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    दरगाह आला हजरत से हराम करार दिया गया पोकेमॉन गेम

    By Ashish MishraEdited By:
    Updated: Thu, 04 Aug 2016 04:15 PM (IST)

    दरगाह आला हजरत ने फतवा जारी कर पोकेमॉन गो गेम को हराम और नाजायज करार देते हुए मुसलमानों को नहीं खेलने की नसीहत की है।

    बरेली (जेएनएन)। दुनियाभर में जबर्दस्त क्रेज का सबब बने पोकेमॉन गेम पर दरगाह आला हजरत से फतवा दिया गया है। मुफ्तियों की टीम ने सलाह-मशवरे के बाद इस गेम को हराम और नाजायज करार देते हुए मुसलमानों को नहीं खेलने की नसीहत की है। फतवा साउथ अफ्रीका के शहर डरबन और मारीशस में रहने वाले आला हजरत के अकीदतमंदों ने मांगा था। सऊदी अरब और मिस्र के उलमा पोकेमॉन पर फतवा पहले ही दे चुके हैं। सऊदी अरब में तो गेम के खेलने पर ही रोक लगाई जा चुकी है।

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    इन्होंने यह पूछा था सवाल
    डर्बन में रहने वाले मुहम्मद शाहिद और मॉरीशस के मुहम्मद अली उर्फ रोम जॉन ने पोकेमॉन गेम को लेकर बच्चों के साथ बड़ों में भारी क्रेज है। कुछ खबरें ऐसी आ रही हैं कि इस गेम का खेलना मजहबी तौर पर गलत है। लिहाजा, इस मसले पर शरीयत की रूह से स्थिति साफ करें? गेम जायज है या नाजायज?

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    यह दिया गया जवाब
    दरगाह आला हजरत के प्रवक्ता एवं मंजरे इस्लाम के मुफ्ती मुहम्मद सलीम नूरी का कहना है कि गेम के बारे में मुफ्तियों को जानकारी नहीं थी। इस पर रिसर्च की गई। उसके बाद तमाम चीजें साफ हुईं। इस नतीजे पर पहुंचे कि गेम का खेलना हराम है। इससे बचने की जरूरत है। डरबन और मॉरीशस से सवाल पूछने वालों को जवाब भेज दिया है।

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    इस वजह से हराम करार दिया
    मुफ्ती सलीम नूरी का कहना है कि पोकेमॉन गेम में शैतान को प्रमोट किया गया है। दिखाया गया कि वह कितना शक्तिशाली है, जिससे शैतानियत बढऩे का अंदेशा है। दूसरे इसे खेलते वक्त वॉकिंग करना पड़ती है। देखने में आ रहा है कि गेम को खेलने वाला उसमें पूरी तरह डूब जाता है। जान का खतरा बन जाता है। गेम खेलने वाले को मजहबी और पारिवारिक फराइज तक पूरे करने का ख्याल नहीं रहता। ऐसी कोई चीज जो मजहब से हटाने का काम करे, हराम है। शरीयत में ऐसे खेल खेलने से मना किया गया है।
    दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मौलाना मुहम्मद अहसन रजा कादरी के अनुसार पोकेमॉन गेम को दरगाह के मुफ्तियों ने हराम और नाजायज करार दिया है। लिहाजा इसका खेलना गुनाह का सबब होगा। मुसलमानों को इससे बचना चाहिए।