आइपीएस एसोसिएशन भी दुर्गा के साथ
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। युवा आइएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन पर उत्तर प्रदेश सरकार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। आइएएस अधिकारियों के बाद भ ...और पढ़ें

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। युवा आइएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन पर उत्तर प्रदेश सरकार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। आइएएस अधिकारियों के बाद भारतीय पुलिस सेवा [आइपीएस] के अफसर भी दुर्गा के समर्थन में लामबंद हो गए हैं।
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सेंट्रल आइपीएस एसोसिएशन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लिखे दो पेज के पत्र में दुर्गा के निलंबन को एकतरफा और मनमानीपूर्ण कार्रवाई बताते हुए निलंबन तत्काल रद करने की मांग की है।
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देशभर के 4,000 से ज्यादा आइपीएस अफसर इस एसोसिएशन के सदस्य हैं।
सुप्रीम कोर्ट भी दुर्गा शक्ति का निलंबन रद करने की मांग वाली जनहित याचिका [पीआइएल] पर जल्द सुनवाई के लिए राजी हो गया है। मुख्य न्यायाधीश पी सतशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ सोमवार को इस पीआइएल पर सुनवाई करेगी।
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यह पीआइएल वकील एमएल शर्मा ने दाखिल की थी। शर्मा ने गुरुवार को पीठ से शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा कि दुर्गा शक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू कराने के कारण ही परेशानी झेल रही हैं। पीआइएल में शीर्ष अदालत के 29 सितंबर, 2009 और 16 फरवरी, 2013 के उन आदेशों को आधार बनाया गया है, जिनमें कोर्ट ने जिला कलेक्टरों व अन्य अधिकारियों को सरकारी व सार्वजनिक भूमि पर मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारा आदि धार्मिक स्थलों का अवैध निर्माण रोकने का आदेश दिया था।
उत्तर प्रदेश सरकार ने गत 27 जुलाई को गौतमबुद्ध नगर की एसडीएम दुर्गा शक्ति को निलंबित कर दिया था। कहा जा रहा है कि दुर्गा का निलंबन रेत माफिया के दबाव में किया गया क्योंकि वह रेत माफिया के खिलाफ कार्रवाई कर रही थीं। राज्य सरकार का हालांकि कहना है कि दुर्गा का निलंबन उनके द्वारा नोएडा के एक गांव में मस्जिद की दीवार गिरवा देने के कारण किया गया क्योंकि उनकी इस कार्रवाई से क्षेत्र का सौहार्द बिगड़ने का खतरा था। गत 4 अगस्त को अखिलेश सरकार ने दुर्गा शक्ति को चार्जशीट थमा कर जवाब भी तलब किया है।
आइपीएस एसोसिएशन से पहले आइएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने भी दुर्गा शक्ति का निलंबन तत्काल रद करने की मांग की थी। 4700 से ज्यादा सदस्यों वाली इस एसोसिएशन ने प्रशासनिक अधिकारियों के निलंबन संबंधी नियम बदलने की भी मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि किसी आइएसएस अफसर के निलंबन से पहले केंद्र सरकार की स्वीकृति लेने का नियम बनाया जाए।
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