CM अखिलेश के संग जाए या मुलायम का साथ दें, दुविधा में कार्यकर्ता
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद जहां एक धड़ा खुश है। वहीं दूसरे धड़े से जुड़े नेताओं को कड़ाके की ठंड में पसीना आ गया है ...और पढ़ें

नोएडा (मनीष तिवारी)। समाजवादी पार्टी कुनबे में मची उठापटक में पिछले तीन दिनों से नए-नए निर्णय हो रहे हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद जहां एक धड़ा खुश है। वहीं दूसरे धड़े से जुड़े नेताओं को कड़ाके की ठंड में पसीना आ गया है। घोषित उम्मीदवारों की परेशानी अधिक बढ़ गई है। इसे देखते हुए उम्मीदवारों ने लखनऊ में डेरा डालना व आकाओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
पार्टी से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का छह वर्ष के लिए निष्कासन, अगले दिन निष्कासन रद व रविवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी। नए निर्णय से मुख्यमंत्री से जुड़े नेताओं की बांछे खिल गईं। पांच जनवरी को मुलायम सिंह यादव ने पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया था, हालांकि, अब इसे स्थगित कर दिया है।
सपा में जंग : कुनबे की रार दिखा पिता-पुत्र का दम, बेेटा पड़ा भारी
आशंका व्यक्त की जा रही है अधिवेशन में फिर कुछ फेरबदल हो सकता है। लेकिन निर्णय से घोषित प्रत्याशियों की धड़कन बढ़ गई है, जिसका प्रमुख कारण है चाचा व भतीजे के बीच विवाद की मुख्य वजह विधानसभा चुनाव के टिकट का बंटवारा था।
शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। अभी तक पार्टी के घोषित टिकट में शिवपाल की चली थी। टिकट घोषणा में चाचा ने भतीजे को पटकनी दी थी। पार्टी में हुए नए परिवर्तन के बाद आशंका जताई जा रही है अब भतीजे के द्वारा चाचा को पटकनी दी जाएगी, जिसमें टिकट आवंटन में भारी उठापटक होगी।
जिले की तीनों सीटों पर पार्टी के घोषित प्रत्याशी शिवपाल खेमे के थे। प्रत्याशी पिछले लंबे समय से रात-दिन मेहनत कर प्रचार में जुटे हुए थे। पार्टी में हुए बदलाव के बाद उन्हें टिकट कटने का डर सताने लगा है, जिसकी आशंका प्रबल है।
इसे देखते हुए प्रत्याशी लखनऊ का चक्कर लगाने लगे हैं। साथ ही उन लोगों से भी संपर्क में जुट गए हैं जो मुख्यमंत्री के करीबी हैं। उनसे मिलकर व फोन पर बात कर टिकट न कटने का जुगाड़ लगा रहे हैं।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।