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वैशाली नाव हादसा: कहीं तीन बहनों की मौत, कहीं पिता ने खोई बेटी; 8 साल के नमन से 22 की पिंकी तक, हर कहानी दर्दनाक

Published: Wed, 14 Oct 2026 11:01 AM (IST)

वैशाली के राघोपुर में नाव हादसे ने कई परिवारों को उजाड़ दिया, जिसमें आठ साल के नमन से लेकर 22 ...और पढ़ें

राजकिशोर राय की तीन बेटियां अंकिता, अंकी और अमृता की मौत

राजकिशोर राय की तीन बेटियां अंकिता, अंकी और अमृता की मौत

HighLights

  1. राघोपुर नाव हादसे ने कई परिवारों की खुशियां उजाड़ दीं।

  2. तीन बहनों और आठ साल के नमन सहित कई की मौत।

  3. घायल बच्चे पटना NMCH में गंभीर हालत में भर्ती हैं।

जागरण संवाददाता, राघोपुर(वैशाली)। राघोपुर के रामपुर श्यामचंद में नाव हादसे ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। किसी घर की तीन बेटियां एक साथ चली गईं, तो कहीं पिता की आंखों के सामने बेटी डूब गई। 22 वर्षीय पिंकी की मौत हो गई, जबकि उसकी छोटी बहन चांदनी और तीन वर्षीय भांजे तेज प्रताप को बचा लिया गया।

आठ साल के नमन से लेकर 14 वर्षीय निशु और तीन बहनों तक, इस हादसे ने परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे में घायल बच्चे अब भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।

किसी घर की तीन बेटियां छिनीं, कहीं पिता ने खोई अपनी लाडली

रामपुर श्यामचंद में नाव हादसे के बाद हर परिवार की अपनी दर्दनाक कहानी सामने आ रही है। राजकिशोर राय की तीन बेटियां अंकिता, अंकी और अमृता इस हादसे में जान गंवा बैठीं। तीनों की उम्र क्रमशः 14, 10 और सात वर्ष बताई गई है।

अंकिता आठवीं, अंकी चौथी और अमृता तीसरी कक्षा में पढ़ती थी। तीनों बहनें एक ही परिवार की खुशियां थीं, लेकिन एक हादसे ने पूरे घर को मातम में डुबो दिया।

22 साल की पिंकी की मौत, छोटी बहन और तीन वर्षीय भांजा बचाए गए

हादसे में डोमन राय की 22 वर्षीय बेटी पिंकी कुमारी की डूबने से मौत हो गई। नाव पर उसके साथ छोटी बहन चांदनी कुमारी और तीन वर्षीय भांजा तेज प्रताप कुमार भी थे।

दोनों को ग्रामीणों ने बाहर निकालकर इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राघोपुर फतेहपुर पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) रेफर किया गया। तेज प्रताप पिछले करीब चार महीने से अपने ननिहाल रामपुर श्यामचंद में रह रहा था।

आठ साल का नमन भी नहीं बच सका, कोलकाता में मेहनत करते हैं पिता

नाव हादसे में मुकेश राय के आठ वर्षीय बेटे नमन कुमार की भी मौत हो गई। वह चौथी कक्षा में पढ़ता था और तीन भाइयों में सबसे बड़ा था।

उसके पिता कोलकाता में होटल में खाना बनाने का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार के लिए नमन भविष्य की उम्मीद था।

बेटे की मौत की खबर ने परिवार पर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है। हादसे ने उस घर की खुशियां छीन लीं, जहां बच्चों के भविष्य के सपने संजोए जा रहे थे।

14 साल की निशु की मौत, पिता भी नाव हादसे में हुए घायल

रामपुर श्यामचंद निवासी सत्येंद्र राय की 14 वर्षीय बेटी निशु कुमारी की भी हादसे में मौत हो गई। वह आठवीं कक्षा में पढ़ती थी और एक भाई तथा एक बहन में सबसे छोटी थी।

हादसे में उसके पिता सत्येंद्र राय को भी बचाया गया और इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। सत्येंद्र ने बताया कि उन्होंने दो दिन पहले अपनी बेटी और पोती की कोचिंग फीस के लिए 3,000 रुपये जमा किए थे। उन्हें क्या पता था कि कुछ ही समय बाद परिवार पर ऐसा दुख टूट पड़ेगा।

NMCH में तीन बच्चे भर्ती, दो की हालत गंभीर; ऑक्सीजन पर रखा गया

राघोपुर नाव हादसे में घायल 11 वर्षीय अनुष्का कुमारी, सात वर्षीय कार्तिक कुमार और पांच वर्षीय पूटूस कुमार को NMCH के शिशु रोग विभाग की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया है।

विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार के अनुसार, भर्ती बच्चों में से दो की हालत गंभीर है। उनके फेफड़ों में गंदा पानी जाने से निमोनिया जैसे लक्षण सामने आए हैं और किडनी भी प्रभावित हुई है। दोनों बच्चों को ऑक्सीजन पर रखा गया है। चिकित्सकों की टीम उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

अस्पताल पहुंचे सत्येंद्र और वीरेंद्र, इलाज के बाद लौटे

हादसे के बाद 48 वर्षीय सत्येंद्र राय और 55 वर्षीय वीरेंद्र कुमार को भी NMCH की सेंट्रल इमरजेंसी में लाया गया था। अस्पताल में उपचार के बाद दोनों लौट गए।

वहीं, 15 वर्षीय अंकित की अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस तरह हादसे में जान गंवाने वालों और घायल बच्चों की कहानियां सामने आने के साथ पूरे इलाके में शोक गहराता जा रहा है। कई परिवारों के लिए यह त्रासदी जीवनभर का जख्म बन गई है।

श्राद्ध भोज में जा रहे थे लोग, एक नाव हादसे ने उजाड़ दिए कई परिवार

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार की रात गांव के एक श्राद्ध कार्यक्रम में भोज खाने के लिए लोग नाव से नदी पार कर रहे थे। इसी दौरान नाव पलट गई और कई लोग पानी में डूब गए।

हादसे के बाद ग्रामीणों ने अपने स्तर पर बचाव कार्य किया और लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। अब नाव की स्थिति, उस पर सवार लोगों की संख्या और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

घटना की पूरी परिस्थितियों और संभावित लापरवाही की जांच जरूरी है, ताकि हादसे की वजह स्पष्ट हो सके और भविष्य में ऐसी त्रासदी रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।

राघोपुर में हर घर की अलग कहानी, लेकिन दर्द एक

किसी ने तीन बेटियां खो दीं, किसी ने इकलौते बेटे को, तो किसी परिवार की जवान बेटी हमेशा के लिए बिछड़ गई। अस्पताल में भर्ती बच्चों के परिजन उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं, जबकि जिन घरों में मौत ने दस्तक दी, वहां मातम पसरा है।

रामपुर श्यामचंद का यह हादसा केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि उन परिवारों की पीड़ा है जिनकी दुनिया एक पल में बदल गई। अब जरूरी है कि पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता मिले और हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच हो।

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