लंदन, एजेंसी। इरफान की ब्लॉकबस्टर फिल्म लाइफ ऑफ पाइ आपको याद होगी। किस तरह से फिल्म का नायक (एक युवक) असीम सागर में एक नाव में फंस जाता है। वह हवा और समुद्री लहरों के भरोसे किनारे पहुंचने और जिंदा रहने के लिए वर्षों संघर्ष करता है। ऐसे सफर के बारे में सोचकर भी कई लोगों की रूह कांप जाएगी। रील लाइफ की इस लाइफ ऑफ पाइ को फ्रांस के 71 वर्षीय बुजुर्ग जीन-जैक्स सविन रीयल लाइफ में अनुभव करने जा रहे हैं। हालांकि उनका ये अनुभव कई मायनों में लाइफ ऑफ पाइ से भी खतरनाक होगा।

जीन-जैक्स सविन एक एडवेंचरर हैं। इससे पहले भी वह कई एडवेंचर कर चुके हैं। इस बार उन्होंने प्वाइवुड से बनी एक छोटी सी बैरल में अटलांटिक महासागर को पार करने की योजना बनाई है। इसमें कोई इंजन नहीं होगा। वह इस बैरल के अंदर बैठकर हवाओं और समुद्र की धाराओं की मदद से ये सफर पूरा करेंगे। बैरल में सफर के दौरान उनके पास बेहद सीमित संसाधन होंगे। बैरल के अंदर एक छोटी सी टेबल और उनके सोने के लिए एक बिस्तर मात्र है, जिसमें वह खुद को बांधकर सो सकेंगे। बैरल में उन्होंने एक महीने तक पेट भरने के लिए फल आदि रखे हैं। इस सफर में उनके मनोरंजन के लिए बैरल में चारों तरह शीशे की छोटी-छोटी खिड़कियां हैं, जो उनके लिए समुंद्री सफर के लाइव टीवी का काम करेगी।

एडवेंचरर जीन-जैक्स सविन ने बुधवार को मोरक्को के पश्चिम में स्पैनिश द्वीप समूह के कैनरी द्वीप के सबसे छोटे द्वीप एल हिरो से इस सफर की शुरूआत की है। उनका ये सफर हवाओं और समुद्री लहरों के जरिए कैरेबिया में पूरा होगा। अपने सफर के अनुभवों को साझा करने के लिए जीन-जैक्स सविन ने एक फेसबुक पेज बनाया है। इसी फेसबुक पेज पर वह सफर के दौरान अपनी दैनिक दिनचर्या और जीपीएस लोकेशन भी शेयर करेंगे।

प्लाईवुड का बना है बैरल
इससे पहले भी नियाग्रा फॉल्स के ऊपर जाने के लिए कई लोग इस तरह के बैरल का प्रयोग कर चुके हैं। इनमें से कुछ जीवित भी हैं। नियाग्रा फॉल्स, तीन झरनों का मिश्रित स्वरूप है, जो कनाडा के ओंटारियो प्रांत और अमेरिकी राज्य न्यूयॉर्क के बीच अंतर्राष्ट्रीय सीमा को प्रभावित करता है। हालांकि अब तक किसी ने प्लाईवुड के बैरल में अटलांटिक महासागर पार नहीं किया है।

जीन-जैक्स सविन प्लाईवुड के जिस बैरल में ये खतरनाक सफर करने जा रहे हैं, वह नारंगी रंग का है। इसका आकार 10 फीट लंबा और 6.8 फीट चौड़े कैप्सूल की तरह है। इसे सीधा रखने के लिए कंक्रीट के एक ठोस धरातल का इस्तेमाल किया गया है। सविन को उम्मीद है कि वह बैरल के जरिए तीन माह में अपना सफर पूरा कर लेंगे।

बैरल में हैं ये सुविधाएं
सविन वाइन के शौकीन हैं, लिहाजा उनकी बैरल में सुविधा के नाम पर एक बड़े से पारंपरिक पात्र (एम्फोरा) में वाइन है। सविन के सफर के लिए वाइन की एक और बोतल फ्रांस में बनी रही है। सविन की वापसी के बाद विशेषज्ञ दोनों वाइन के स्वाद की तुलना करेंगे। इसके अलावा उनके बैरल में एक सीट और अधिकांश भाग में एक रसोई काउंटर है। इसके बाद बैरल में बमुश्किल एक आदमी के खड़े होने की जगह है। दो डॉक्टर समुद्र में ऐसे सीमित स्थान पर महीनों के बाद सविन के स्वास्थ्य और व्यवहार का अध्ययन करेंगे। सविन के बैरल में चारों तरफ छोटी-छोटी खिड़कियां बनी हुई हैं। कैप्सूल में उन्हें मार्गदर्शन करने के लिए उपग्रह तकनीक भी है और महासागर अनुसंधान के लिए डेटा एकत्र करने वाले उपकरण भी हैं।

पूर्व सैन्यकर्मी हैं सविन
71 वर्षीय सविन फ्रांस के दक्षिण-पश्चिम छोर में अरेस्ट के समीप के एक शहर के रहने वाले हैं। वह एक पूर्व सैन्यकर्मी हैं। वह पैराशूटिस्ट, पायलट व अफ्रीका में पार्क रेंजर भी रह चुके हैं। उन्होंने अपनी वेबसाइट पर इस यात्रा के बारे में लिखा है कि यह एक ऐसी यात्रा होगी जिसमें आदमी अपने जहाज का कप्तान नहीं है, लेकिन महासागर का एक यात्री है। मतलब वह अपने जहाज पर बिना किसी नियंत्रण के समुंद्र की यात्रा कर रहा है।

पहले भी चार बार कर चुके हैं अटलांटिक का सफर
सविन इससे पहले भी चार बार पाल वाले जहाज से अटलांटिक महासागर को पार कर चुके हैं। उनसे पहले 1952 में एक अन्य फ्रांसीसी एलेन बॉम्बर ने कैनरी द्वीप से बारबाडोस के लिए एक छोटी सी रबर बोट में सफर किया था। इस दौरान उन्होंने समुद्री जल, शैवाल और कच्ची मछलियों से जीवन यापन किया था। उनकी यात्रा काफी चर्चा में रही थी। इसके कई दशक बाद सविन का ये सफर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में है।

सविन की इस यात्रा के लिए उन्हें 55,000 यूरो (62000 डॉलर) की प्रारंभिक फंडिंग प्राप्त हो चुकी है। फंडिंग करने वालों में दो फ्रांसीसी बैरल निर्माता भी शामिल हैं। शेष राशि अन्य लोगों द्वारा (क्राउडफंडिग से) एकत्र की गई है।

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Posted By: Amit Singh

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