पटना [जागरण स्‍पेशल]। चुनाव की गहमा-गहमी के बीच लोकजनशक्ति पार्टी के प्रमुख राम विलास पासवान इन दिनों कुछ शांत और आश्वस्त-से नजर आते हैं। सियासत का मौसम विज्ञानी कहे जाने वाले पासवान चुनाव या उनके नतीजों को लेकर बाकी नेताओं की तरह आपको अटकलबाजियां करते नजर नहीं आएंगे। मानो देश के आगामी सियासी मौसम के मिजाज को उन्होंने ठीक-ठीक पढ़ लिया है। 
उन्हें केंद्र में फिर से नरेंद्र मोदी की सरकार बनने को लेकर कोई संशय भी नहीं है। वह कहते भी हैं कि सबकुछ एकदम साफ है, बस नतीजों का इंतजार कीजिए। इनके अलावा मोदी सरकार का कामकाज और विपक्ष के आरोप,आरक्षण, दलित व मुस्लिम राजनीति, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक भविष्य, लोजपा की आगे की राह जैसे तमाम सियासी मुद्दों पर वह खुलकर बोले।
उन्होंने बिहार के स्थानीय संपादक मनोज झा से इन तमाम मुद्दों पर पिछले दिनों अपने आवास पर लंबी बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके प्रमुख अंश...

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प्रश्न- आम चुनाव का पहला चरण संपन्न हो चुका है। राजनीति के मौसम विज्ञानी रामविलास पासवान का पूर्वानुमान क्या हैं?
उत्तर- (हंसते हुए) देखिए, पहले तो यह बता दूं कि मौसम विज्ञानी का यह तमगा मुझे कभी लालू जी ने दिया था। मुझे नहीं पता कि उन्होंने तारीफ की थी या कटाक्ष किया था। फिर भी निजी तौर पर मेरा यह मानना है कि यदि आप राजनीति में हैं तो आपको दूरदर्शी होना चाहिए, जनता की आवाज की गूंज और उसकी आकांक्षाओं का पूर्वानुमान होना ही चाहिए।
जहां तक इस चुनाव में केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए के प्रदर्शन की बात है तो यह 2014 के चुनाव नतीजों से बेहतर होगा, कमतर तो कतई नहीं। नरेंद्र मोदी दोबारा देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। इस बात को लेकर किसी को भी कोई संशय या भ्रम नहीं होना चाहिए। बिहार में पहले चरण में चार सीटों पर मतदान हुआ और हम चारों जीतने जा रहे हैं।

प्रश्न- एनडीए की सफलता को लेकर इतना भरोसा कैसे? विपक्ष तो तमाम मुद्दों पर मोदी सरकार की घेराबंदी कर रहा है।
उत्तर- यह भरोसा हवा-हवाई नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत पर आधारित है। लोकतंत्र में विपक्ष का काम तो सरकार को घेरना, आलोचना करना है ही, लेकिन जरा मतदाताओं के मूड को तो देखिए। मोदी सरकार के कई फैसलों ने आज समाज के निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक को फायदा पहुंचाया है। आम लोग सरकार होने का अहसास कर रहे हैं। 
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जनता एक बार फिर मोदी जी को मौका देना चाहती है। चुनाव में यह अंतर्धारा बह रही है, इसे समझने और भांपने की जरूरत है। खासकर गरीबों के लिए इस सरकार में बहुत काम हुआ है।

प्रश्न- लेकिन विपक्ष के निशाने पर तो मोदी ही हैं!
उत्तर- यह स्वाभाविक भी है। मोदी जी ने जिस तरह पिछले पांच साल में चीजों को बदलने के प्रयास किए हैं, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने यह बताया और प्रमाणित भी किया कि यदि आपकी सोच व दृष्टि स्पष्ट है तो हालात बदलते हैं। लंबे समय के बाद आम लोगों को इस बात का एहसास हुआ कि दिल्ली में बैठी सरकार उनके लिए भी कुछ कर रही है।
मोदी सरकार भ्रष्टाचार के मोर्चे पर बेदाग होकर निकली है। यह बहुत बड़ी बात है। विकास का लाभ बिना किसी भेदभाव के समाज के सभी तबके को समान रूप से मिला है। प्रधानमंत्री या उनकी सरकार के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है। इसलिए विपक्ष में घबराहट है। यही कारण है कि विपक्ष के निशाने पर सरकार का कामकाज नहीं,बल्कि एक व्यक्ति है।

