फिल्म समीक्षा

  • फिल्म रिव्यू : 'बागी' में एक्शन के 56 भोग (3.5 स्टार )

    Updated on: Fri, 29 Apr 2016 04:00 PM (IST)

    बदला इंसान का सबसे मीठा भाव होता है। साबिर खान ने इस सोच को केंद्र में रखते हुए ‘बागी’ को एक्शन को समर्पित कर दिया है।  और पढ़ें »

  • फिल्‍म रिव्‍यू: मलिन बस्‍ती में उजास, 'निल बट्टे सन्‍नाटा'(3.5 स्‍टार)

    Updated on: Fri, 22 Apr 2016 10:22 PM (IST)

    'निल बटे सन्नाटा' स्वरा भास्कर की उम्दा कोशिश है। चंदा सहाय को आत्मसात करने और उसे पर्दे पर उतारने में उन्होंने संवाद अदायगी से लेकर बॉडी लैंग्वेज तक पर मेहनत की है। से वैसी चंद फिल्मों में शुमार होगी, जिसमें हिंदी समाज और मिजाज है। और पढ़ें »

  • फिल्‍म रिव्‍यू: पहचान और परछाई के बीच 'फैन' (स्‍टार 4)

    Updated on: Fri, 15 Apr 2016 03:07 PM (IST)

    मनीष शर्मा की 'फैन' गौरव चांदना की कहानी है। दिल्ली के मध्य वर्गीय मोहल्ले का यह लड़का आर्यन खन्ना का जबरा फैन है। उसकी जिंदगी आर्यन खन्ना की धुरी पर नाचती है। वह उनकी नकल से अपने मोहल्ले की प्रतियोगिता में विजयी होता है। उसकी ख्वाहिश है कि एक बार और पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू- 'लव गेम्स' यानि प्यार व लिप्सा का द्वंद्व (2.5 स्टार)

    Updated on: Fri, 08 Apr 2016 03:34 PM (IST)

    भट्ट कैंप की फिल्में इंसानी रिश्तों व भावनाओं की पड़ताल करती रही हैं। खासकर वर्जित मुद्दे उनकी कहानियों के केंद्र में रहे हैं। लव गेम्स-लव डेंजरसली' भी उसी परंपरा व ढर्रे का विस्तार है।  और पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू- जंगल में मंगल, 'द जंगल बुक' (4 स्‍टार)

    Updated on: Fri, 08 Apr 2016 01:17 PM (IST)

    फिल्म के माध्यम से यह बताने की भी कोशिश की गई है कि इंसान अगर जानवरों का दोस्त बने तो वे भी अपनी दोस्ती शिद्दत से निभाते हैं। ऐसा होता भी है। हाथी, कुत्ते इंसान के वफादार हैं।  और पढ़ें »

  • फिल्‍म रिव्‍यू: सरदार गब्‍बर सिंह (2.5 स्‍टार)

    Updated on: Fri, 08 Apr 2016 08:26 AM (IST)

    यह अनाथ गब्बर की कहानी है। उसे 'शोले' फिल्म का गब्बर पसंद है, इसलिए उसने अपना नाम गब्बर रख लिया। वह निडर है। 'जो डर गया, समझो मर गया' उसका प्रिय संवाद और जीवन का आदर्श वाक्य है। एक पुलिस अधिकारी उसे पालता और पुलिस में नौकरी दिलवा देता है। और पढ़ें »

  • फिल्‍म रिव्‍यू: बदली हुई भूमिकाओं में 'की एंड का' (3 स्‍टार)

    Updated on: Fri, 01 Apr 2016 12:24 PM (IST)

    कबीर बताता है...'घर संभाले तो की, बाहर जाकर काम करे तो का... अकॉर्डिंग टू हिंदुस्तानी सभ्यता।' आर बाल्की की फिल्म 'की एंड का' हिंदुस्तानी सभ्याता की इस धारणा का विकल्प पेश करती है और इसी बहाने बदले हुए समाज में स्त्री-पुरुष संबंधों में वर्चस्व के सवा...  और पढ़ें »

  • फिल्‍म रिव्‍यू: 'रॉकी हैंडसम', एक्‍शन से भरपूर (2.5 स्‍टार)

    Updated on: Sat, 26 Mar 2016 07:41 AM (IST)

