जागरण संपादकीय: ऊर्जा सुरक्षा की तैयारियों पर उठते सवाल
भारत को ऊर्जा सुरक्षा को इसलिए सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी, क्योंकि उसके लिए दूसरे देशों पर आश्रित रहना कभी भी गंभीर संकट खड़े कर सकता है।
HighLights
संसदीय समिति ने ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल उठाए, भंडार अपर्याप्त।
रणनीतिक तेल भंडार के लिए बजट आवंटन बहुत कम है।
वैकल्पिक ऊर्जा, EV चार्जिंग पर तत्काल ध्यान आवश्यक।
पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति ने ऊर्जा सुरक्षा की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए यह सही कहा कि आपातकालीन स्थिति के लिए देश में कच्चे तेल की पर्याप्त भंडारण क्षमता नहीं है। समिति ने रणनीतिक भंडार बनाने के लिए कम बजट आवंटन की जो चर्चा की, उसे सरकार को गंभीरता से लेना होगा। तेल का रणनीतिक भंडार बनाने का काम किस तरह प्राथमिकता से बाहर है, इसका उदाहरण है बजटीय आवंटन के मुकाबले मामूली राशि का खर्च।
ऊर्जा सुरक्षा पर इसलिए तत्काल प्रभाव से ध्यान देना होगा, क्योंकि हाल में पश्चिम एशिया में जो स्थिति बनी, वह भविष्य में भी बन सकती है। भारत फिलहाल भले ही रूस से भरपूर तेल खरीदने में सक्षम हो, पर कुछ समय पहले तक अमेरिका इसके लिए दबाव बना रहा था कि वह रूसी तेल का आयात बंद करे। उसने ईरान से भी तेल खरीद पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसके पहले उसने वेनेजुएला की तेल बिक्री को प्रतिबंधित कर रखा था।
भारत की समस्या केवल यह नहीं कि उसे अपनी आवश्यकता का 85 प्रतिशत से अधिक तेल एवं करीब 60 प्रतिशत गैस आयात करनी पड़ती है और इनमें से एक बड़ा हिस्सा उस पश्चिम एशिया से आता है, जहां रह-रहकर संघर्ष छिड़ जाता है। भारत की समस्या यह भी है कि उसकी तेल एवं गैस भंडारण क्षमता इतनी नहीं कि तीन-चार माह आयात किए बिना गुजारा हो सके।
कच्चे तेल के साथ गैस पर दूसरे देशों पर निर्भरता को कम करने के जतन युद्ध स्तर पर किए जाने चाहिए और इसके लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। घरों और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली गैस की कमी कैसे संकट खड़े कर सकती है, इसे वर्तमान परिदृश्य अच्छी तरह बता रहा है। जरूरत केवल इसकी नहीं कि रसोई गैस सिलिंडर का इस्तेमाल कम से कम हो और घरों एवं कारखानों में पाइपलाइन से गैस की आपूर्ति हो।
जरूरत इसकी भी है कि हर क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों का चलन बढ़े। यही समय है कि देश में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा आदि के उत्पादन और उपयोग पर जोर दिया जाए। उन उपायों पर भी बल दिया जाना चाहिए, जिनसे इलेक्ट्रानिक वाहनों का चलन तेजी से बढ़े। अभी ऐसा इसलिए नहीं हो पा रहा है, क्योंकि पर्याप्त चार्जिंग प्वाइंट ही नहीं हैं। निःसंदेह यह भी समय की मांग है कि खाना पकाने में बिजली का इस्तेमाल बढ़े।
भारत को ऊर्जा सुरक्षा को इसलिए सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी, क्योंकि उसके लिए दूसरे देशों पर आश्रित रहना कभी भी गंभीर संकट खड़े कर सकता है। इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि ऊर्जा सुरक्षा संबंधी कई योजनाएं प्रस्तावित हैं, क्योंकि अपने यहां सौर ऊर्जा से लेकर परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने की योजनाएं तो बन जाती हैं, लेकिन उन पर अमल बहुत धीरे होता है।

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