प्रश्न- विपक्ष, खासकर राजद का आरोप है कि मोदी सरकार आरक्षण खत्म करने की साजिश कर रही है।
उत्तर- मैं अपने पिछले पांच साल के अनुभव के आधार पर कह रहा हूं कि विपक्ष इस मसले पर सिर्फ और सिर्फ भ्रम फैला रहा है। मोदी सरकार आरक्षण को लेकर प्रतिबद्ध है। मोदी जी खुद कई बार कह चुके हैं कि उनके जीते जी आरक्षण को कोई खत्म नहीं कर सकता। मेरा भी यह पुराना संकल्प रहा है।
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मोदी सरकार ने गरीबों के लिए 10 फीसद आरक्षण का प्रावधान भी बिना किसी को नुकसान पहुंचाए बिना किया है। इससे किसी सरकार या नेता की प्रतिबद्धता दिखाई देती है। जहां तक आरक्षण को लेकर सरकार पर राजद के आरोप की बात है तो यह सिर्फ दिखावा है। यह बात जान लें कि राजद के मुखिया लालू प्रसाद यादव आरक्षण के विरोधी रहे हैं।
बात वीपी सिंह सरकार के समय की है। वीपी सिंह मंडल कमीशन की रिपोर्ट लागू करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने देवीलाल को कहा, लेकिन उन्होंने कोई रुचि नहीं ली। लालू जी तब देवीलाल खेमे के नेता थे, लेकिन उन्होंने अपनी जुबान तक नहीं खोली। संबंधित मंत्रालय मेरे पास था और वीपी सिंह ने मुझसे महीने भर के अंदर रिपोर्ट मांगी। मैंने रिपोर्ट पेश की और उसे लागू किया गया। इस पर देवीलाल ने वीपी सिंह की सरकार गिरा दी, लेकिन लालू यादव तब भी चुप रहे। उन्होंने वीपी सिंह का साथ नहीं दिया था। इसलिए आरोप तो आप कुछ भी लगा दें, लेकिन उसके पीछे कोई सच्चाई तो होनी चाहिए, खुद के गिरेबान में तो झांकना चाहिए।

प्रश्न- एससी-एसटी कानून को लेकर भी बीच में काफी विवाद उठा, आरोप-प्रत्यारोप लगे।
उत्तर- मैं राजनीति में 50 साल से हूं और एक के बाद एक कई सरकारें देखी हैं। मुझे छह प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने का मौक़ा मिला है। सभी सरकारें दलितों, पिछड़ों, गरीबों और किसानों के लिए कुछ न कुछ करने का दावा करती हैं। मोदी सरकार इस मामले में सबसे जुदा है। इसने दलितों और पिछड़ों की चिंता अब तक किसी भी सरकार से ज्यादा की है। साथ ही, ठोस काम भी किया है।
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एससी-एसटी कानून को लेकर विपक्ष ने जिस तरह शोर मचाकर लोगों को उकसाया और बरगलाया था, उसे पूरे देश ने देखा। सरकार को जब ऐसा कि लगा कोर्ट की राय के चलते कानून कमजोर हो सकता है तो बिना देरी के कदम उठाया गया और एक्ट के प्रावधानों को संविधान का मजबूत कवच पहनाया गया।
यह ठोस और ईमानदार कदम था। प्रयाग स्नान के बाद मोदी जी ने सफाईकर्मियों के पांव पखारे। यह बहुत बड़ी बात और युगांतकारी घटना है कि देश का प्रधानमंत्री समाज के निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति की इस तरह सुध ले रहा है। मोदी जी ने बाबा साहब डॉ. आंबेडकर से जुड़े पांचों स्मृति स्थलों का कायाकल्प भी कराया।

प्रश्न-  विपक्ष का यह भी आरोप है कि मोदी सरकार की नीतियों के चलते देश का संविधान खतरे में है।
उत्तर- यह मुद्दाविहीन विपक्ष का एक और अनर्गल प्रलाप है। मोदी जी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले संसद की देहरी पर सिर झुकाकर कहा था कि संविधान ही उनका धर्म होगा। आज तक यह बात किसी भी पीएम ने नहीं कही थी। मैं कैबिनेट मंत्री हूं, लेकिन मेरी जानकारी एक भी ऐसा मौक़ा नहीं आया, जब सरकार ने संविधान से परे जाकर कोई कोशिश भी की हो। मोदी जी के मजबूत नेतृत्व में संविधान और संस्थाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं, अक्षुण्ण हैं।

