फिल्म समीक्षा

  • फिल्‍म रिव्‍यू: पीके (4 स्‍टार)

        
    PKUpdated on: Fri, 19 Dec 2014 12:17 PM (IST)

    ....बहुत ही कनफुजिया गया हूं भगवान। कुछ तो गलती कर रहा हूं कि मेरी बात तुम तक पहुंच नहीं रही है। हमारी कठिनाई बूझिए न। तनिक गाइड कर दीजिए... हाथ जोड़ कर आपसे बात कर रहे हैं...माथा जमीन पर रखें, घंटी बजा कर आप को जगाएं कि लाउड स्पीकर परऔर पढ़ें »

  • फिल्‍म रिव्‍यू: भोपालः ए प्रेयर फॉर रेन (ढाई स्‍टार)

        
    Bhopal A Prayer for RainUpdated on: Fri, 05 Dec 2014 01:23 PM (IST)

    अपने कथ्य और संदर्भ के कारण महत्वपूर्ण 'भोपाल : ए प्रेयर फॉर रेन' संगत और वस्तुनिष्ठ दृष्टिकोण के साथ भोपाल गैस ट्रैजेडी का चित्रण करती तो प्रासंगिक और जरूरी फिल्म हो जाती। सन् 1984 में हुई भोपाल की गैस ट्रैजेडी पर बनी यह फिल्म 20वीं सदी के जानलेवा ... और पढ़ें »

  • फिल्‍म रिव्‍यू: एक्‍शन जैक्‍सन (1 स्‍टार)

        
    Action JacksonUpdated on: Fri, 05 Dec 2014 10:28 AM (IST)

    सही कहते हैं। अगर बुरी प्रवृत्ति या आदत पर आरंभ में ही रोक न लगाई जाए तो वह आगे चल कर नासूर बन जाती है। प्रभु देवा ने फिल्म 'वांटेड' से हिंदी फिल्मों में कदम रखा। तभी टोक देना चाहिए था। वे रीमेक बना रहे हों या कथित ऑरिजिनल कहानीऔर पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: जिद (1.5 स्टार)

        
    ZidUpdated on: Fri, 28 Nov 2014 03:45 PM (IST)

    सस्पेंस, थ्रिलर, रोमांस और सेक्स को मसालों की तरह इस्तेमाल करती 'जिद' एक जर्मन फिल्म की रीमेक है। जेम्स क्रिस्प की 'द गुड नेबर' पर आधारित यह फिल्म हिंदी में सायकोलॉजिकल थ्रिलर के तौर पर आरंभ हुई थी, जो रिलीज होते-होते ऐरोटिक थ्रिलर बन गई। फिल्म में ... और पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: जेड प्लस (4 स्टार)

        
    Zed PlusUpdated on: Fri, 28 Nov 2014 10:35 AM (IST)

    इन दिनों एक तरफ मसाला और दूसरी तरफ कंटेंट प्रधान फिल्में आ रही हैं। 'जेड प्लस' कंटेंट प्रधान फिल्म है। मौलिक और इनोवेटिव कहानियों की कंगाली के मौजूदा दौर में 'जेड प्लस' फिल्मकारों और दर्शक दोनों के लिए उम्मीद और प्रेरणा की किरण है। यह रामकुमार सिंह ... और पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: उंगली (2.5 स्टार)

        
    UngliUpdated on: Fri, 28 Nov 2014 10:24 AM (IST)

    राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म 'रंग दे बसंती' की पटकथा में रेंसिल डिसिल्वा सहायक थे। उस फिल्म ने सिस्टम से निराश युवकों के गुस्से एवं प्रतिरोध को एक दिशा दी थी। भारतीय समाज में कैंडल मार्च उसके बाद ही विरोध का प्रतीकात्मक अभियान बन चुका है। रेंसिल डि... और पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: हैप्पी एंडिंग (2.5 स्टार)

        
    Happy EndingUpdated on: Fri, 21 Nov 2014 09:03 AM (IST)

    हिंदी फिल्में अपने मसाले और फॉर्मूले के लिए मशहूर हैं। कहा और माना जाता है कि रियल लाइफ में जो नहीं हो सकता, वह सब हिंदी फिल्मों में हो सकता है। 'हैप्पी एंडिंग' इन्हीं मसालों और फॉर्मूलों का मजाक उड़ाती हुई खत्म होती है। राज और डीके अभी तक थ्रिलरऔर पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: किल दिल (3 स्टार)

