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    क्या आपको पता है भारत का कौन-सा शहर कहलाता है 'Cotton City'? चेक करें अपना जवाब

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 12:04 PM (IST)

    क्या आप जानते हैं कि भारत के किस शहर को 'कॉटन सिटी ऑफ इंडिया' के नाम से जाना जाता है? जवाब है- मुंबई। बता दें, इस शहर ने भारत के सूती वस्त्र उद्योग मे ...और पढ़ें

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    क्या आप जानते हैं किस शहर को कहा जाता है 'Cotton City of India'? (Image Source: AI-Generated) 

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जब हम मुंबई के बारे में सोचते हैं, तो सबसे पहले हमारे दिमाग में ऊंची इमारतें, समुद्र और देश की 'वित्तीय राजधानी' की छवि आती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस शहर की ऐतिहासिक नींव 'सफेद सोने' यानी कपास पर टिकी है?

    जी हां, मुंबई को 'भारत की कॉटन सिटी' (Cotton City of India) का गौरवशाली खिताब हासिल है। यह शहर केवल फिल्मों या शेयर बाजार का केंद्र नहीं रहा, बल्कि एक दौर में इसने भारत के सूती वस्त्र उद्योग की दिशा और दशा दोनों बदल दी थी। आखिर कैसे मुंबई बना देश का सबसे बड़ा टेक्सटाइल हब और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था में क्या योगदान रहा? आइए, इस दिलचस्प कहानी को जानते हैं।

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    (Image Source: AI-Generated) 

    मुंबई ही क्यों है 'कॉटन सिटी'?

    मुंबई को 'कॉटन सिटी' कहे जाने की सबसे बड़ी वजह इसका सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile Industry) में दबदबा होना है। औपनिवेशिक काल के दौरान, यह शहर भारत में कपड़ा मिलों और सूती धागे के उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बन गया था।

    उस दौर में मुंबई ने कॉटन प्रोसेसिंग, स्पिनिंग मिलों और टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग में इतनी तरक्की की कि यह न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर में कपड़े के व्यापार का एक प्रमुख हब बन गया।

    सफलता के पीछे के मुख्य कारण

    मुंबई के इस उद्योग में सबसे आगे निकलने के पीछे कई ठोस कारण थे:

    • बंदरगाह और रेलवे: शहर के पास बेहतरीन बंदरगाह और रेलवे कनेक्टिविटी थी, जिससे कच्चा माल लाना और तैयार कपड़ा दुनिया भर में भेजना बहुत आसान था।
    • मजदूरों की उपलब्धता: मिलों में काम करने के लिए पर्याप्त संख्या में कुशल और मेहनती मजदूर मौजूद थे।
    • व्यापारिक ढांचा: यहां की वित्तीय व्यवस्था और बैंकों ने व्यापार को बढ़ावा दिया।

    इन सभी सुविधाओं ने मिलकर मुंबई को एक विशाल टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग हब बना दिया।

    cotton city india

    (Image Source: AI-Generated)

    भारत की अर्थव्यवस्था में योगदान

    मुंबई का कपड़ा उद्योग सिर्फ कपड़े बनाने तक सीमित नहीं था, इसने भारत की अर्थव्यवस्था की नींव भी मजबूत की। यहां की बड़ी-बड़ी स्पिनिंग मिलों, वीविंग यूनिट्स और गारमेंट फैक्ट्रियों ने लाखों लोगों को रोजगार दिया।

    इस उद्योग ने रंगाई, सिलाई और परिवहन जैसे जुड़े हुए कामों को भी बढ़ावा दिया। सच तो यह है कि मुंबई को आज हम जिस 'वित्तीय राजधानी' (Financial Capital) के रूप में जानते हैं, उसे बनाने में इसी सूती वस्त्र उद्योग का बहुत बड़ा हाथ था।

    Cotton City of India

    (Image Source: AI-Generated)

    यवतमाल, जहां खेतों में उगता है 'सफेद सोना'

    जब बात कपास की हो रही हो, तो यवतमाल (Yavatmal) का जिक्र करना बहुत जरूरी है। यह क्षेत्र कपास उगाने में अग्रणी है और यहां से जुड़े कुछ रोचक तथ्य इस प्रकार हैं:

    • व्हाइट गोल्ड बेल्ट: कपास को 'सफेद सोना' कहा जाता है। विदर्भ का यवतमाल जिला अपनी काली मिट्टी और अनुकूल जलवायु के कारण कपास उत्पादन के लिए मशहूर है।
    • व्यापार का केंद्र: यह एक बड़ा मंडी हब है, जहां किसान अपनी फसल बेचते हैं। यहां कई जिनिंग और प्रेसिंग यूनिट्स लगी हैं, जो कपास को साफ करके उसकी गांठें तैयार करती हैं और देश भर की मिलों में भेजती हैं।
    • ग्रामीण जीवन का आधार: यहां की पूरी अर्थव्यवस्था- खेती से लेकर ट्रांसपोर्ट और प्रोसेसिंग तक, कपास पर ही टिकी है।

    मुंबई को 'कॉटन सिटी' इसलिए कहा जाता है क्योंकि ऐतिहासिक रूप से इसने भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री, निर्यात और औद्योगिक विकास में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। जहां यवतमाल जैसे क्षेत्र 'सफेद सोना' उगाते हैं, वहीं मुंबई ने उसे दुनिया के बाजार तक पहुंचाने का काम किया।

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