प्रश्न- एक आरोप है कि जिस भी दल या गठबंधन की सरकार बनने की संभावना रहती है, पासवान उसी के साथ चले जाते हैं। क्या राजनीति में इसे अवसरवाद नहीं कहा जाएगा?
उत्तर- देखिए, राजनीति के प्रति मेरी अपनी कुछ प्रतिबद्धताएं हैं। मैंने जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया, मधु लिमये और जॉर्ज फर्नांडिस जैसे धुर समाजवादियों से सियासत का ककहरा सीखा है। जातिवाद और भ्रष्टाचार वर्तमान राजनीति की राह के सबसे बड़े रोड़े हैं। मैं इनका साथ कभी नहीं दे सकता। जब राजीव गांधी सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ वीपी सिंह ने बिगुल फूंका तो उनके साथ सबसे पहले मैं खड़ा था।
बाद में भी चाहे नरसिंह राव की सरकार हो या गठबंधन की सरकारें या फिर दस साल तक यूपीए का शासनकाल, जिसके भी दामन पर ऐसे दाग लगे, मैंने उसका साथ छोड़ने में देरी नहीं की। यदि भ्रष्टाचार और जातिवादी राजनीति का विरोध करना अवसरवादिता है तो आप मुझे ऐसा कह सकते हैं।

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प्रश्न- लेकिन समाजवादी संस्कार वाले राम विलास पासवान की दोस्ती दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी विचारों वाली भाजपा के साथ कैसे हुई?
उत्तर- भाजपा का अपना दृष्टिकोण हो सकता है, लेकिन सरकार के कामकाज की राह में उसने इसे कभी बाधा बनने नहीं दिया है। यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। अटल जी या फिर अभी मोदी जी की सरकार की बात करें तो एनडीए गठबंधन में शामिल किसी भी घटक दल पर भाजपा ने कभी किसी प्रकार का वैचारिक दबाव नहीं डाला।
एनडीए की सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर आज भी अडिग है। यदि किसी अन्य विचारधारा या सोच के माध्यम से समाजवाद का उद्देश्य पूरा हो रहा हो तो इसमें किसी को क्या दिक्कत होनी चाहिए? बाकी इस देश में समाजवाद और दलित-मुस्लिम हितों का मुलम्मा ओढ़कर कुछ नेताओं ने क्या-क्या किया है, यह सभी के सामने है। लिहाजा मैं इस तरह के वैचारिक ढलोसले में यकीन नहीं करता।

प्रश्न-  क्या आपका इशारा लालू प्रसाद या मायावती जैसे नेताओं की ओर है?
उत्तर- जहां तक लालू जी की बात है तो भला मुझसे नजदीक से उन्हें कौन जानता है। बिहार में 15 साल तक उनके परिवार की सरकार ने किस तरह घपले-घोटालों को अंजाम दिया, यह किसी से छिपा नहीं है। लालू जी को मुख्यमंत्री पद छोड़कर जेल जाना पड़ा था और तब केंद्र में इंद्र कुमार गुजराल की सरकार थी।
2005 के चुनाव में मेरी पार्टी के 29 विधायक जीते थे और मेरे पास बिहार की सत्ता की चाबी थी। मैंने सोनिया जी और लालू जी से कहा कि किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री बनाइए। हम समर्थन देंगे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया गया। यदि किसी में हिम्मत है तो सामने आकर मेरी इन बातों को झुठलाए।
जहां तक मायावती की बात है तो उनके लिए निजी स्वार्थ से बड़ी कोई चीज नहीं है। निजी हित को साधने के लिए वह दलित राजनीति की आड़ लेती हैं। मायावती को बताना चाहिए कि उन्हें यूपी में भीम आर्मी या उसके नेता से किस बात का डर सता रहा है? भीम आर्मी के उभार से वह चिंतित क्यों है? मैं ठेकेदारी की इस सियासत का धुर विरोधी हूं।

