नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। सर्जिकल स्ट्राइक को दो वर्ष पूरे होने वाले हैं। इसके उपलक्ष्‍य में 29 सितंबर को सर्जिकल स्‍ट्राइक डे मनाने की भी बात कही गई है। लेकिन दो वर्ष पहले क्‍या हुआ और अब जबकि दो वर्ष पूरे हो रहे हैं तो उस जगह की क्‍या स्थिति है, इस पर भी गौर करने की बात है। हकीकत ये है कि जिस जगह पर भारतीय जवानों ने सर्जिकल स्‍ट्राइक को अंजाम देकर वहां से आतंकियों के कैंप बर्बाद किए थे और तीस आतंकियों को मार गिराया था अब वहां कैंप फिर से आबाद हो चुके हैं। पहले की ही तरह से वहां पर अब न सिर्फ आतंकी कैंप बन चुके हैं बल्कि आतंकियों को ट्रेनिंग का सि‍लसिला भी बादस्‍तूर जारी है।

खुफिया रिपोर्ट
खुफिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि आतंकियों के इन्‍हीं लॉन्चिग पैड से करीब 250 आतंकी सीमा पार कर भारत में घुसने को भी तैयार हैं। खुफिया रिपोर्ट में कुछ नए लॉन्चिग पैड का भी जिक्र किया गया है, जिनमें से कुछ पाक अधिकृत कश्‍मीर के लीपा घाटी में हैं। भारत ने सर्जिकल स्‍ट्राइक के दौरान आतंकियों के दो ठिकानों पर ही धावा बोला था और उन्‍हें नष्‍ट किया था। आतंकी कैंपों की बढ़ती संख्‍या इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्‍तान में भले ही सत्‍ता नवाज से निकलकर इमरान खान के हाथों में पहुंच गई हो, लेकिन पाकिस्‍तान की सोच में कोई बदलाव नहीं आया है। वह आज भी जस की तस है।

आतंकी कैंपों में इजाफा
आपको यहां पर ये भी बता दें कि उरी स्थित आर्मी कैंप पर हमले के बाद सर्जिकल स्‍ट्राइक की योजना को अंजाम दिया गया था। इसके बाद सेना ने अपनी रणनीति में जबरदस्‍त बदलाव लाते हुए जुलाई 2016 में हिजबुल कमांडर बुरहान वानी को ढेर कर बड़ी सफलता हासिल की थी। हालांकि इसके बाद कश्‍मीर में कई जगहों पर सेना को पत्‍थरबाजों से दो चार होना पड़ा। लेकिन इसके बाद सेना लगातार आतंकियों की कमर तोड़ती भी दिखाई दी। आतंकी बुरहान के मारे जाने से पहले तक पाक अधिकृत कश्‍मीर में आतंकियों के करीब 14 लॉन्चिग पैड मौजूद थे जहां 160 के करीब आतंकी रह रहे थे। लेकिन बुरहान की मौत के बाद इनमें इजाफा हुआ और इनकी संख्‍या 230 तक पहुंच गई। इसके अलावा टैरर कैंप भी पीओके में बढ़ गए।

इमरान खान के पीएम बनने के बाद बढ़े कैंप 
इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने के बाद से इन आतंकी कैंपों में आठ नए कैंपों का इजाफा हो चुका है। अब इनकी संख्‍या वहां पर 25-30 के बीच तक पहुंच चुकी है। इनमें से अधिकतर कैंप लश्‍कर ए तैयबा के हैं जो लीपा, चकोटी, बाराकोट, शादी, जूरा, कहुता इलाके में चल रहे हैं। वर्ष 2016 में जहां पर सर्जिकल स्‍ट्राइक को अंजाम दिया गया था वहां के अलावा बींभर गली में भी आतंकियों के कैंप लग चुके हैं। जहां तक भारत में घुसने की तैयारी कर रहे आतंकियों की बात है तो लीपा, चनेनियन, मंदोकली, नोकोट से यह घुसपैठ की तैयारियां चल रही हैं। नौगाम सेक्‍टर से भी पाकिस्‍तान आतंकियों को सीमा पार कराने की फिराक में बैठा है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक करीब 250 आतंकी सिर्फ मौके की तलाश में यहां पर बैठे हैं। इन आतंकियों का मकसद दक्षिण कश्‍मीर में माहौल को ज्‍यादा से ज्‍यादा खराब करना है।

