विचार: मिसाल कायम करने वाले मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक सेवा में 25 वर्ष पूरे किए, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनका प्रभावी नेतृत्व शामिल है
HighLights
प्रधानमंत्री मोदी ने सार्वजनिक सेवा में 25 वर्ष पूरे किए।
उनके नेतृत्व में भारत ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई।
मोदी की नीतियों ने देश की आर्थिक प्रगति सुनिश्चित की।
संजय गुप्त। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से देश सेवा के 25 वर्ष पूरे करना कोई सामान् उपलब्धि नहीं है। पहले गुजरात और फिर देश को प्रभावी नेतृत् प्रदान करना न केवल भारत, बल्कि विश्व के लोकतांत्रिक देशों के लिए भी एक मिसाल है। विश् में शायद ही कोई ऐसा नेता हो, जो एक सामान्य कार्यकर्ता से पहले अपने राज्य और फिर देश का मुखिया बना हो और उसने शासन के निरंतर 25 वर्ष सफलता के साथ पूरे किए हों।
गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के पहले मोदी भाजपा संगठन में राष्ट्रीय महामंत्री थे। उनका जन्म एक साधारण परिवार में हुआ। युवावस्था में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और फिर भाजपा में सक्रिय हुए। तत् ालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात में भाजपा सरकार की कमजोर स्थिति को देखते हुए उन्हें वहां का मुख्यमंत्री बनाया।
जिस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने, तब चुनौतियों का अंबार उनका इंतजार कर रहा था। इसी बीच, गोधरा में हिंदुओं की निर्मम हत्या के बाद भड़के दंगों के बाद एक सुनियोजित नैरेटिव के जरिये मोदी को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया गया। अमेरिका में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध तक लगा दिया गया। कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने उन्हें घेरने की भरसक कोशिश की। गुजरात दंगों की जांच के लिए एसआइटी भी बनी, लेकिन मोदी बेदाग होकर निकले।
मोदी ने गुजरात में विकास की ऐसी गंगा बहाई कि उनके सत्ता में आने के बाद से भाजपा वहां कोई चुनाव नहीं हारी और कांग्रेस निरंतर हाशिए पर जाती गई। उनका गुजरात माडल देश में एक मिसाल बनता गया। यही कारण रहा कि दिल्ली में भाजपा के कई दिग्गज राष्ट्रीय नेताओं के बावजूद पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी पर ही दांव लगाया। उसके बाद से जो घटा, वह इतिहास का हिस्सा बन चुका है।
मोदी की लोकप्रियता के चलते भाजपा 2014 में अपने बलबूते पर सरकार बनाने में सफल रही। तब केंद्रीय शासन का कोई अनुभव न रखते हुए भी प्रधानमंत्री मोदी ने देश की तस्वीर बदलने का जो काम शुरू किया, वह आज तक जारी है और इसी कारण उनकी गिनती विश् के प्रमुख और लोकप्रिय नेताओं में होती है। आज विश्व पटल पर भारत की जो धाक है, वह मोदी के कारण ही है। पहले दुनिया भारत और पाकिस्तान को एक ही चश्मे से देखती थी, लेकिन अब यह स्थिति बदल चुकी है।
मोदी ने पाकिस्तान के आतंकी कृत्यों को सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और आपरेशन सिंदूर के जरिये ऐसा जवाब दिया कि उसकी हेकड़ी निकल गई। आज जहां भारत जी20 एवं ब्रिक्स जैसे मंचों पर मुखर है और ग्लोबल साउथ की आवाज बन रहा है, वहीं पाकिस्तान की गिनती नाकाम मुल्कों में की जाने लगी है। आज चीन, अमेरिका और रूस जैसे देशों की श्रेणी में अगर किसी का उभार होता दिख रहा है तो वह भारत ही है।
