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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 22, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

डौंडियाखेड़ा: 'सतह' पर खजाने का आधा सफर

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Published: Tue, 22 Oct 2013 09:41 AM (GMT+05:30)Updated: Tue, 22 Oct 2013 09:44 AM (GMT+05:30)

सवाल दो हैं-पहला यह कि राजा राव रामबक्श के किले में शोभन सरकार के दावे के अनुसार एक हजार टन ...और पढ़ें

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डौंडियाखेड़ा (उन्नाव), मुख्य संवाददाता। सवाल दो हैं-पहला यह कि राजा राव रामबक्श के किले में शोभन सरकार के दावे के अनुसार एक हजार टन खजाना है या नहीं और दूसरा यह कि क्या यह 15-20 फीट नीचे दबा है। गहराई के हकीकत की खोज में सामने आया कि किले के इतिहास में भी कुछ छिपा है। तीन मंजिला किले का एक खंड अनदेखी के चलते प्रकृति ने अपने ढंग से खोद दिया। दूसरे खंड की सतह जीएसआई एवं एएसआई की टीम खोद रही।

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खजाने के लिए आधा सफर अभी तय किया जाना बाकी है। गांव की प्रधान के पति एवं पूर्व प्रधान अजय पाल सिंह ने किले के संबंध में बताया कि तीन मंजिला होना सुना है। बात को कुछ आगे बढ़ाते हुए आनंद द्विवेदी प्रकाश डालते हैं कि तीन मंजिला किले की एक मंजिल ढह चुकी है। आज जितना किला दिखाई देता है, उससे कहीं अधिक क्षेत्र में यह फैला था।

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उनकी बात की पुष्टि किले के पीछे कुछ दूरी पर गंगा नदी में पानी में डूबी ईंट की दीवार से होती है। दीवार के पूरब और झाड़ियों के बीच ईंट का चबूतरा भी है। वह बताते हैं कि जहां खोदाई हो रही वह दूसरी मंजिल के नीचे का हिस्सा है। एक मंजिल और खोदाई होने के बाद संत शोभन सरकार का दावा खजाने के रूप में सच होकर निकलेगा। अभी ईंट, पिलर, बर्तन खिड़की आदि मिलेंगे।

इनके अलावा गांव के ही मुन्नालाल पाण्डेय ने सुना है कि किला तीन मंजिल था। अब तो खंडहर हो गया है, इसलिए यह नहीं पता कि कितना ढह गया है। परिणाम तो खोदाई पूरी होने पर दुनिया के सामने स्वत: आ जाएगा।

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