दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण होने से 12 वर्ष बढ़ जाएगी लोगों की उम्र

कणीय प्रदूषण को अगर नियंत्रित कर लिया जाए तो लोगों की जीवन प्रत्याशा दर को बढ़ाया जा सकता है। भारत के सभी 1.3 अरब लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां...और पढ़ें
जागरण न्यू मीडिया में एग्जीक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत। दो दशक के करियर में इन्होंने कई प्रतिष्ठित संस्थानों में कार ...और जानिए
नई दिल्ली, अनुराग मिश्र। दुनिया में पार्टिकुलेट एयर पॉल्यूशन मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। भारत में किसी व्यक्ति की उम्र कम होने के खतरों में दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर, तंबाकू आदि से बड़े खतरों में से भी ज्यादा घातक पीएम 2.5 से होने वाला प्रदूषण है। शिकागो यूनिवर्सिटी के एनर्जी रिसर्च पॉलिसी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कणीय प्रदूषण को अगर नियंत्रित कर लिया जाए तो लोगों की जीवन प्रत्याशा दर को 12 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। भारत के सभी 1.3 अरब लोग ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं जहां सूक्ष्म कणों (पीएम2.5) से होने वाला वार्षिक औसत प्रदूषण का स्तर डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देश से अधिक है। 67.4 प्रतिशत आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां प्रदूष ण का स्तर देश के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक 40 μg/m3 से अधिक है। जीवन प्रत्याशा के संदर्भ में कणीय प्रदूषण भारत में मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है, जिससे औसत भारतीय नागरिक की जीवन प्रत्याशा 5.3 वर्ष घट जाती है। इसके विपरीत, हृदय संबंधी बीमारियों से औसत भारतीय की जीवन प्रत्याशा दर लगभग 4.5 वर्ष कम हो जाती है, जबकि बाल और मातृ कुपोषण से जीवन प्रत्याशा 1.8 वर्ष घट जाती है।
समय के साथ कणीय प्रदूषण में वृद्धि हुई है। 1998 से 2021 तक, औसत वार्षिक कणीय प्रदूषण में 67.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे औसत भारतीय
नागरिक की जीवन प्रत्याशा 2.3 वर्ष कम हो गई। पूरी दनिया में 2013 से 2021 तक जितना प्रदूषण बढ़ा है उसमें से भारत का 59.1 प्रतिशत योगदान है। देश के सबसे प्रदूषित क्षेत्र भारत के उत्तरी मैदानी क्षेत्र में 52.12 करोड़ निवासी रहते हैं। जो देश की आबादी का लगभग 38.9 प्रतिशत है। अगर प्रदूषण
का वर्तमान स्तर बरकरार रहता है तो इस आबादी की जीवन प्रत्याशा में डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देश के सापेक्ष औसतन 8 साल और राष्ट्रीय मानक के सापेक्ष औसतन 4.5 साल कम होने का खतरा है। यदि भारत डब्ल्यूएचओ के दिशानिर्देश के अनुरूप कणीय प्रदूषण कम कर लेता है, तो भारत की राजधानी और सबसे अधिक आबादी वाले शहर दिल्ली के निवासियों की जीवन प्रत्याशा 11.9 वर्ष बढ़ जाएगी। इसी तरह उत्तरी 24 परगना देश का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला जिला के निवासियों की जीवन प्रत्याशा में 5.6 वर्ष की वृद्धि होगी।
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