        
    KIll DilUpdated on: Fri, 14 Nov 2014 11:29 AM (IST)

    भारतीय समाज और समाज शास्त्र में बताया जाता रहा है कि मनुष्य के स्वभाव और सोच पर परवरिश और संगत का असर होता है। जन्म से कोई अच्छा-बुरा नहीं होता। इस धारणा और विषय पर अनेक हिंदी फिल्में बन चुकी हैं। शाद अली ने इस मूल धारणा का आज केऔर पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: रंग रसिया (3 स्टार)

        
    Rang RasiyaUpdated on: Fri, 07 Nov 2014 02:48 PM (IST)

    केतन केहता की 'रंग रसिया' समय से रिलीज हो गई होती तो बॉयोपिक के दौर की आरंभिक फिल्म होती। सन् 2008 में बन चुकी यह फिल्म अब दर्शकों के बीच पहुंची है। इस फिल्म को लेकर विवाद भी रहे। कहा गया कि यह उनके जीवन का प्रामाणिक चित्रण नहीं है।और पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: द शौकीन्स (3 स्टार)

        
    the shaukeensUpdated on: Fri, 07 Nov 2014 01:09 PM (IST)

    किसी पुरानी फिल्म पर कोई नई फिल्म बनती है तो हम पहले ही नाक-भौं सिकोडऩे लगते हैं। भले ही अपने समय में वह फिल्म साधारण रही हो,लेकिन रीमेक की संभावना बनते ही पुरानी फिल्म क्लासिक हो जाती है। इस लिहाज से देखें तो बासु भट्टाचार्य की 'शौकीन' ठीक-ठाक फिल्... और पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: रोर (डेढ़ स्टार)

        
    RoarUpdated on: Fri, 31 Oct 2014 05:53 PM (IST)

    निर्देशक कमल सदाना ने नए विषय पर फिल्म बनाने की कोशिश की है। सुंदरवन के जंगलों में यह एक सफेद बाघ की खोज से संबंधित कहानी है। 'रोर' में वास्तविक लोकेशन के साथ वीएफएक्स का भरपूर उपयोग किया गया है। फिल्म के अंत में निर्देशक ने स्वयं बता दिया हैऔर पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: सुपर नानी (2 स्टार)

        
    Super NaniUpdated on: Fri, 31 Oct 2014 02:46 PM (IST)

    'दिल' और 'बेटा' जैसी फिल्में दे चुके इंद्र कुमार पुराने स्कूल के माहिर निर्देशक के तौर पर जाने जाते हैं। हाल के बरसों में वे 'ग्रैंड मस्ती' जैसी सफल एडल्ट कॉमेडी भी दे चुके हैं। 'सुपर नानी' कमजोर फिल्म है। फिल्म का विषय भले मार्मिक और नीयत पाक है, म... और पढ़ें »

  • फिल्‍म रिव्‍यू: हैप्‍पी न्‍यू ईयर ( ढाई स्टार)

        
    Happy New YearUpdated on: Fri, 24 Oct 2014 02:08 PM (IST)

    फराह खान और शाह रुख खान की जोड़ी की तीसरी फिल्म 'हैप्पी न्यू ईयर' आकर्षक पैकेजिंग का सफल नमूना है। पिता के साथ हुए अन्यायऔर पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: सोनाली केबल (2 स्टार)

        
    Sonali CableUpdated on: Fri, 17 Oct 2014 12:33 PM (IST)

    बड़ी मछलियां तालाब की छोटी मछलियों को निगल जाती हैं। अपना आहार बना लेती हैं। देश-दुनिया के आर्थिक विकास के इस दौर में स्पष्ट दिखाईऔर पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: जिगरिया (डेढ़ स्टार)

        
    JigariyaaUpdated on: Fri, 10 Oct 2014 02:22 PM (IST)

    सन् 1986 की पृष्ठभूमि में ताजमहल के शहर में शामू और राधा की प्रेम कहानी ने जन्म तो लिया लेकिन उसे जीवन नहीं मिल पाया।और पढ़ें »

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