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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 28, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

राजद्रोह कानून की हो रही है समीक्षा, रिपोर्ट मिलने के बाद बुलाई जाएगी सर्वदलीय बैठक

By Kamal VermaEdited By:
Published: Wed, 28 Dec 2016 12:42 AM (IST)Updated: Wed, 28 Dec 2016 06:13 AM (IST)

राजद्रोह कानून पर विधि आयोग विचार कर रहा है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार इस मसले पर विचार विमर्श के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाएगी।

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नई दिल्ली (माला दीक्षित)। एक तरफ राज्य की सुरक्षा और सम्मान तथा दूसरी ओर दुरुपयोग की आशंकाओं के बीच उलझे राजद्रोह कानून की समीक्षा हो रही है। विधि आयोग भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 124ए में दिये गये राजद्रोह कानून की समीक्षा कर रहा है। आयोग इसके प्रभाव, दायरे और उद्देश्य, के साथ दुरुपयोग के पहलुओं को भी परखेगा। हालांकि राजद्रोह कानून पर आयोग की अलग से रिपोर्ट आने की कम उम्मीद है। आयोग क्रिमिनल ला की समीक्षा कर रहा है और क्रिमिनल ला में संशोधन व सुधार पर की जाने वाली सिफारिशों में ही राजद्रोह कानून भी शामिल होगा।

लंबे समय से सरकारों पर राजद्रोह कानून के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं। मोदी सरकार पर भी इसके दुरुपयोग के आरोप लगे। जेएनयू प्रकरण पुराना नहीं है जिसमें आपत्तिजनक भाषण देने पर छात्र नेता कन्हैया कुमार पर राजद्रोह का आरोप लगा। चूंकि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के तहत आती है इसलिए राजद्रोह कानून के दुरुपयोग के ये आरोप केन्द्र सरकार पर लगे। इस मुद्दे पर कई दिन संसद बाधित रही थी और तब केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा था कि राजद्रोह कानून पर विधि आयोग विचार कर रहा है।

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आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार इस मसले पर विचार विमर्श के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाएगी। ये बात तो गत मार्च की है लेकिन विधि आयोग के समक्ष राजद्रोह कानून की समीक्षा का मुद्दा केंद्र सरकार ने 2012 में भेजा था। उसके बाद कई बार सरकार की ओर से रिमाइंडर भी भेजे गये। मोदी सरकार ने भी सत्ता में आने के बाद रिमाइंडर भेज कर आयोग से इस पर विचार करने का आग्रह किया था।

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विधि आयोग ने इसे प्राथमिकता पर लिया है। पिछले महीने आयोग ने एक ला कालेज के साथ मिल कर दो दिवसीय कान्फ्रेंस की थी जिसमें अभिव्यक्ति की आजादी, राजद्रोह और मानहानि तीन विषयों पर चर्चा और विचार विमर्श हुआ। इस चर्चा में वर्तमान और सेवानिवृत न्यायाधीशों के अलावा वरिष्ठ वकीलों और कानूनविदों ने हिस्सा लिया। कान्फ्रेंस का दूसरा सत्र राजद्रोह कानून पर था जिसके मुख्य वक्ता पूर्व न्यायाधीश और विधि आयोग के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस एपी शाह थे।

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चर्चा में दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता, राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी, सुप्रीमकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन सहित कई कानून के जानकारों ने मत प्रकट किया। चर्चा में कानून के दुरुपयोग पर चिंता जताने के साथ ही राज्य की स्थिरता के लिए इसे जरूरी भी बताया गया। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बीएस चौहान कहते हैं कि अभी विचार विमर्श का दौर चल रहा है। कान्फ्रेंस में हुई चर्चा के अलावा भी आयोग बुद्धिजीवियों और कानूनविदों से विमर्श कर रहा है।

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मौजूदा फैसलों को भी देखा जायेगा। यह बड़ा और गंभीर मुद्दा है इसमें अभी समय लगेगा। आयोग क्रिमिनल ला की समीक्षा कर रहा है उसी के साथ राजद्रोह और जमानत, तथा मानहानि आदि कानूनों पर भी विचार किया जायेगा। राजद्रोह फिलहाल गैरजमानती संज्ञेय अपराध है इसमें जुर्माने से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।

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