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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

खुद भी सख्ती से नियमों का पालन करती हैं दुर्गा

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Published: Thu, 08 Aug 2013 09:31 PM (IST)Updated: Thu, 08 Aug 2013 09:39 PM (IST)

ग्रेटर नोएडा। खनन माफिया पर शिकंजा कसने वाली आइएएस अधिकारी दुर्गाशक्ति नागपाल खुद भी सख्ती से नियमों का पालन करतीं ...और पढ़ें

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ग्रेटर नोएडा। खनन माफिया पर शिकंजा कसने वाली आइएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल खुद भी सख्ती से नियमों का पालन करतीं हैं। आमतौर से सहज और सरल रहने वाली दुर्गा जब कायदे और कानून की बात होती है तो सख्त बन जाती हैं। चाहे लोगों से नियमों का पालन करवाना हो या फिर खुद ही उनका पालन करना हो। दुर्गा को जानने वाले बताते हैं उनका मानना है कि जिसकी अपेक्षा हम दूसरों से करते हैं, उसपर हमें भी अमल करना चाहिए। इसकी मिसाल जिस सोसायटी में दुर्गा रह रही हैं वहां मिलती है।

दुर्गा शक्ति नागपाल अपने पति अभिषेक के साथ ग्रेटर नोएडा के एडब्ल्यूएचओ सोसायटी की फ्लैट संख्या1-बी,104 में रहती हैं। निलंबन के दो दिन बाद से वह यहां नहीं हैं। सोसायटी के गेट पर तैनात गार्ड बताते हैं कि उनके हावभाव में कभी भी आइएएस अधिकारी होने का दंभ नहीं दिखा। सोसायटी के आम नागरिकों की तरह आती जाती थीं। आम लोगों के लिए बने नियमों का पालन करती थीं। मिसाल के तौर सोसायटी में रहने वाले जिन लोगों के कार पर स्टीकर नहीं लगा होता है उन्हें गेट से टोकन लेकर ही अंदर जाने की अनुमति मिलती है। दुर्गा की भी कार पर स्टीकर नहीं था। वह खुद अपनी कार रोककर गार्ड से टोकन लेती थीं। एक बार एक गार्ड ने उन्हें इसके लिए पूछा भी, जिसपर उनका जवाब था कि सोसायटी के नियम सभी के लिए बराबर हैं। घर पर लटका ताला निलंबन के दो दिन बाद से दुर्गा शक्ति नागपाल के घर पर ताला लगा है। पति अभिषेक फिलहाल ट्रेनिंग के लिए मसूरी गए हुए हैं।

आसपास के लोगों ने बताया कि दुर्गा निलंबन के दो दिन बाद तक यहां आती जाती रहीं। लेकिन दो दिन बाद जब गईं तबसे वापस नहीं लौटी हैं। न ही परिवार का कोई सदस्य आया है। गरीब बच्चों को पढ़ाती थीं दुर्गा शक्ति नागपाल का शहर से रिश्ता तकरीबन आठ वर्ष पुराना है। दुर्गा के पिता नॉलेज पार्क के एक तकनीकी और प्रबंधन संस्थान में प्रमुख सलाहकार हैं। आठ वर्षो से ग्रेटर नोएडा में ही रह रहे हैं। दुर्गा जब आइएएस बनीं तब भी उनका परिवार यहीं रहता था। दुर्गा के पिता नॉलेज पार्क के इसी संस्थान में गरीब मुख्य रूप से कंस्ट्रक्शन साइटों में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों के लिए रेनबो नाम का एक स्कूल चलाते हैं। इसमें संस्थान के अध्यापक ही पढ़ाते हैं। इस स्कूल के बच्चों को पढ़ाने दुर्गा भी जाया करती थीं। यहां पढ़ाने वाली एक शिक्षिका ने बताया कि आइएएस चयनित होने से पहले हर वर्ष तकरीबन एक महीने दुर्गा यहां आकर बच्चों को पढ़ाती थीं। उन्होंने बताया कि महज खानापूर्ति करने नहीं आती थीं। बहुत रुचि के साथ बच्चों को पढ़ाती थीं। इसके साथ ही इन बच्चों को कैसे मुख्यधारा से जोड़ा जा सके, इस पर अपनी राय भी देती थीं।

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