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    बायोडायवर्सिटी पार्क से दमदमा झील तक... अनोखी है हिमालय से पुरानी अरावली की कहानी

    By Priyanka Dubey MehtaEdited By: Anup Tiwari
    Updated: Sat, 03 Jan 2026 12:21 PM (IST)

    यह लेख अरावली पर्वत श्रृंखला को एनसीआर की जीवनदायिनी बताता है, जो शुद्ध हवा और पानी प्रदान करती है। इसमें गुरुग्राम, फरीदाबाद और दिल्ली के विभिन्न प्र ...और पढ़ें

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    दिल्ली-एनसीआर के लिए महत्वपूर्ण है अरावली।

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    प्रियंका दूबे मेहता, नई दिल्ली। एक पर्वत शृंखला जो सदियों से मौन खड़ी कई प्रदेशों की जीवनदायिनी बनी हुई है। जिसकी पौराणिक मान्यताएं और प्राचीन इतिहास के साक्ष्य चीख-चीख कर धर्म और सभ्यताओं के साक्षी होने की गवाही देते हैं। वो मैं हूं..., हां मैं ही हूं जिसने सदियां नहीं...शताब्दियां बीतते देखी हैं, हर ओर से आती धूल भरी हवाओं के थपेड़े झेले हैं।

    अपने सीने से पानी के शीतल फुहारें बरसाई हैं और मैं ही हूं जो आज अपने संरक्षण को लेकर दुखी हूं, परेशान हूं, बेबस हूं...वो भी अपने लिए नहीं, आपके और आपकी आने वाली पीढि़यों के लिए। पेड़-पौधों और बेजुबान जानवरों के लिए।

    प्रदूषण से तड़पते दिल्ली सहित एनसीआर क्षेत्र में अरावली सिर्फ परोक्ष ही नहीं, प्रत्यक्ष रूप से भी एक ऐसी ‘सांसों की माला’ है जहां लोग अपनी रोजमर्रा की भागदौड़ से निकलकर सुकून के दो पल बिताने आते हैं। खुलकर सांस ले पाते हैं। अरावली का जो शृंगार हुआ है उससे लोगों को मशीनी दिनचर्या से इतर राहत भरे पल मयस्सर हो जाते हैं।

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    एनसीआर में अरावली की पहली असली झलक अगर कहीं मिलती है तो वह है गुरुग्राम का अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क। गुरु द्रोणाचार्य मेट्रो स्टेशन के पास स्थित यह पार्क कभी खनन से उजड़ी जमीन थी। इसे पुनर्जीवित कर एक विशाल हरित क्षेत्र में बदला गया। लगभग 380 से 700 एकड़ में फैले इस पार्क को पांच जून 2010 को आम लोगों के लिए खोला गया।

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    यहां प्राकृतिक जंगल, देशी पौधों की प्रजातियां, तितलियां और सैकड़ों पक्षी प्रजातियां देखने को मिलती हैं। सुबह की ठंडी हवा में वाक, नेचर ट्रेल्स और बर्ड वॉचिंग के लिए यह जगह खास तौर पर लोकप्रिय है। आम तौर पर पार्क सुबह और शाम खुला रहता है और शहर के शोर से दूर एक शांत अनुभव देता है।

    लेपर्ड ट्रेल या अरावली ट्रेल

    गुरुग्राम के बाहरी हिस्से में अरावली की पहाड़ियों के बीच फैला लेपर्ड ट्रेल उन लोगों के लिए है जो भीड़ से दूर असली जंगल का अनुभव चाहते हैं। यह कोई कृत्रिम पार्क नहीं है, यह करीब 10-12 किलोमीटर लंबा प्राकृतिक ट्रेल है, जो पहाड़ियों और घाटियों से होकर गुजरता है। यहां आने वाले लोग सुबह या दोपहर में ट्रेकिंग और लांग वाक के लिए निकलते हैं।

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    इमेज सोर्स - गुरुग्राम लेपर्ड ट्रेल वेबसाइट

    साल भर खुला रहने वाला यह ट्रेल खासकर वीकेंड पर नेचर लवर्स और फिटनेस एंथूसियास्ट्स को आकर्षित करता है। यहां भले ही लेपर्ड्स नजर न आते हों लेकिन अरावली की खामोशी और खुला आसमान एक अलग ही सुकून देता है।

    कैंप वाइल्ड धौज, मांगरबनी 

    अरावली के भीतर रोमांच और प्रकृति का मेल चाहिए तो कैंप वाइल्ड धौज भी लोगों को आकर्षित करता है। गुरुग्राम-फरीदाबाद सीमा के पास स्थित यह एक प्राइवेट एडवेंचर और कैंपिंग साइट है। जंगल के बीच बसे इस इलाके में हाइकिंग, राक क्लाइंबिंग, कैंप फायर और टीम-बिल्डिंग एक्टिविटीज कराई जाती हैं।

