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    'मेरी चमड़ी मोटी हो गई है', आखिर क्यों कह रहे हैं जॉन अब्राहम!

    जॉन अब्राहम की फिल्म 'ढिशूम' रिलीज के लिए तैयार है। रोहित धवन निर्देशित इस एक्शन फिल्म में वो वरूण धवन के साथ पहली बार स्क्रीन पर आ रहे हैं।

    By Manoj KumarEdited By: Updated: Mon, 25 Jul 2016 12:27 PM (IST)

    मुंबई। जॉन अब्राह्म मतलब बाइक। जॉन अब्राह्म मतलब एक्शन। जॉन अब्राह्म मतलब कूल। ऐसा हम नहीं, खुद जॉन मानते हैं, कि युवा उनके बारे में ऐसा ही सोचते, इसलिए तो साल में उनकी एक फिल्म एक्शन से भरपूर होती ही है। इस बार 'ढिशूम' में एक्शन की फुल डोज लेकर आ रहे हैं। पेश है अनुप्रिया वर्मा से हुई जॉन की बेहद दिलचस्प बातचीत।

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    'ढिशूम' किस तरह की फिल्म है. टाइटिल से तो लग रहा, खूब मार-धाड़ होगी?

    हां, मेरे फैन्स के लिए तोहफा है मेरी फिल्म. इसमें अलग तरह का एक् शन है. दोस्ताना के बाद एक बार फिर से लोगों को ब्रोमास देखने को मिलेगा। इस बार रोमांस वाला नहीं, ऐक्शन वाला ब्रोमांस होगा वरुण के साथ। दूसरी बात है कि रोहित धवन मेरा फ्रेंड है, तो उसके साथ मैं बहुत कंफर्टेबल था। सो, इस फिल्म को हां कह दिया। उसके साथ मैंने 'देसी ब्वॉयज' की थी। उससे मजेदार बनी है 'ढिशूम'।

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    यूथ के लिए आप अलग तरह से आइकॉन हैं. इस इमेज में बने रहना कितना आसान, कितना कठिन है?

    जी बिल्कुल मैं मानता हूं। जब भी मेरे फैन्स मुझसे मिलते हैं. वे हमेशा मुझसे मेरे बाइक के अंदाज के बारे में बातें करेंगे या फिर एक् शन के बारे में। मैं अपने हर फैन्स से मिलता हूं तो उनके सामने मेरी माचो हीरो वाली ही पहचान है। ऐसे में मैं रोमांटिक रोल करूंगा तो वह पूरी तरह से मुझ पर जंचेगा नहीं। इसलिए मैं फैंस का पूरा ख्याल रखते हुए साल में एक एक्शन फिल्म जरूर करता हूं, लेकिन मैं जब यह सुनता हूं कि मेरे स्टंट देख कर और भी बच्चे या युवा उसे कॉपी कर रहे होते हैं, तो कुछ दुर्घटना घट जाती है तो मैं बहुत दुखी हो जाता हूं। खासतौर से जब सारा इल्जाम मुझ पर लगे तो। ऐसे में मेरी कोशिश होती है कि जब भी किसी यूथ फैन से मिलूं, उन्हें समझाऊं कि मेरे भाई, हीरोगीरी न दिखाया करो...हमारी दुनिया अलग है। मेरी कोशिश होती है कि मैं फैंस को अलग दुनिया में न ले जाऊं। उन्हें धरातल पर रखूं। उन्हें समझाऊं कि आइडल मान रहे तो अच्छा है, लेकिन बुरी चीजें ना लें।

    मैंने सुना है, आप अन्य स्टार्स की तरह कभी अपने किसी भी फैंस को दुखी नहीं करते और हर हाल में उनसे मिलते ही हैं?

    हां, मुझे लगता है कि जब मैं कहीं नहीं था, तो यही लोग थे, जिन्होंने 'धूम' जैसी फिल्मों से मेरी इमेज बनायी। फिर मुझे स्वीकारा। हां, मगर कई बार आप अपना दुख दर्द उन्हें नहीं बता सकते। जैसे मुझे किसी के साथ तस्वीरें लेने या सेल्फी लेने से प्रॉब्लम नहीं है। दिक्कत बस यह है, इन दिनों मेरी आंखों में परेशानी चल रही है और मुझे कैमरे के फ्लैश से प्रॉब्लम है। डॉक्टर ने मुझे मना किया है, लेकिन मैं यह बातें किसी को समझा नहीं सकता। फैंस के लिए तो वही मोमेंट खास हो जाते हैं। सो, आइ डोंट अपसेट देम।

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    कभी परिवार में किसी के साथ ढिशूम-ढिशूम खेला है?

