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    'साइकिल' पर सवारी का मामला पहुंचा चुनाव आयोग, मुलायम ने ठोका दावा

    By Rajesh KumarEdited By:
    Updated: Mon, 02 Jan 2017 07:49 PM (IST)

    समाजवादी पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित हो चुके रामगोपाल यादव भी मंगलवार की सुबह साढ़े ग्यारह बजे चुनाव आयोग पहुंचेंगे। ...और पढ़ें

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    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के बीच पार्टी के चुनाव चिन्ह साइकिल को लेकर मुलायम सिंह यादव ने सोमवार को केंद्रीय निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने चुनाव आयोग से मुलाकात में असल समाजवादी पार्टी और चुनाव चिन्ह पर दावा पेश किया। जबकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव वाले दूसरे धड़े की ओर से प्रोफेसर रामगोपाल यादव मंगलवार को चुनाव आयोग से मुलाकात करेंगे।

    चुनाव चिन्ह और पार्टी पर परस्पर दावे से संकट गंभीर हो गया है। ऐसे में चुनाव आयोग का फैसला ही अंतिम होगा। दोनों गुटों के बीच सुलह नहीं हुई तो साइकिल चुनाव चिन्ह का जब्त होना तय है। समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव सोमवार को सुबह ही राजधानी दिल्ली पहुंच गये। उन्होंने दिल्ली के अपने सरकारी आवास 16, अशोक रोड पर कुछ गिने चुने सहयोगियों से लंबी मंत्रणा की।

    इसके बाद साढ़े चार बजे मुलायम सिंह यादव अमर सिंह, शिवपाल यादव और जया प्रदा को लेकर निर्वाचन आयोग पहुंचे। वहां उन्होंने आयोग के साथ लगभग 40 मिनट तक बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपनी पार्टी की ताजा स्थिति के बारे में ब्यौरा दिया और अपनी समाजवादी पार्टी और चुनाव चिन्ह पर अपना कानूनी दावा पेश किया।

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    केंद्रीय निर्वाचन आयोग के समक्ष नेताजी यानी मुलायम सिंह का काफिला ठीक साढ़े चार बजे पहुंचा। उनके काफिले में कुल तीन कारें थी, जिसमें ये नेता सवार थे। बाहर खड़ी मीडिया से उन्होंने कोई बात नहीं की। बाहर इंतजार कर रहे पत्रकारों को चकमा देते हुए मुलायम सिंह का काफिला आयोग से मुलाकात कर पिछले दरवाजे से बाहर निकल गया। इस बारे में उन्होंने कोई बात नहीं की।

    सूत्रों की मानें तो चुनाव आयोग फिलहाल कोई भी फैसला लेने से पहले पक्ष को जरूर सुनेगा। इसीलिए आयोग ने प्रोफेसर रामगोपाल यादव को मुलाकात के लिए मंगलवार को दिन में साढ़े ग्यारह बजे का समय दिया है। समाजवादी पार्टी के विवाद को निपटाने में कम से कम दो से तीन महीने का समय लग सकता है। इससे पहले ऐसी स्थिति में आयोग किसी एक धड़े को न पार्टी का नाम दे सकता है और न ही चुनाव चिन्ह देने की स्थिति में होगा।

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    दोनों गुटों को नये चुनाव चिन्ह पर संतोष करना पड़ सकता है। जबकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की घोषणा इसी सप्ताह होने की संभावना है। राज्य में समाजवादी पार्टी के दोनों धड़े अपना-अपना दावा पेश कर अपनी तैयारियों में जुट गये हैं। जबकि गेंद पूरी तरह चुनाव आयोग के पाले में है।