भारत के इजरायल से प्रगाढ़ संबंध हैं तो ईरान से भी। रूस भी भारत पर भरोसा करता है तो यूक्रेन भी। बिना किसी के दबाव में आए भारतीय हितों को प्राथमिकता देना मोदी की कूटनीति का खास पहलू बन गया है। आज विश्व भारत को किसी खेमे में नहीं देखता। विश्व भारत की आर्थिक प्रगति से भी प्रभावित है और उसकी क्षमताओं से भी।
भाजपा के विरोधी दल उसके विरुद्ध यह नैरेटिव बनाते हैं कि वह ध्रुवीकरण की राजनीति करती है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की नीतियां यही दर्शाती हैं कि उनकी सरकार किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करती। उज्ज्वला से लेकर आवास और आयुष्मान भारत जैसी तमाम ऐसी योजनाएं हैं, जिनसे हर तबके को फायदा पहुंच रहा है। मोदी तकनीक को अपनाने वाले प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने जनधन खाता-आधार-मोबाइल नंबर यानी जैम की तिकड़ी से ऐसा प्रभावी तंत्र बनाया, जिसने न केवल पात्र लाभार्थियों तक लाभ सुनिश्चित किया, बल्कि सरकारी तंत्र के अरबों रुपये भी बचाए।
जब कोविड जैसी महामारी के आगे दुनिया लाचार हो गई थी और माना जा रहा था कि भारत को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा, तब मोदी की नीतियों ने ऐसी आशंकाओं को निर्मूल साबित किया। उन्होंने इस मुश्किल वक्त में अर्थव्यवस्था को सहारा देकर उसकी गति बढ़ाई और रिकार्ड समय में स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर न केवल सफल टीकाकरण अभियान चलाया, बल्कि कई देशों को वैक्सीन उपलब्ध भी कराई। इसने भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाई।
मोदी की तरह पं. नेहरू ने भी देश पर लंबा शासन किया, लेकिन यह न भूला जाए कि नेहरू के समय विपक्षी दल बहुत कमजोर थे और उनकी संख्या भी नाम मात्र की थी। मोदी के विरोधी उन पर तानाशाह होने का आरोप लगाते हैं, जबकि वास्तविकता यही है कि देश पर आपातकाल थोपने वाली इंदिरा गांधी थीं। मोदी जैसी कठोर आलोचना देश में शायद ही किसी नेता को झेलनी पड़ी हो। कठोर आलोचना के बाद भी मोदी अपनी लोकप्रियता बनाए हुए हैं और यही विपक्षी दलों की परेशानी का कारण है। आज अगर भाजपा विश् की सबसे बड़ी पार्टी बनी है तो उसका श्रेय मोदी की नीतियों को ही जाता है।
इस समय पूरा विश्व कई मोर्चों पर अलग-अलग चुनौतियों से दो-चार है। कई जगहों पर युद्ध छिड़े हुए हैं या अशांति बनी हुई है। एआइ जैसी उभरती हुई तकनीकों के चलते रोजगारों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मोदी सरकार ने इन परिस्थितियों को भांपकर उसके अनुरूप नीतियां बनानी भी शुरू कर दी हैं। वास्तव में मोदी हर चुनौती और परिवर्तन का सामना करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। आपदा में अवसर उनकी कार्यशैली का एक मूलमंत्र रहा है। इसी कारण देश का उन पर भरोसा कायम है।
आज देश के युवाओं को गुमराह करने की साजिश रची जा रही है। कुछ शक्तियां भारत की प्रगति में अवरोध पैदा करने पर तुली हैं। वे आर्थिक वृद्धि की गाड़ी को पटरी से उतारने पर आमादा हैं। वे युवाओं को भड़का रही हैं, मगर देश के युवाओं और नागरिकों को यह याद रखना होगा कि गवर्नेंस के मोर्चे पर अतीत में तमाम चुनौतियों से पार पाकर अपनी क्षमता का लोहा मनवा चुके मोदी में ही उनकी मुश्किलों का हल निकालने का माद्दा है।
यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि तमाम जटिल परिस्थितियों के बावजूद मोदी शासन संचालन के अपने व्यापक अनुभव और दूरदर्शिता से देश को आगे ले जाने में सफल रहेंगे।
(लेखक दैनिक जागरण के प्रधान संपादक हैं)






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