अंग्रेजी में कामकाज करने वालों को याद आई हिंदी, बोले- इसके बिना पहचान नहीं
14 सितंबर 1949 को देश की संविधान सभा ने हिंदी को भारतीय संघ की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया था। इस मौके पर केंद्रीय विभागों और अन्य कार्यालयों में हिंद ...और पढ़ें
चंडीगढ़, [ओजस्कर पाण्डेय]। हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर चंडीगढ़ के केंद्रीय विभागों में हिंदी भाषा की धूम दिखी। बारह महीने अंग्रेजी में कामकाज करने वाले तमाम संस्थानों ने भी अंग्रेजियत का चोला उतारकर हिंदी का वरण किया।
हिंदी दिवस पर यह सब स्वाभाविक नजर आता है, मगर हिंदी का ऐसा गुणगान एक दिन की रस्मअदायगी तक सीमित न रहकर व्यवहार में भी उतरे तो यही हिंदी दिवस की सार्थकता है। इस संबंध में इंडियन आयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के मुख्य महाप्रबंधक संदीप जैन बताते हैं कि मातृभाषा हिंदी भी एक ऐसी पनाहगाह है, जिसकी ममतामयी सिलवटों में भविष्य की संभावनाएं पा सकते हैं।
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उन्होंने बताया केवल एक दिन से हिंदी का विकास नहीं हो सकता है। इंडियन ऑयल कार्यालय में हिंदी में काम वर्षभर होता है चंडीगढ़ राजभाषा नीति में इस क्षेत्र को ख श्रेणी में रखा गया है। जहां सभी सरकारी कार्यालयों में 90 प्रतिशत कार्य करने का निर्देश हैं। इससे इतर क क्षेत्र के सरकारी कार्यालयों में 100 प्रतिशत करने का दिशा निर्देश है।
यहां लक्ष्य तो 90 प्रतिशत का है परंतु यह कार्यालय तीनों क्षेत्रों के लिए काम करता है ऐसे में यहां 86 प्रतिशत ही कार्य किए जाते हैं क्योंकि क्षेत्र ग में हिंदी में काम करने का निर्देश केवल 55 प्रतिशत है इसलिए एवरेज 85-86 प्रतिशत ही होता है। हिंदी अधिकारी राजीव रंजन बताते हैं कि ग क्षेत्र में वे प्रदेश आते हैं जहां हिंदी नहीं बोली जाती इसलिए यहां से वहां के कार्यालयों में पत्राचार अंग्रेजी में किए जाते हैं।
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वहीं कर्मचारी राज्य बीमा निगम चंडीगढ़ के क्षेत्रीय निदेशक सुनील तनेजा बताते हैं कि हमारे कार्यालय में साल भर हिंदी में काम होता है। हमारे कार्यालय को हिंदी में काम करने के लिए प्रथम पुरस्कार दिया गया है। उन्होंने बताया कि हिंदी के विशाल क्षेत्र और देववाणी संस्कृत से इसकी निकटता को देखते हुए 14 सितंबर 1949 को देश की संविधान सभा ने हिंदी को भारतीय संघ की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया था। इसी कारण प्रतिवर्ष हिंदी दिवस मनाया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यहां को काम करने वाले कर्मचारी जो अपने आवेदन लिखते हैं वो हिंदी में ही होते हैं हिंदीभाषी कर्मचारी यदि हिंदी आवेदन नहीं लिखते हैं उस पर मैं हस्ताक्षर नहीं करता। कुल मिलाकर यहां 90-95 प्रतिशत कार्य हिंदी में किया जाता है।
कर्मचारी राज्य बीमा निगम चंडीगढ़ में उप निदेशक हिंदी श्याम कुमार बताते हैं कि यह कार्यालय छह राज्यों को देखता है जिसमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर व उत्तराखंड आते हैं। सभी हिंदी बोली जाने वाली राज्य हैं। हिंदी को शासकीय संरक्षण से मिले मुकाम के कारण हिंदी आज देश के सबसे बड़ी हिस्से की प्रथम भाषा है। लिहाजा सरकार इसके प्रचार प्रसार को बढ़ावा देने में लगी है। सरकारी कार्यालयों में हिंदी के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
यूनियन बैंक के सीनियर मैनेजर हरीश कुमार बताते हैं कि हिंदी संविधान सभा द्वारा हिंदी को अंगीकार करने के बाद 1953 में हिंदी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर सन 1953 से संपूर्ण भारत में हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। हिंदी के बिना हमारी पहचान नहीं है। उनका मानना है कि हिंदी विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली तीसरी भाषा है।
भारत में अंग्रेजी शासनकाल में भले ही ब्रिटिश लोगों ने देश में अंग्रेजी का प्रसार किया था, लेकिन स्वतंत्रता के बाद देश के कई क्षेत्रों को जोडऩे के लिए हिंदी फिर से मददगार साबित हुई क्योंकि हिंदी को सीखना और समझना आसान था। बैंक में प्राय: हिंदी में ही कार्य किए जाते हैं परंतु जो काम हिंदी में नहीं किए जाते वे हैं कानूनी प्रक्रिया वाले काम।

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