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    SP कुनबे में भारी रार : पिता-पुत्र की जंग में बेेटा का पलड़ा भारी

    By JP YadavEdited By:
    Updated: Wed, 04 Jan 2017 07:38 AM (IST)

    राजनीति के जानकारों का कहना है कि अखिलेश राहुल गांधी व जयंत चौधरी के साथ गठबंधन करने के पक्ष में हैं मगर मुलायम सिंह यादव इससे सहमत नहीं हैं। ...और पढ़ें

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    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व मुलायम सिंह यादव की सांकेतिक तस्वीर।

    गाजियाबाद (राज कौशिक)। समाजवादी पार्टी में चल रहा विवाद फिलहाल खत्म हुआ नजर आ रहा है। कुनबे की रार से स्तब्ध नजर आ रहे गाजियाबाद के सपाई भी इस समय चैन की सांस ले रहे हैं। लगभग सभी का मानना है कि किसी के बहकावे में आए बिना अगर मुलायम सिंह यादव अपने बेटे व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हाथ मजबूत करने की तरफ ध्यान दें, तो इससे समाजवादी पार्टी का भी भला होगा और समाजवादी सोच भी मजबूत होगी।

    लगभग पूरे प्रदेश की तरह गाजियाबाद में भी तमाम पुराने सपाई मुलायम सिंह यादव से सीधे बावस्ता रहे हैं। विधानसभा चुनावों में मुलायम सिंह यादव गाजियाबाद से चुनाव लड़ रहे अपने प्रत्याशी को स्वयं बुलाकर बुलाकर आर्थिक मदद देते रहे हैं।

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    मुख्यमंत्री बनने के बाद वह तीन बार उस समय के अपने विधायक व मंत्री डीपी यादव के घर तीन बार आए थे। आज अखिलेश यादव के साथ साए की तरह नजर आने वाले राजेंद्र चौधरी को बिना चुनाव लड़े मुलायम ने दो बार राज्यमंत्री का दर्जा दिया।

    जितेंद्र यादव पर भी उनका पूरा स्नेह रहा, मगर अब स्थिति काफी हद तक बदल चुकी है। डीपी यादव पार्टी में नहीं हैं और पुराने नेताओं में से अधिकांश सक्रिय नहीं हैं। जितेंद्र यादव एमएलसी हैं मगर शिवपाल यादव के ज्यादा नजदीक माने जाते हैं।

    वह लालू प्रसाद यादव के समधी हैं, इसलिए माना जाता है कि उन्हें एमएलसी बनवाने में लालू की भूमिका अहम रही। राजेंद्र चौधरी मंत्री हैं, मगर मुलायम से ज्यादा अखिलेश के करीबी माने जा रहे हैं।

    राजनीति के जानकारों का मानना है कि पिछले एक दशक के दौरान सपा में जिन युवाओं की सक्रियता बढ़ी या जो अन्य दल छोड़कर सपा में आए, उनकी नजदीकियां अखिलेश यादव से ज्यादा हैं।

    मुख्यमंत्री जैसे पद पर रहते हुए अखिलेश ने भी गाजियाबाद के युवा सपाइयों से संबंध बनाकर रखा। गाजियाबाद में सपा का विधायक और ज्यादा वोट नहीं होने के बावजूद अखिलेश ने बिना भेदभाव के यहां विकास कार्य करवाए।

    लोगों का यहां तक कहना है कि भाजपा व कांग्रेस की सरकारों में और खुद सपा की सरकारों के दौरान गाजियाबाद का कोई न कोई नेता मंत्री रहा है या सत्ता के करीबी रहा है। इसके बावजूद गाजियाबाद में इतने विकास कार्य कभी देखने को नहीं मिले, जितने अखिलेश यादव के शासन काल में हुए हैं।

    जीडीए के पूर्व वीसी संतोष यादव की भी इसमें अहम भूमिका मानी जाती है। माना जा रहा है कि अगर गाजियाबाद में अखिलेश की पसंद के उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे जाएं तो वोट ज्यादा मिलेंगे।

    राजनीति के जानकारों का कहना है कि अखिलेश राहुल गांधी व जयंत चौधरी के साथ गठबंधन करने के पक्ष में हैं मगर मुलायम सिंह यादव इससे सहमत नहीं हैं।