    'रॉकी हैंडसम' एक्शसन फिल्म है। एक्शरन के लिए रॉकी और नावोमी के बीच के इमोशनल रिश्ते का सहारा लिया गया है। उस रिश्ते की प्रगाढ़ता को लेखक-निर्देशक हिंदी फिल्मों के प्रचलित तरीके से नहीं दिखा पाए हैं। नतीजतन फिल्म में इमोशन की कमी लगती है।  और पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: काबिल बरखुरदार हैं 'कपूर एंड सन्स' (4 स्टार)

    Updated on: Fri, 18 Mar 2016 06:11 PM (IST)

    धर्मा प्रॉडक्शंस पर औसत कहानियां पेश करने के आरोप लगते रहे हैं। इस फिल्म ने उस कलंक को धो दिया है। फिल्म की आत्मा यानी कहानी को बाकी आभूषणों से बढ़कर इज्जत बख्शी है। ‘कपूर एंड संस सिंस-1921’ एक आला दर्जे की फैमिली ड्रामा है।  और पढ़ें »

  • फिल्‍म रिव्‍यू: तेरा सुरूर (3 स्‍टार)

    Updated on: Fri, 11 Mar 2016 04:56 PM (IST)

    निश्चित ही हिमश रेशमिया अपनी खूबियों के बारे में जानते हैं। वे अपनी फिल्मों में उन खूबियों को पर्याप्त स्पेस और फोकस के साथ पेश करते हैं। उनकी फिल्मों की सजावट खूबसूरत और आकर्षक रहती है। 'तेरा सुरूर' में वे दर्शकों को डबलिन के लोकेशन पर ले जाते हैं। और पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू- ग्लोबल बाबा (2.5 स्‍टार)

    Updated on: Fri, 11 Mar 2016 12:33 PM (IST)

    सूर्य कुमार उपाध्याय की कथा और विशाल विजय कुमार की पटकथा लेकर मनोज तिवारी ने प्रासंगिक फिल्म बनाई है। पिछलें कुछ सालों में बाबाओं की करतूतों की सुर्खियां बनती रही हैं।  और पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू- 'जय गंगाजल', देसी मिजाज और भाषा (3.5 स्टार)

    Updated on: Fri, 04 Mar 2016 05:57 PM (IST)

    हिंदी सिनेमा के फिल्मकार अभी ऐसी चुनौतियों के दौर में फिल्में बना रहे हैं कि उन्हें अब काल्पनिक कहानियों में भी शहरों और किरदारों के नामों की कल्पना करनी पड़ेगी। यह सावधानी बरतनी होगी कि निगेटिव छवि के किरदार और शहरों के नाम किसी वास्तविक नाम से ना म...  और पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू- 'जुबान', एहसास और पहचान की कहानी (3.5 स्टार)

    Updated on: Fri, 04 Mar 2016 10:01 AM (IST)

    दिलशेर बच्चा है। वह अपने पिता के साथ गुरूद्वारे में जाता है। वहां पिता के साथ गुरूवाणी और सबद गाता है। पिता बहरे हो रहे हैं। उनकी आवाज असर खो रही है और वे एक दिन आत्महत्या कर लेते हैं। दिलशेर का संगीत से साथ छूट जाता है। वह हकलाता और पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: 'अलीगढ़', साहसी और संवेदनशील (4.5 स्टार)

    Updated on: Fri, 26 Feb 2016 04:48 PM (IST)

    हंसल मेहता की 'अलीगढ़' उनकी पिछली फिल्म 'शाहिद' की तरह ही हमारे समकालीन समाज का दस्तावेज है। अतीत की घटनाओं और ऐतिहासिक चरित्रों पर नीरियड फिल्में बनाना मुष्किल काम है, लेकिन अपने वर्तमान को पैनी नजर के साथ चित्रबद्ध करना भी आसान नहीं है। हंसल मेहता...  और पढ़ें »

  • फिल्म रिव्यू: 'तेरे बिन लादेन : डेड ऑर अलाइव', टुकड़ों में हंसी (2.5 स्टार)

    Updated on: Fri, 26 Feb 2016 10:57 AM (IST)

    पहली कोशिश मौलिक और आर्गेनिक होती है तो दर्शक उसे सराहते हैं और फिल्म से जुड़ कलाकारों और तकनीशियनों की भी तारीफ होती है। अभिषेक शर्मा की 2010 में आई 'तेरे बिन लादेन' से अली जफर बतौर एक्टर पहचान में आए। स्वयं अभिषेक शर्मा की तीक्ष्णता नजर आई। उम्मीद ...  और पढ़ें »

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