म्‍यांमार की सीमा से सर्जिकल स्‍ट्राइक 
आपको यहां पर ये भी बताना जरूरी होगा कि 29 सितंबर को पाकिस्‍तानी सीमा में की गई सर्जिकल स्‍ट्राइक से पहले भारतीय जवानों ने 9 जून 2015 में म्‍यांमार की सीमा से लगते इलाके चंदेल में इसी तरह की सर्जिकल स्‍ट्राइक की थी। इससे पहले 4 जून एनएससीएन-के के उग्रवादियों ने मणिपुर में सेना के काफिले पर हमला कर 18 जवानों की हत्‍या कर दी थी। इसका जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने यह सर्जिकल स्‍ट्राइक की थी। उस वक्‍त इस इलाके की कमान मौजूदा जनरल बिपिन रावत के ही हाथों में थी। इस पूरे मिशन को करीब 72 स्‍पेशल कमांडो ने अंजाम दिया था। इन जवानों ने म्‍यांमार के अंदर घुसकर उग्रवादियों को ढेर किया था और उनके कैंपों को ध्‍वस्‍त कर दिया था। इसी तर्ज पर ही पाकिस्‍तान में भी सर्जिकल स्‍ट्राइल करने का फैसला किया गया था।

सबक सिखाने की योजना पर काम
इस सर्जिकल स्‍ट्राइल के बाद एक बार तत्‍कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि जब उनसे जम्‍मू कश्‍मीर में जवानों के शवों से हो रही बर्बरता और आर्मी कैंपों पर हो रहे हमलों पर जवाब मांगा गया तो वह उस वक्‍त कुछ खास नहीं कह सके थे। पत्रकारों ने उनसे यहां तक पूछा था कि म्‍यांमार की तरह की सरकार पाकिस्‍तान में भी ऐसा ही कुछ क्‍यों नहीं करती है। उनके मुताबिक यह प्रश्‍न उनके मन में तीर की तरह लगे थे, जिसके बाद पाकिस्‍तान को सबक सिखाने की योजना पर काम किया गया था। इस सर्जिकल स्‍ट्राइक पर पूरी तरह से गोपनीयता बरती गई थी।

सर्जिकल स्‍ट्राइक में शामिल जवान सम्‍मानित
आपको बता दें कि सर्जिकल स्‍ट्राइक में शामिल जवानों को वर्ष 2017 में सम्‍मानित भी किया गया था। पाकिस्‍तान में हुई इस स्‍ट्राइक को लेकर कुछ दिन पहले नगरोटा के पूर्व कॉर्प कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र निंबोरकर ने बड़ा खुलासा किया था। उन्‍होंने बताया था कि इस सर्जिकल स्‍ट्राइक के दौरान कमांडो अपने साथ तेंदुए के पेशाब और मल लेकर गए थे ताकि कुत्‍ते उनसे दूर रह सकें। जिस वक्‍त सर्जिकल स्‍ट्राइक को अंजाम दिया गया था उस वक्‍त उत्‍तरी कमांड की जिम्‍मेदारी पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा के पास थी। उन्‍होंने एक बार कहा था कि यदि पाकिस्‍ताना की सेना सर्जिकल स्‍ट्राइक का जवाब देने की कोशिश करती तो भारतीय सेना उससे निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार थी। हाल ही में इससे जुड़े एक जवान आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद भी हो गए थे।

सर्जिकल स्‍ट्राइक डे 
जहां तक सर्जिकल स्‍ट्राइक डे मनाने की बात है तो इंडिया गेट के पास 29 सितंबर को एक मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। भारतीय जवानों ने सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान जिन हथियारों का इस्तेमाल किया उन्हें भी आम लोगों को दिखाया जाएगा। भारतीय जवानों ने इस ऑपरेशन में ट्रिवोर असॉल्ट राइफल का उपयोग किया था। यह इजरायल से मंगवाई गई राइफल थी, जिसे फुल ऑटोमेटिक या सेमी ऑटोमेटिक मोड पर लगाया जा सकता है। इस ऑपरेशन में भारतीय जवानों ने डिस्पोजेबल राकेट लांचर का भी प्रयोग किया था, जिसमें राकेट लांचर को लांच करने के बाद भी ढोने की जरूरत नहीं होती, इसे राकेट की लांचिग के बाद फेंक दिया जाता है। ये सभी हथियार इंडिया गेट पर आम लोगों को दिखाने के लिए रखे जाएंगे।

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Posted By: Kamal Verma

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