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    इमेज सोर्स - इंटरनेट मीडिया

    यहां बुकिंग के बाद ही जा सकते हैं। अधिकतर लोग वीकेंड पर जाते हैं। शहर के लोगों के लिए यह अरावली में एक मिनी एडवेंचर ब्रेक साबित होता है।

    सोहना की दमदमा लेक 

    सोहना के पास अरावली की तलहटी में दमदमा झील एनसीआर की सबसे पुरानी और लोकप्रिय पिकनिक लोकेशंस में से एक है। यह एक प्राकृतिक झील है जो दशकों से लोगों के लिए सुकून और आउटडोर मनोरंजन का केंद्र रही है। बोटिंग, कैंपिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए जानी जाने वाली यह जगह साल भर खुली रहती है।

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    इमेज सोर्स - जागरण आर्काइव

    अक्टूबर से मार्च का समय यहां आने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। अरावली की पहाड़ियों से घिरी झील, खासकर सर्दियों में, परिवारों और कारपोरेट आउटिंग्स से गुलजार रहती है।

    सोहना का हाट स्प्रिंग्स और हिल व्यू प्वाइंट

    सोहना का इलाका अरावली के एक और दिलचस्प पहलू को दिखाता है। यहां प्राकृतिक गर्म पानी का स्रोत, शिव कुंड और पहाड़ी व्यू प्वाइंट्स हैं। यह इलाका धार्मिक, प्राकृतिक और पर्यटन तीनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां लोग सुबह-दोपहर स्नान, दर्शन और घूमने आते हैं, जबकि शाम को पहाड़ियों से सनसेट देखने वालों की चहल-पहल होती है। साल भर खुला रहने वाला यह क्षेत्र छोटे वीकेंड ट्रिप के लिए पसंद किया जाता है।

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    इमेज सोर्स - इंटरनेट मीडिया

    मांगरबनी फारेस्ट और रिज 

    दिल्ली-फरीदाबाद बार्डर पर स्थित मांगरबनी को अरावली का सबसे प्राचीन जंगल माना जाता है। यह जगह सिर्फ पिकनिक स्पाट ही नहीं बल्कि हजारों साल पुराने मानव इतिहास और जैव विविधता का गवाह है। घना जंगल, चट्टानी रास्ते और रहस्यमयी शांति, यह सब इसे खास बनाता है।

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    यहां कोई बड़े गेट या टिकट सिस्टम नहीं हैं लेकिन लोग सुबह और शाम ट्रेल वाक, फोटोग्राफी और नेचर स्टडी के लिए आते हैं। यह जगह आज भी अपेक्षाकृत अनछुई है। इसका एक कारण भी है। कहा जाता था कि यहां पर एक गुदड़िया दस बाबा हुआ करते थे, वो यहां तपस्या करते थे और यहां पर कोई अगर पत्ता भी तोड़ लेता था या अपनी बकरियां चराता था तो बाबा उसे श्राप दे देते थे।

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    इमेज सोर्स - इंटरनेट मीडिया

    इस बार में प्रदीप कृष्ण ने अपनी पुस्तक ‘द ट्रीज आफ दिल्ली’ में लिखा है कि यहां के लोग आज भी इस मान्यता को रखते हैं और शायद यही वजह है कि जंगल का यह इलाका आज भी उतना ही प्राकृतिक है, उतना ही अनछुआ। हालांकि आसपास के इलाके में कुछ परमिशंस मिली हैं लेकिन वह भी सवालों के घेरे में हैं। 

    अरावली हिल व्यू, सनसेट प्वाइंट 

    गुरुग्राम और फरीदाबाद के आसपास अरावली की पहाड़ियों में कई हिल-व्यू और सनसेट प्वाइंट्स हैं जो औपचारिक पर्यटन स्थल नहीं लेकिन स्थानीय लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। बादशाहपुर, हसनपुर और आसपास के इलाकों में स्थित ये जगहें शाम की सैर, फोटोग्राफी और हल्की-फुल्की पिकनिक के लिए जानी जाती हैं। आम तौर पर यह साल भर खुले रहते हैं और खासकर सुबह-शाम यहां लोग आते-जाते दिख जाते हैं।

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    इमेज सोर्स - पीटीआई

    सभ्यताओं के विकास की गवाह 

    सबसे पुरानी पर्वत शृंखलाओं में से एक अरावली दिल्ली की ही नहीं, सभ्यता की बसावट से पहले से रहा है। एनसीआर की जीवन अरावली सांस लेने के लिए शुद्ध हवा और शुद्ध पानी उपलब्ध करवाने के लिए सदियों से उत्तरदायी रहा है। अरावली पहाड़ियों में प्राकृतिक दरारें हैं जो हर साल जमीन में प्रति हेक्टेयर दो मिलियन लीटर पानी रिचार्ज करती हैं।