    खूब खेला है। मैं और मेरे भाई खेला करते थे। खूब मजा आता है, लेकिन सीरियसली ना किसी से खाई है और ना ही कभी किसी को मारा है, क्योंकि मुझे जल्दी गुस्सा आता ही नहीं है।

    आप पहले मॉडल रहे, फिर बॉलीवुड में आये. लेकिन आज भी वैसे ही हैं. जैसे पहले थे. फिटनेस का राज क्या है?

    आप विश्वास नहीं करेंगी, मैंने 20 सालों में अपनी डाइट नहीं बदली है। आज भी मैं वही खाता हूं, जो 20 साल पहले खाता था। आइ लव माय सलाद, लव माय फ्रूट्स, अंडे, और मुझे यह सब खाने में कोई अफसोस नहीं होता। मैं नहीं रोता कि अरे मैं तो टेस्टी खाना नहीं खा पा रहा। मेरा यकीन कीजिए, आप लोग भी 20 महीने आजमा कर देखिए, आप भी खुद में बदलाव महसूस करेंगे। इंडस्ट्री में सभी मुझसे टिप्स लेते. सिवाय अभिषेक बच्चन के। वह कहेगा बाबा रहने दो। मेरी दाल-रोटी ठीक। तुम पैक्स-वैक्स बनाओ।

    इन दिनों स्टार्स किसी किरदार के लिए पैक्स बनाते, फिर वजन घटाते और बढ़ाते रहते हैं। इसे कैसे देखते?

    पर्सनली बोलूं तो यह हेल्थ के लिए ठीक नहीं। फिटनेस आज या कल की चीज नहीं है। मैं ऐसा मानता हूं। आपको इसके साथ डिसीप्लिन होना पड़ता है. और रेगुलर होना पड़ता है। मेरे लिए एकदम से वजन बढ़ाना फिर कम वक्त में उसे घटाना सही नहीं है। मैं अगर वजन घटाता या बढ़ाता भी हूं तो वक्त लेता हूं।

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    आपके बारे में जब मीडिया में निगेटिव खबरें आती हैं, तो आपका परिवार किस तरह रिएक्ट करता है?

    सच कहूं तो अब भी भारतीय मीडिया बाकी सारे देशों से अच्छी और सेंसिबल है, वरना विदेशों में तो स्टार्स के बाथरूम तक की खबरें होती हैं। मुझे समझ आती हैं यह बातें कि आप लोगों का भी काम है, और मैं रिस्पेक्ट करता हूं। गिव एंड टेक होना चाहिए मीडिया-स्टार्स के बीच। और जहां तक बात है रियूमर की तो फर्स्ट डे से मेरे बारे में रियूमर होते हैं, अब और कितना मारोगे, घोड़ा उठेगा नहीं, मेरी चमड़ी भी मोटी हो गयी है। कोई फर्क नहीं पड़ता। हां, परिवार वालों को कभी फिक्र होती है। जैसे मम्मी टीवी देख रही हों और अचानक कोई खबर टीवी पर आए तो वह घबरा कर बोलती हैं, कि टीवी पर तो यह आ रहा कि तुझे चोट लगी है, तो मैंने परिवार में सबको समझा दिया है, कि सारी खबरों पर विश्वास न करें। मेरी पत्नी को भी अब फर्क नहीं पड़ता।

    किसी पर आधारित बायोपिक नहीं करना चाहेंगे?

    नहीं, ऐसा मैंने कुछ सोचा नहीं है कि करना है या नहीं। लेकिन मुझे लगता है, कि स्पोर्ट्स पर अच्छी बायोपिक कर सकता हूं मैं। और कौन से प्रोजेक्ट्स की तैयारी... 'फ़ोर्स 2' कर रहा हूं मैं। और अपने होम प्रोडक्शन की फिल्में हैं।

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