जागरण संपादकीय: विपक्ष का विचित्र रवैया
राहुल गांधी के यह कहने का क्या मतलब कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, क्योंकि वे तो उसके फैसले की प्रतीक्षा करने को तैयार ही नहीं। क्या वे यह चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट उनके हिसाब से निर्णय दे या फिर उनकी दिलचस्पी उन बिंदुओं पर उसकी राय जानने की है ही नहीं, जो उन्होंने अपनी याचिका में उठाए हैं?
HighLights
राहुल गांधी की याचिका में कमियां, सुनवाई टली।
विपक्ष का प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा नहीं।
चुनाव आयोग को मतदाता सूची शुद्ध करनी चाहिए।
राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं संग मार्च निकालकर सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की थी, उस पर सुनवाई इसलिए नहीं हो सकी, क्योंकि उसमें अनेक कमियां मिलीं। इनके दूर होने के बाद उनकी याचिका पर तो सुनवाई होगी ही, इसी के साथ मतदाता सूचियों को शुद्ध करने की प्रक्रिया यानी एसआईआर पर दायर अन्य याचिकाओं पर भी। यह भी तय है कि राहुल गांधी ने अपनी याचिका में जिन बिंदुओं का उल्लेख किया है, उन पर भी सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा। इसके बाद राहुल और उनके साथियों को सुनवाई की प्रतीक्षा करनी चाहिए, लेकिन वे धरना-प्रदर्शन के साथ शक्ति प्रदर्शन भी कर रहे हैं। वे इसे जारी रखने की भी बात कर रहे हैं।
आखिर ऐसे में राहुल गांधी के यह कहने का क्या मतलब कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, क्योंकि वे तो उसके फैसले की प्रतीक्षा करने को तैयार ही नहीं। क्या वे यह चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट उनके हिसाब से निर्णय दे या फिर उनकी दिलचस्पी उन बिंदुओं पर उसकी राय जानने की है ही नहीं, जो उन्होंने अपनी याचिका में उठाए हैं? यह प्रश्न इसलिए, क्योंकि वे अंतिम लक्ष्य पाने तक चैन से न बैठने की बात कर रहे हैं और यह संकेत देने में संकोच भी नहीं कर रहे हैं कि उनका अंतिम लक्ष्य मुख्य चुनाव आयुक्त समेत मोदी सरकार को हटाना है। क्या वे यह काम सड़कों पर उतरकर और यह झूठ फैलाकर करना चाहते हैं कि लोकतंत्र खत्म हो गया है? लोकतंत्र में तो सत्ता परिवर्तन चुनाव के जरिये होता है। क्या राहुल गांधी अन्य कोई तरीका आजमाना चाह रहे हैं?
राहुल गांधी एसआईआर को वोट चोरी का नाम देकर न केवल जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि उसके विरोध में लोकतांत्रिक तौर-तरीकों से इतर रास्ता भी अपना रहे हैं। इसके लिए वे एसआईआर की कमियों, जटिलताओं और उसके चलते लोगों को हो रही परेशानी को अपनी ढाल बना रहे हैं। अब जब वे झूठ को घी बनाकर उसे आग में डालने का काम कर रहे हैं, तब फिर चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी पात्र मतदाता छूटने न पाए।
इसके लिए एसआईआर प्रक्रिया तब तक जारी रहनी चाहिए, जब तक चुनाव नहीं आ जाते। उसकी ओर से लोगों को अपना सही विवरण और दस्तावेज देने के लिए जो पत्र जारी होते हैं, उन्हें नोटिस का नाम देने से कुछ ऐसा संदेश निकलता है कि उनका नाम वोटर लिस्ट से कटने जा रहा है। संदेश तो यह जाना चाहिए कि एसआईआर के जरिये उन्हें उनका नाम वोटर लिस्ट में दर्ज कराने की सुविधा दी जा रही है। चुनाव आयोग को जितना ध्यान अपात्र लोगों को वोटर लिस्ट से बाहर करने पर देना चाहिए, उतना ही पात्र लोगों को मतदाता बनाने का। इससे ही लोगों का भरोसा बढ़ेगा और वे विपक्ष के बहकावे में आने से बचेंगे।



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