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    यहां पर पाषाण कालीन औजार मिले हैं। इसे बारे में शोधकर्ता सैलेश बैसला का कहना है कि वे वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं और यहां अभी और भी संभावनाएं हैं।

    विदेशी पक्षियों का सीजनल आवास

    चकरपुर-वजीराबाद बंध और अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित करने वाली ‘आइ एम गुड़गांव’ की संस्थापक लतिका ठुकराल का कहना है कि अरावली केवल स्थानीय ही नहीं, विदेशी पक्षियों का भी आवास है। यहां दुर्लभ पक्षी बर्ड वाचर्स के लिए वरदान साबित होते हैं।

    यह क्षेत्र स्थानीय पेड़ों, झाड़ियों, घास और जड़ी-बूटियों की चार सौ से अधिक प्रजातियों के साथ जैव विविधता का हाट स्पाट भी है। स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की दो सौ से अधिक प्रजातियां, सौ से अधिक तितली प्रजातियां, 20 से अधिक सरीसृप प्रजातियां और 20 से अधिक स्तनपायी प्रजातियां हैं।

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    इमेज सोर्स - इंटरनेट मीडिया

    इनमें तेंदुए, नीलगाय, हाइना, सिवेट बिल्लियों, बंदर जैसे कई दुर्लभ प्रजातियां भी समय समय पर दिखती रहती हैं। इसके अलावा सुल्तानपुर में हर साल विदेशी पक्षी, साइबेरियन क्रेन जैसे पक्षी आते हैं लेकिन अगर अनुकूलन ही नहीं मिला तो ये विदेश मेहमान भी आने बंद हो जाएंगे।

    नासमझ फैसलों से पहले भी सिकुड़ी हरियाली 

    अब तक भी योजनाएं बनीं और सैटेलाइट ने मैपिंग के जरिए हरियाली ही हरियाली दिखा दी जबकि सच्चाई यह है कि विलायती कीकर जैसे पेड़ों को हरियाली समझना, नासमझी के अलावा कुछ भी नहीं है। फिल्म निर्माता, शिक्षाविद् लेखक, पर्यावरणविद और दिल्ली की वनस्पतियों, यहां की पारिस्थितिकी पर ‘ट्रीज आफ दिल्ली’ पुस्तक के लेखक प्रदीप कृष्ण का कहना है कि 1960 के बाद हरियाली सिकुड़ती चली गई।

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    सोचने वाली बात है कि उस वक्त जब हवा जहरीली हो चुकी है, एक्यूआइ अपने खतरे के स्तर को पार कर चुका है, मौसम असंतुलित होने लगा है, पानी की समस्या लगातार गहराती जा रही है, उस समय में भी हमने अपनी जीवनदायिनी अरावली की परवाह नहीं की तो आने वाले वर्ष कैसे होंगे।

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    रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी डा. आरपी बलवान का कहना है कि हम अरावली और हरियाली का गला नहीं, मनुष्य जाति का गला घोंट रहे हैं क्योंकि हरियाली नहीं तो जीवन नहीं और अरावली है तो जिंदगी की उम्मीद जिंदा है।

    अरावली की गोद में

    अरावली के प्रमुख स्थल
    🌿 अरावली बायोडायवर्सिटी पार्क, वसंत कुंज यहां चट्टानी अरावली लैंडस्केप, देसी पेड़, घास के मैदान और मौसमी जलस्रोत दिखाई देते हैं।
    🌳 नॉर्दर्न रिज या कमला नेहरू रिज घने पेड़, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और पुरानी चट्टानें इसे एक सच्चा जंगल बनाती हैं। इतिहास-प्रेमियों के लिए भी खास।
    🏙️ सेंट्रल रिज शहर के सबसे व्यस्त इलाकों के बीच दबा अरावली का यह हिस्सा शहरी जंगल का अनोखा उदाहरण है।
    🌄 साउथ सेंट्रल रिज साकेत और पुष्प विहार के आसपास फैला यह इलाका अरावली की निरंतरता बनाए रखता है। न पार्क, न पूरा जंगल।
    🕉️ संजय वन घना जंगली हिस्सा जिसमें पुराने सूफी मजार, खंडहर, चट्टानी रास्ते और गहरा जंगल है। शांति और ध्यान के लिए आदर्श।
    🏰 तुगलकाबाद बायोडायवर्सिटी पार्क अरावली की पहाड़ियों और ऐतिहासिक लैंडस्केप को जोड़ता है। चट्टानी ढलानें, घाटियां और पुनर्जीवित वनस्पति।
    🦜 असोला भट्टी वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी गाइडेड नेचर वॉक, बर्ड वाचिंग और ट्रेल्स के लिए प्रसिद्ध। दिल्ली को हरियाणा की अरावली से जोड़ता है।