विचार: युद्धविराम पर टिका आर्थिकी का भविष्य
उम्मीद करें कि मोदी सरकार युद्ध से प्रभावित एमएसएमई के लिए कर्ज हेतु विचारार्थ क्रेडिट गारंटी स्कीम को शीघ्र आकार देगी। कच्चे तेल के लिए रूस और वेनेजुएला से आपूर्ति और बढ़ाएगी।
HighLights
युद्धविराम से भारतीय अर्थव्यवस्था को मिली बड़ी आर्थिक राहत।
सरकार महंगाई नियंत्रण हेतु बहुआयामी रणनीति पर कर रही काम।
भारत के पास विशाल खाद्यान्न भंडार और मजबूत विदेशी मुद्रा कोष।
डॉ. जयंतीलाल भंडारी। अमेरिका-ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम से भारत को बड़ी आर्थिक राहत मिलती दिख रही है। शेयर बाजार में तेजी आने के साथ डालर की तुलना में रुपये को मजबूती मिली है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति शृंखला को सामान्य होने में समय लगता है, इसलिए भारत को अभी युद्धविराम के आर्थिक लाभ मिलने में समय लग सकता है, लेकिन निश्चित रूप से इस युद्धविराम से भारत के गोल्डीलाक्स (तेज विकास और महंगाई नियंत्रण) के आर्थिक दौर को बचाए रखने में मदद मिलेगी। हाल में विश्व बैंक ने मजबूत घरेलू गतिविधियों के मद्देनजर भारतीय अर्थव्यवस्था को पूरे दक्षिण एशिया में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्था कहा है।
आरबीआइ ने भी अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों (रेपो रेट) को 5.25 प्रतिशत के स्तर पर यथावत रखते हुए सस्ते कर्ज की राह पर चलते हुए विकास दर में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। हालांकि अभी भी चिंता के कुछ बादल मंडरा रहे हैं। जहां युद्धविराम को लेकर अमेरिका और ईरान द्वारा प्रस्तुत की जा रही अलग-अलग शर्तें दोनों में अविश्वास को दर्शा रही हैं, वहीं इजरायल ने कहा है कि लेबनान में युद्धविराम लागू नहीं होगा। इससे जाहिर होता है कि पश्चिम एशिया में युद्ध की चिंगारी अभी पूरी तरह शांत नहीं हुई है। ऐसे में भारत सरकार को राहत और सुधारों को तेजी से लागू करने की बहुआयामी रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा।
पिछले दिनों वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों एवं वैश्विक संगठनों की रिपोर्ट में लगातार भारत की विकास दर में कमी और महंगाई के बढ़ने के अनुमान प्रस्तुत किए जा रहे थे। वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा था कि ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति शृंखला में बाधाओं के कारण भारत की विकास दर धीमी हो सकती है और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। निजी खपत में कमी, औद्योगिक गतिविधियों में नरमी और उच्च लागत के कारण निवेश की गति धीमी पड़ सकती है, जिससे विकास दर प्रभावित होगी। रेटिंग्स ने भारत की विकास दर के अनुमान को घटाते हुए चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए छह प्रतिशत कर दिया, जो पहले 6.8 प्रतिशत आंका था। साथ ही चालू वित्त वर्ष में औसत महंगाई दर 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जो वित्त वर्ष 2025-26 के 2.4 प्रतिशत से अधिक है। यदि युद्धविराम प्रभावी होता है तो महंगाई बढ़ने और विकास दर घटने की चिंताएं कम होंगी।
उल्लेखनीय है कि देश में आम लोगों और अर्थव्यवस्था को संकट से बचाने के लिए सरकार महत्वपूर्ण जरूरतों मसलन पेट्रोल-डीजल, गैस, खाद्य, उर्वरक आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करने में लगी है। दुनिया में तेजी से बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच भी देश में सरकारी तेल कंपनियों द्वारा सामान्य पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखने के लिए सरकार ने उत्पाद कर में 10 रुपये प्रतिलीटर की कटौती की है। साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया है। रोजाना करीब 50 लाख गैस सिलिंडर की डिलीवरी की जा रही है। सरकार ने आवश्यक खाद्य वस्तुओं के लिए बफर स्टाक बढ़ाने, खुले बाजार में खरीदे गए खाद्यान्न की रणनीतिक बिक्री करने और जरूरी आयात की सुविधा जैसे कई रणनीतिक कदम उठाए हैं। इससे महंगाई को काबू में रखने में मदद मिलेगी। सरकार निर्यातकों को राहत देने के लिए 497 करोड़ रुपये की रेजिलिएंस एंड लाजिस्टिक इंटरवेंशन फार एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन (रिलीफ) योजना भी लेकर आई है। इस योजना के तहत एमएसएमई निर्यातक विशेष रूप से लाभान्वित होंगे।
ईरान युद्ध की चुनौतियों के बीच कई अहम बुनियादी बातें भारत की शक्ति बनकर सामने आई हैं। इस समय देश में विशाल खाद्यान्न भंडार और जरूरत की दवाइयों का पर्याप्त स्टाक है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत में 35.70 करोड़ टन खाद्यान्न का रिकार्ड उत्पादन हुआ था। वित्त वर्ष 2025-26 में इससे भी अधिक खाद्यान्न उत्पादन की संभावना है। भारतीय खाद्य निगम के पास केंद्रीय पूल में मार्च 2026 के अंत तक गेहूं और चावल का 600 लाख टन से अधिक का स्टाक उपलब्ध था, जो खाद्य सुरक्षा के लिए अहम है। युद्ध के बीच दुनिया भर में सार्वजनिक ऋण में भारी उछाल देखा गया, लेकिन इस चुनौतीपूर्ण समय में भी भारत ने अपने ऋण प्रबंधन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके एक मिसाल कायम की है। भारत का कुल ऋण से जीडीपी अनुपात 81 प्रतिशत के स्तर पर है। यह आंकड़ा वर्तमान में सभी प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम है। भारत दुनिया भर में कर्ज के बढ़ते बोझ के बावजूद अपनी आर्थिक स्थिरता को नियंत्रित रखने में सफल रहा है। भारत के पास इस समय 680 अरब डालर से अधिक के विदेशी मुद्रा कोष की शक्ति भी है।
उम्मीद करें कि मोदी सरकार युद्ध से प्रभावित एमएसएमई के लिए कर्ज हेतु विचारार्थ क्रेडिट गारंटी स्कीम को शीघ्र आकार देगी। कच्चे तेल के लिए रूस और वेनेजुएला से आपूर्ति और बढ़ाएगी। महंगाई नियंत्रण के लिए खाद्य तेल के आयात शुल्क में कमी सहित उवर्रकों की उपयुक्त आपूर्ति के लिए दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ेगी। साथ ही ऊर्जा आयात निर्भरता को कम करते हुए कुल ऊर्जा आपूर्ति में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी।
(लेखक अर्थशास्त्री हैं)







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