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वैशाली नाव हादसा: 13 की मौत के बाद खटिया-रस्सी के सहारे रेस्क्यू, ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा; प्रशासन पर उठे सवाल

Published: Wed, 14 Oct 2026 09:42 AM (IST)

वैशाली के राघोपुर में नाव हादसे के बाद ग्रामीणों ने खटिया और रस्सी के सहारे बचाव कार्य किया, जबकि प्रशासन ...और पढ़ें

अस्पताल पहुंचे तो इलाज की व्यवस्था पर भी जताई नाराजगी

अस्पताल पहुंचे तो इलाज की व्यवस्था पर भी जताई नाराजगी

HighLights

  1. ग्रामीणों ने खटिया और रस्सी के सहारे लोगों को बचाया।

  2. प्रशासन पर देर से पहुंचने व लापरवाही के आरोप।

  3. जर्जर नाव की शिकायतें पहले ही की गई थीं।

डिजिटल डेस्क, वैशाली/पटना। वैशाली के राघोपुर में नाव हादसे के बाद जब अपनों को बचाने की जद्दोजहद शुरू हुई, तब ग्रामीणों ने सीमित संसाधनों के बीच खुद मोर्चा संभाला। किसी के हाथ में रस्सी थी तो किसी ने खटिया के सहारे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की।

हादसे में कई लोगों की जान चली गई। जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे लोगों को बचाने के लिए ग्रामीणों ने पूरी ताकत लगा दी। वहीं, स्थानीय लोगों ने प्रशासन के देर से पहुंचने और अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलने का आरोप लगाया है।

खटिया और रस्सी के सहारे शुरू हुआ रेस्क्यू, ग्रामीण बने सहारा

राघोपुर ब्लॉक की रामपुर श्यामचंद पंचायत में नाव पलटने के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। नदी की धारा में फंसे लोगों को बचाने के लिए ग्रामीण तत्काल जुट गए।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, बचाव के लिए खटिया और रस्सी का सहारा लिया गया। ग्रामीणों ने मिलकर डूब रहे लोगों को बाहर निकालने और उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। सीमित साधनों के बीच यह अभियान लोगों के लिए जिंदगी बचाने की आखिरी उम्मीद बन गया।

रवि यादव बोले- जो बन पड़ा, हमने किया; कई लोगों को नहीं बचा सके

हादसे के दौरान बचाव कार्य में जुटे रवि यादव ने बताया कि नाव से नदी पार करते समय हादसा हुआ था। नाव पर सवार लोग पास के गांव में आयोजित श्राद्ध भोज में शामिल होने जा रहे थे।

रवि के मुताबिक, ग्रामीण मौके पर मौजूद थे और उन्होंने लोगों को बचाने की पूरी कोशिश की। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि तमाम प्रयासों के बावजूद सभी लोगों को नहीं बचाया जा सका। हादसे की भयावहता ने ग्रामीणों को झकझोर कर रख दिया।

एक घंटे बाद पहुंचने का आरोप, ग्रामीणों ने उठाए सवाल

रवि यादव ने आरोप लगाया कि हादसे की सूचना प्रशासन को दे दी गई थी, लेकिन अधिकारी करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंचे।

उनका कहना है कि शुरुआती समय में ग्रामीणों को अपने स्तर पर ही बचाव कार्य करना पड़ा। हालांकि, प्रशासन के पहुंचने के समय और बचाव अभियान के पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इस आरोप के बाद आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया और स्थानीय स्तर पर बचाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अस्पताल पहुंचे तो इलाज की व्यवस्था पर भी जताई नाराजगी

ग्रामीण रवि यादव के अनुसार, बचाए गए लोगों को अस्पताल ले जाने के बाद वहां इलाज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं दिखी। उन्होंने अस्पताल में जरूरी सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया।

नदी में हादसे के बाद घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता मिलना बेहद अहम होता है। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्था को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घायलों को किस तरह की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।

जर्जर नाव की जानकारी पहले देने का दावा

रवि यादव ने राघोपुर के अंचलाधिकारी (CO) दीपक कुमार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनके मुताबिक, नाव की जर्जर हालत के बारे में पहले ही जानकारी दी गई थी, लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने इसी लापरवाही को हादसे की वजह बताते हुए नाराजगी जताई। हालांकि, प्रशासन को शिकायत कब दी गई थी और उस पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने आना बाकी है। इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

श्राद्ध भोज में जा रहे थे लोग, हादसे ने उजाड़ दिए कई परिवार

जानकारी के मुताबिक, रामपुर श्यामचंद पंचायत में लोग पास के गांव में श्राद्ध भोज में शामिल होने के लिए नाव से नदी पार कर रहे थे। इसी दौरान नाव पलट गई और कई लोग पानी में डूब गए।

हादसे में बच्चों समेत कई लोगों की मौत की खबर से इलाके में शोक छा गया। एक ही परिवार के नौ सदस्यों की मौत की सूचना ने त्रासदी को और भी दर्दनाक बना दिया है। गांव में परिजनों की चीख-पुकार के बीच हर कोई इस हादसे से उबरने की कोशिश कर रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल: जर्जर नाव पर सफर क्यों और सुरक्षा के इंतजाम कहां?

राघोपुर की यह घटना सिर्फ नाव पलटने का हादसा नहीं, बल्कि नदी पार करने वाले लोगों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

यदि नाव की हालत खराब होने की शिकायत पहले की गई थी, तो उसकी जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। साथ ही, नावों की क्षमता, यात्रियों की सुरक्षा, लाइफ जैकेट और आपातकालीन बचाव व्यवस्था की स्थिति भी सामने आनी चाहिए।

ग्रामीणों ने खटिया और रस्सी के सहारे लोगों को बचाने की कोशिश की, लेकिन ऐसी त्रासदी में बचाव का पूरा भार स्थानीय लोगों पर नहीं छोड़ा जा सकता।

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