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तेजस्वी यादव ने मांगी न्यायिक जांच
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बुधवार रात मृतकों के स्वजन से मिलने रामपुर श्यामचंद पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
तेजस्वी ने हादसे को लापरवाही का नतीजा बताते हुए न्यायिक जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने प्रत्येक पीड़ित परिवार को तीन-तीन डिसमिल जमीन देने की मांग भी की।
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उपमुख्यमंत्री ने जल्द सहायता का दिया भरोसा
उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने भी पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने जिलाधिकारी को मृतकों के स्वजन तक सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने मृतकों के परिवारों को छह-छह लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
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चिराग और स्वास्थ्य मंत्री पहुंचे अस्पताल
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एनएमसीएच पहुंचकर भर्ती बच्चों के परिजनों से बात की। उन्होंने चिकित्सकों को इलाज में कोई कमी नहीं रखने का निर्देश दिया।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने भी बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बचाव में देरी को लेकर उठे सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर पर्याप्त बचाव संसाधन नहीं थे। उनका कहना है कि मोटरबोट और बचाव दल समय पर पहुंचते तो कुछ जानें बच सकती थीं। हादसे के बाद स्थानीय थानाध्यक्ष और अंचल अधिकारी का वेतन रोकने की कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
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10 लाख मुआवजे की मांग, जांच पर टिकी नजरें
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने मृतकों के स्वजन को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही। हम अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई की मांग उठाई।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जर्जर नाव पर क्षमता से अधिक लोगों को सवार होने से क्यों नहीं रोका गया। हादसे की जांच और दोषियों की जवाबदेही तय होने का इंतजार है। गांव में उन बच्चों की यादें रह गई हैं, जिनके लौटने की राह उनके परिवार देर रात तक देखते रहे।