प्रश्न- मायावती ने यूपी के मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की है।
उत्तर- उत्तर प्रदेश हो या बिहार, देश में कहीं का भी मुसलमान मायावती या किसी नेता का बंधक नहीं हैं।मुसलमानों ने हमेशा सोच-समझकर फैसला किया है। केंद्र की मोदी सरकार हो या फिर उप्र की योगी और बिहार की नीतीश सरकार, सभी ने समाज के सभी तबके के लिए समान नीति के साथ कामकाज किया है। कोई भेदभाव नहीं है। मुझे उम्मीद है कि यूपी समेत सभी जगह के मुसलमान इसी प्रदर्शन के आधार पर मत देंगे।

प्रश्न- लालू जी के बिना बिहार में चुनाव का माहौल कुछ फीका तो नहीं लग रहा है?
उत्तर- प्रत्येक नेता का राजनीति में अपना एक दौर रहता है। लालू यादव का दौर अब समाप्त हो चुका है।

प्रश्न- लोजपा के घोषणा पत्र में गोरक्षा के नाम पर हिंसा फैलाने वालों के खिलाफ सख्त प्रावधान करने की बात है। क्या आपकी साझेदार भाजपा इससे सहमत है?
उत्तर- प्रधानमंत्री मोदी जी ने गोरक्षा के नाम पर कानून हाथ लेने वालों के खिलाफ सार्वजनिक मंच से अपना स्पष्ट नजरिया बार-बार बताया है। वह खुद कह चुके हैं कि इस तरह के मामलों में कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ संबंधित राज्य सरकारों को कड़ाई से पेश आना चाहिए। वह इसे भाजपा को बदनाम करने की साजिश तक बता चुके हैं।
सवाल है कि जब खुद पीएम अपना नजरिया पेश कर रहे हैं तो फिर लोजपा के घोषणा पत्र के संबंधित प्रावधान से किसी को क्या आपत्ति हो सकती है। यह प्रावधान भाजपा के दृष्टिकोण के खिलाफ कहां है?

प्रश्न- इस बार आप चुनाव नहीं लड़े। क्या इसे सक्रिय राजनीति से आपका संन्यास माना जाए?
उत्तर- यह कहना ठीक नहीं होगा कि चुनाव लड़ना ही सक्रिय राजनीति है। मैं 50 साल तक चुनावी राजनीति में रहा। अब उम्र और सेहत के मद्देनजर मैं राजनीति और समाज को अलग तरह से अपना योगदान दूंगा। समाज के कमजोर तबके के उत्थान के लिए एक सर्वसमावेशी और सर्वस्वीकार्य समाधान की कोशिशों के लिए मैं अंतिम दम तक प्रयासरत रहूंगा।
बाकी पार्टी का ज्यादातर कामकाज पुत्र चिराग ने बेहद कुशलता से संभाल लिया है। वह हर महत्वपूर्ण बात या मौके पर मेरी राय भी लेते हैं और व्यावहारिक व योग्य समाधान की तलाश में रहते हैं। चिराग जैसे बेटे पर मुझे गर्व है। ईश्वर सभी को ऐसा होनहार और लायक बेटा दे।

प्रश्न- तो क्या केंद्र की अगली सरकार में चिराग पासवान मंत्री पद की शपथ लेंगें?
उत्तर- मंत्री पद किसे देना है और किसे नहीं, यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार होता है। यदि चिराग मंत्री बनते हैं तो अपनी काबिलियत और क्षमता के बल पर बनेंगे और मेरे लिए यह गर्व की बात होगी। वह योग्य और विश्वसनीय हैं, उनका दृष्टिकोण स्पष्ट है। सबसे बढ़कर यह कि उनमें कुछ करने का जज्बा है।

प्रश्न- तो फिर यह भी बता दें कि चिराग सेहरा कब बांधेंगे, दूल्हा कब बनेंगे?
उत्तर- (हंसते हुए) यह बात तो मुझे खुद भी चिराग से पूछनी पड़ेगी। शादी को लेकर मेरी उनसे कोई बात होती भी नहीं। चिराग समझदार और उच्च चरित्र वाले युवा हैं। मुझे भरोसा है कि वह जो भी करेंगे, बेहतर ही करेंगे। हां, चिराग की मां की इच्छा जरूर है कि इस साल बहू घर आ जाए।

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Posted By: Kajal Kumari